मलेरिया और डायरिया पर कसेंगे लगाम
punjabkesari.in Wednesday, Apr 03, 2019 - 11:24 AM (IST)

फरीदाबाद(सुधीर राघव): जिले के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को डेंगू, मलेरिया और डायरिया जैसी घातक बीमारियों की रोकथाम के लिए जिले भर के ग्रामीण क्षेत्रों में युद्ध स्तर पर नो मलेरिया, नो डायरिया अभियान के तहत फीवर मास सर्वे शुरू कर दिया हैं। इस कार्य में विभाग के 100 चिकित्सा कर्मियों की 25 टीमें बनाकर लगाई गई है। हर टीम में चार सदस्यों को रखा गया है, जो गांव-गांव और घर-घर जाकर बड़े स्तर पर बुखार, उल्टी-दस्त के रोगियों की जांच करेंगे।
सीएमओ डॉ. गुलशन अरोड़ा ने बताया कि डेंगू, मलेरिया, डायरिया इन सभी बीमारियों का संबंध कहीं न कहीं पानी है। डेंगू साफ पानी में पनपता है तो मलेरिया मादा एनाफि लीज म४छर के काटने से होता है। डायरिया खान-पान की खराबी से होने वाली मौसमी बीमारी मानी जाती है। इसलिए सतर्कता सबसे ४यादा जरूरी है। उन्होंने बताया कि 118 गांवों में सर्वे के दौरान जहां भी मरीज बीमारियों से ग्रसित मिलेंगे वहां सभी के रक्त के सैम्पल लिए और पशुओं के लिए जमा पानी में हैलोजन की गोलियां डाली गई।
25 टीमों में मल्टीपरपज हैल्थ वर्कर, ट्रेनी पर्यवेक्षक, आशा वर्कर और एएनएम शामिल हैं। जिन्हें 4 दिनों में फरीदाबाद जिले के 118 गांवों को कवर करना है। फीवर मास सर्वे में लगे कर्मचारियों को हर रोज सीएमओ ऑफिस में बायोमैट्रिक मशीन से सुबह व शाम को हाजिरी देनी अनिवार्य रहेगी और सर्वे की रिपोर्ट सीएमओ ऑफिस में ही जमा करवानी होगी। पहले दिन मोहना, दयालपुर, वजीरपुर, मंझावली, जसाना, खेड़ी, खेड़ी कला, छांयसा, पाली, गौंछी, अटाली, पलवली, बदरपुर से सटे पल्ला, न्यू तिलपत, सेहतपुर गांव समेत दर्जनों गांवों का सर्वे किया गया। जो करीब 4 दिनों तक जारी रहेगा।
मलेरिया प्रभारी एवं डिप्टी सिविल सर्जन डॉ.रामभगत ने बताया कि सर्वे के अलावा मल्टीपरपज हैल्थ वर्कर शहर में सप्लाई होने वाले जलापूर्ति के 1400 ट्यूबवैल, 76 बूस्टरों के लीकेज बंद करवाने की जिम्मेदारी संभालेंगे। ताकि शहर में दूषित जलापूर्ति होने से रोकी जाए। यदि ऐसा हुआ तो शहर में पीलिया और डायरिया का खतरा होगा। वहीं शहर के 150 तालाबों में गंबुशिया मछलियों की कमी न हो इसके लिए इन वाटर पॉड पर मछलियां डलवाई जाएंगी। मच्छरों के लार्वा को खत्म करने में गंबुशिया मछलियों की अहम भूमिका रहती है क्योंकि स्वास्थ्य कर्मी बारिश के समय में जमा पानी में इन मछलियों को डालते हैं।
डायरिया
कारण : दूषित जल का सेवन, वायरल इंफेक्शन, पेट में बैक्टीरिया का संक्रमण, शरीर में पानी की कमी और आसपास साफ सफाई न होने से होता है।
लक्षण : दिन में लगातार तीन से अधिक बार दस्त लगना प्रमुख लक्षण है। पेट दर्द, मरोड़ होना, उल्टी आना, बुखार होना, कमजोरी महसूस करना, आंखें धंस जाना इसके प्रमुख लक्षण हैं। यह सामान्य तौर पर एक हफ्ते में ठीक हो जाता है। समय पर इलाज न होने पर यह खतरना हो जाता है। ज्यादातर बच्चों में होता है और इसमें मृत्यु का सबसे बड़ा कारण डिहाइड्रेशन होता है।
मलेरिया
कारण : एनाफि लीज मादा मच्छर के काटने से डायरिया होता है।
लक्षण : बुखार, कंपकंपी, पसीना आना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, जी मचलना और उल्टी होना। कभी-कभी इसके लक्षण हर 48 से 72 घंटे में दोबारा दिखाई।