Haryana : सास-ससुर भी मांग सकते हैं बहू की मौत पर मुआवजा, High Court ने दिया मिसाल बनने वाला फैसला

punjabkesari.in Wednesday, Jun 03, 2026 - 04:35 PM (IST)

चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में गृहिणियों के योगदान को कानूनी मान्यता देते हुए कहा है कि परिवार के लिए गृहिणी द्वारा किए जाने वाले कार्यों और सेवाओं का आर्थिक मूल्य होता है, जिसे सड़क दुर्घटना मुआवजे के निर्धारण के दौरान नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सास-ससुर अपनी दिवंगत बहू के कानूनी प्रतिनिधि और आश्रित के रूप में मुआवजा मांगने के पूर्ण अधिकार रखते हैं।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के जस्टिस यशवीर सिंह राठौर की पीठ ने 24 वर्ष पुराने एक सड़क हादसे से जुड़े मामले में वृद्ध दंपती को बड़ी राहत प्रदान की है। अदालत ने दिवंगत बहू शोभा रानी की मौत पर 8.66 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया, जबकि बेटे बलविंदर सिंह की मृत्यु पर पहले निर्धारित 1.38 लाख रुपये के मुआवजे को बढ़ाकर 7.14 लाख रुपये कर दिया।

क्या था मामला
बता दें कि यह मामला 1 फरवरी 2000 को करनाल में हुए एक सड़क हादसे से संबंधित है। हादसे में बलविंदर सिंह और उनकी पत्नी शोभा रानी की मौत हो गई थी। आरोप था कि एक ट्रक चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी, जिसके कारण दोनों की जान चली गई।

दुर्घटना के बाद माता-पिता ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में मुआवजे की याचिका दायर की थी। वर्ष 2002 में ट्रिब्यूनल ने बेटे की मौत पर मुआवजा दिया, लेकिन बहू के संबंध में दावा खारिज कर दिया था।

कोर्ट ने माना कि गृहिणी परिवार की देखभाल, घरेलू जिम्मेदारियों और दैनिक संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिसकी आर्थिक कीमत होती है। अदालत ने ट्रिब्यूनल का फैसला पलटते हुए सास ससुर को बहू की मृत्यु पर भी मुआवजा देने का आदेश दिया। यह फैसला गृहिणियों के योगदान को कानूनी मान्यता देने और भविष्य के समान मामलों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।  

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Content Editor

Krishan Rana

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