सरकार पर भारी, अवैध रूप से चल रही ओवरलोडिड ट्रैक्टर-ट्रालियों की सवारी

Friday, January 05, 2018 12:35 PM
सरकार पर भारी, अवैध रूप से चल रही ओवरलोडिड ट्रैक्टर-ट्रालियों की सवारी

यमुनानगर(ब्यूरो):जिला प्रशासन व सरकार चाहे ओवरलोड बंद करने के कितने भी दावे क्यों न करती रहे लेकिन ओवरलोड है कि बंद होने का नाम ही नहीं ले रहा। ओवरलोडिड वाहन जिला प्रशासन पर भारी पड़ रहे हैं। विशेष रूप से ट्रैक्टर-ट्रालियों ने तो ओवरलोड में हद ही कर दी है। औद्योगिक नगरी होने के कारण यहां करीब करीब 10 हजार ट्रैक्टर-ट्रालियां अवैध रूप से ट्रांसपोर्ट का काम कर रही हैं लेकिन इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। इनके लिए न कोई कायदा न कोई कानून। अधिकतर ट्रैक्टर चालकों के पास तो ड्राइविंग लाइसैंस भी नहीं है। इन ट्रैक्टर-ट्रालियों के चलते ट्रांसपोर्ट का मुख्य व्यवसाय भी लगभग बंद होने की कगार पर है।

 ट्रैक्टर-ट्रालियों की भरमार को लेकर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी न जाने कितनी बार इस बारे में लिखित शिकायत जन प्रतिनिधियों व जिले के आला अधिकारियों से कर चुके हैं लेकिन परिणाम शून्य ही रहा। अब तो ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने भी सभी ओर से हताश होकर हाई कोर्ट जाने का मन बना रखा है। यातायात के नियमों की किस तरह धज्जियां उड़ाई जा रही हैं यह इन ट्रैक्टर-ट्रालियों के सड़क पर उतरते ही देखा जा सकता है। प्लाईवुड उद्योग हो या फिर कृषि क्षेत्र, या फिर मेटल हर जगह ही तो ट्रैक्टर-ट्रालियों द्वारा ट्रांसपोर्ट का कार्य किया जा रहा है और इन पर कोई कायदा कानून नहीं है। यहां तक की छोटे-छोटे कार्य के लिए ट्रैक्टर-ट्राली का कमर्शियल प्रयोग किया जा रहा है। 

हजारों ट्रालियां शूगर मिल में गन्ना लाती हैं जोकि हमेशा ही ओवरलोडिड होकर चलती हैं। इतना गन्ना तो एक ट्रक में नहीं लदा होता जितना इन ट्रालियों में लाद दिया जाता है। पिछले ही दिनों एक बैठक में यह मुद्दा उठा था और अधिकारियों ने कहा था कि अब कोई ट्रैक्टर चालक ट्रैक्टर-ट्रालियों में ओवरलोड नहीं करेगा। ट्रैक्टर चालक की हाइट के बराबर ही समान लदा होगा लेकिन यहां तो ट्रैक्टर चालक की हाइट से भी 5 से 7 फुट ऊंचे तक गन्ना, लकड़ी व अन्य सामान लदा रहता है। कानूनन तो ट्रैक्टर-ट्राली का कमॢशयल प्रयोग नहीं कर सकते लेकिन यहां सब चल रहा है। ट्रैक्टर-ट्राली का प्रयोग केवल कृषि कार्य के लिए ही किया जा सकता है। अन्य कार्यों के लिए यदि इसका प्रयोग किया जा रहा है तो यह गैर कानूनी है। आर.टी.आई. से मिली जानकारी के अनुसार ट्रैक्टर-ट्राली पर किसी व्यक्ति का बैठना भी गैरकानूनी है लेकिन यहां तो ट्रालियां भर-भरकर ओवरलोडिड करके चलाई जा रही हैं। 

बैठक में बुलाया जाए ट्रांसपोर्टरों को 
हर माह होने वाली यातायात संबंधी बैठक में ट्रांसपोर्टरों को नहीं बुलाया जाता। हालांकि वे इस दिशा में सही सुझाव दे सकते हैं। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि इन बैठकों में तो ऐसे लोगों को बुलाया जाता है जिनका सड़कों व यातायात से दूर-दूर तक का कोई लेना-देना नहीं है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि पब्लिक प्रापर्टी डैमेज एक्ट के तहत इन वाहनों व वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और ट्रैक्टर-ट्रालियां पर भी टोल टैक्स लगाया जाना चाहिए क्योंकि इनका कृषि प्रयोग तो हो ही नहीं रहा। ट्रांसपोर्टरों ने बताया कि ट्रक चालक सरकार को लाखों रुपए का राजस्व देता है। कहीं स्टेट परमिट के नाम पर तो कहीं नैशनल परमिट के नाम पर, कहीं पासिंग के नाम पर तो कहीं इंश्योरैंस के नाम पर। 

लगभग 4 लाख रुपए इस प्रकार हर वर्ष एक ट्रक पर खर्च किए जाते हैं, जबकि उसकी उम्र एन.सी.आर. व दिल्ली में 10 साल और अन्य राज्यों में 15 वर्ष ही है। इस संबंध में यातायात के प्रभारी निर्मल सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इस दिशा में आर.टी.ए. की ओर से कार्रवाई की जाती है और जिले में आज से कई नाके लगाए गए हैं। नाकों से होते हुए यदि कोई ओवरलोडिड वाहन आता है तो उसका चालान व उस पर नियमित कार्रवाई की जाएगी। ट्रैक्टर-ट्रालियों को किसी श्रेणी में रखा गया है इस संबंध में जब ए.डी.सी. के.के. भादू से बात करनी चाही, उन्हें कई बार फोन किया पर उन्होंने फोन नहीं उठाया, वैसे प्रशासनिक मीटिंग में बड़ी-बड़ी कानून की पालना की बातें करने वाले यह अधिकारी जनता के लिए अपने हैल्पलाइन मोबाइल नम्बर भी जारी करते हैं और वैसे फोन नहींं उठाते। 

उनसे बात नहीं हो सकी। गन्ने की ओवरलोडिड ट्रालियों व ट्रकों को आज भी कोई रोकने वाला नहीं था। न तो कहीं इन ट्रालियों को रोकते हुए देखा गया और नहीं खुद शूगर मिल की ओर से इस दिशा में कोई जागरूकता अभियान चलाया गया जिससे किसानों व अन्य ट्रैक्टर चालकों को जागरूक किया जा सके कि वे ओवरलोड गन्ना लादकर न लाएं। ओवरलोड को लेकर ट्रकों जिनमें रेत व बजरी लदी हुई थी उनकी जरूर जांच की गई और उनके चालान भी काटे गए लेकिन ट्रैक्टर-ट्राली व गन्नों के ट्रकों की कोई जांच नहीं थी। शायद इन पर ओवरलोड का कोई कानून ही लागू नहीं होता।



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