मांसाहारी वस्तुओं में इस्तेमाल अवशेष किस जानवर का है? यह बताना अनिवार्य

Tuesday, March 13, 2018 8:38 PM
मांसाहारी वस्तुओं में इस्तेमाल अवशेष किस जानवर का है? यह बताना अनिवार्य

चंडीगढ़ (धरणी): जानवरों के अवशेषों से बनने वाली दवाओं, कॉस्मेटिक और खाने की  वस्तुओं में निमातज़ पैकेज पर लाल निशान लगा होता है लेकिन पैकेज पर कहीं भी यह नहीं बताया जाता कि वस्तु या पदार्थ में किस जानवर का क्या अवशेष है? अब इसकी पैकेज पर जानकारी दी जाने की मांग को लेकर गौवंश सेवा समिति ने हाई कोर्ट जनहित याचिका दायर कर दी है। याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने केन्द्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

गौवंश सेवा समिति की ओर से एडवोकेट वी.बी. अग्रवाल ने हाई कोर्ट कोर्ट बताया कि देश में 60 प्रतिशत से अधिक लोग शाकाहारी हैं। बाजार में बिकने वाले उन सभी उत्पादों पर उन जानवरों के बारे में जानकारी नहीं होती जिनके अवशेष से उत्पाद बनाया गया है।

इससे सीधे तौर पर उन सभी की धार्मिक भावनाओं की उपेक्षा की जा रही जो शुद्ध रूप से शाकाहारी हैं। इस मांग को लेकर याचिकाकर्ता संस्था ने पिछले तीन वर्षों में सम्बंधित अथॉरिटी को तीन बार रेप्रेजेंटेटिव भी दी थी जिस पर आज तक कोई कार्यवाही ही नहीं की गई है ।

याचिकाकर्तासंस्था ने बताया है कि प्रत्येक उत्पाद पर उन सभी वस्तुओं की जानकारी दिया जाना अनिवार्य है जिनसे उस उत्पाद को बनाया गया है। इस जानकारी से उन लोगों को जो शुद्ध रूप शाकाहारी हैं उन्हें उत्पाद के पैकेज से ही जानकारी मिल जायेगी कि इस उत्पाद में किस जानवर का अवशेष है।



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