हरियाणा के धार्मिक-पर्यटन स्थलों पर बड़ी पहल: अब अस्थायी नहीं, कचरा प्रबंधन के लिए बनेगा स्थायी और वैज्ञानिक सॉलिड वेस्ट मॉडल
punjabkesari.in Friday, Oct 02, 2026 - 07:28 PM (IST)
चंडीगढ़( चंद्र शेखर धरणी): हरियाणा सरकार ने भीड़भाड़ वाले पर्यटन एवं तीर्थ स्थलों पर ठोस कचरा प्रबंधन को स्थायी, वैज्ञानिक और तकनीक आधारित बनाने की रणनीति तैयार की है। इसके तहत मेलों और त्योहारों के दौरान किए जाने वाले अस्थायी इंतजामों के बजाय प्रत्येक स्थल के लिए उसकी जरूरत के अनुसार अलग सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट मॉडल विकसित किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में गुरुग्राम स्थित श्री माता शीतला देवी मंदिर, पंचकूला स्थित श्री मनसा देवी मंदिर और कुरुक्षेत्र के थानेसर स्थित ब्रह्म सरोवर को इस योजना में शामिल किया गया है।
भीड़ और कचरे का बनेगा डिजिटल डेटाबेस
रणनीति के तहत संबंधित शहरी निकाय प्रत्येक स्थल का विस्तृत आकलन करेगा। इसमें स्थल का धार्मिक अथवा पर्यटन महत्व, सामान्य दिनों की वार्षिक भीड़, पीक सीजन और पीक डे के दौरान आने वाले लोगों की संख्या तथा कम से कम सात दिन का कचरा ऑडिट शामिल होगा। आकलन के आधार पर शहरी निकाय और जिला स्तर पर डेटाबेस तैयार किया जाएगा। निदेशालय स्तर पर इन आंकड़ों को एकीकृत किया जाएगा और प्रत्येक नए आकलन के बाद डेटाबेस को अपडेट किया जाएगा।
IoT डिब्बों से मिलेगी रियल-टाइम जानकारी
प्रस्तावित व्यवस्था में IoT आधारित स्मार्ट डस्टबिन लगाए जाएंगे। सेंसर के माध्यम से डिब्बों में कचरे के भराव का स्तर रियल-टाइम में पता चल सकेगा। कुछ डिब्बों में ऑटोमैटिक ढक्कन खोलने की सुविधा भी होगी।
इस तकनीक से सफाई एजेंसियों को यह जानकारी मिल सकेगी कि किस स्थान पर कूड़ेदान भर चुका है और किस स्थान से कचरा तत्काल उठाने की जरूरत है। साथ ही कचरा फेंकने वाले हॉटस्पॉट की पहचान कर उन्हें जियो-टैग किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप होगा गैप एनालिसिस
शहरी निकाय विभाग ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026 की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रत्येक चयनित स्थल का गैप एनालिसिस कराने की योजना बनाई है। इसमें सफाई कर्मचारियों की उपलब्धता, उपकरण, दिन में कम से कम दो बार सफाई की व्यवस्था, कचरे के चार-स्ट्रीम सेग्रीगेशन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तथा डोर-टू-डंपिंग/कलेक्शन और परिवहन व्यवस्था का आकलन किया जाएगा।
यह ब्लूप्रिंट सुप्रीम कोर्ट के 5 मई के भोपाल म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन बनाम डॉ. सुभाष सी. पांडे एवं अन्य मामले में दिए निर्देशों के अनुपालन में तैयार किया गया है। आदेश के पैरा 10 में मुख्य सचिवों को पर्यटन एवं तीर्थ स्थलों की पहचान कर वहां ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विशेष व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए थे।
500 मीटर का बनेगा बफर जोन
हर चयनित स्थल को मुख्य प्रिसिंक्ट और उसके आसपास के 500 मीटर बफर जोन में व्यवस्थित किया जाएगा। इसमें अप्रोच रोड, वेंडर बेल्ट, पार्किंग क्षेत्र और कचरे को प्रोसेसिंग सुविधा तक ले जाने वाले मार्ग को भी शामिल किया जाएगा।
निर्धारित मार्गों पर प्रत्येक 50 मीटर और लाइन वाले कॉरिडोर में प्रत्येक 25 मीटर पर चार-चार प्रकार के कूड़ेदान लगाए जाएंगे। प्रमुख स्थानों पर चार-स्ट्रीम कलेक्शन स्टेशन बनाए जाएंगे, जहां कचरे के लिए ढकी हुई जगह उपलब्ध होगी। 500 मीटर के बफर जोन में कचरा जमा करने के लिए किसी भी प्रकार की खुली जगह नहीं होगी।
पीक सीजन में अलग टीमें और वाहन
अधिक भीड़ वाले दिनों और पीक सीजन में प्रत्येक स्थल के लिए विशेष कचरा संग्रहण वाहन और सफाई टीमें तैनात की जाएंगी। इससे सामान्य दिनों और अत्यधिक भीड़ वाले दिनों की जरूरत के अनुसार संसाधनों को बढ़ाया जा सकेगा। फूलों के कचरे के निपटान के लिए भी अलग व्यवस्था की जाएगी। फूलों के कचरे को जलाशयों अथवा अन्य जलस्रोतों में विसर्जित करने की अनुमति नहीं होगी।
भंडारे, प्रसाद और फूल विक्रेता भी व्यवस्था का हिस्सा
500 मीटर के बफर जोन में आने वाले भंडारे, प्रसाद एवं फूलों की दुकानें, धर्मशालाएं, होटल और ढाबे बल्क वेस्ट जनरेटर के रूप में चिह्नित किए जाएंगे। इन्हें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ पंजीकृत कराने की व्यवस्था की जाएगी।
शहरी निकाय विभाग के कमिश्नर एवं सचिव अशोक कुमार मीना के अनुसार, इस रणनीति का उद्देश्य भीड़भाड़ वाले स्थलों पर कचरा प्रबंधन को मेलों और त्योहारों तक सीमित अस्थायी व्यवस्था से निकालकर स्थायी, स्थल-विशिष्ट, तकनीक आधारित और निरंतर मॉनिटर किए जाने वाले सिस्टम में बदलना है।
इस मॉडल की शुरुआत तीन प्रमुख धार्मिक स्थलों से होने के बाद आवश्यकता और अनुभव के आधार पर इसे प्रदेश के अन्य प्रमुख पर्यटन, धार्मिक, हेरिटेज स्थलों, पवित्र जलाशयों, मेलों और त्योहारों वाले क्षेत्रों तक विस्तार दिया जा सकेगा।