यादगार पदार्पण: आन्या निगम के अरंगेत्रम ने अभिव्यक्ति और लय से जीता दिल

punjabkesari.in Tuesday, May 05, 2026 - 07:27 PM (IST)

गुड़गांव ब्यूरो : कुछ प्रस्तुतियाँ अपने प्रभाव से तुरंत ध्यान आकर्षित करती हैं, जबकि कुछ धीरे-धीरे मन में उतरती हैं और एक गहरी, स्थायी छाप छोड़ जाती हैं। इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के सी. डी. देशमुख ऑडिटोरियम में आयोजित प्रख्यात भरतनाट्यम गुरु श्रीमती प्रिया वेंकटरमन की शिष्या आन्या निगम का भरतनाट्यम अरंगेत्रम निःसंदेह दूसरी श्रेणी में आता है- एक ऐसा संध्या आयोजन, जहाँ अनुशासन ने गरिमा का रूप लिया और तकनीक ने अभिव्यक्ति के माध्यम से अपनी आवाज़ पाई। इस मंत्रमुग्ध कर देने वाले प्रदर्शन में 220 से अधिक कला-प्रेमी, सांस्कृतिक जगत के प्रतिनिधि तथा नृत्य समुदाय के सदस्य उपस्थित थे। विशिष्ट अतिथियों- अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कोरियोग्राफर विदुषी मैत्रेयी पहाड़ी तथा पूर्व आईएएस अधिकारी धीरा खंडेलवाल ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया ।

 

अरंगेत्रम, जो किसी शास्त्रीय नर्तकी का पहला एकल मंचीय प्रदर्शन होता है, एक साथ समापन और प्रारंभ दोनों का प्रतीक है, वह क्षण जब वर्षों के कठोर प्रशिक्षण को मंच पर समर्पित किया जाता है। अपनी गुरु, प्रसिद्ध भरतनाट्यम आचार्या श्रीमती प्रिया वेंकटरमन के मार्गदर्शन में, आन्या की यात्रा शांत दृढ़ता और कला के प्रति गहरे सम्मान से निर्मित हुई है। मंच पर जो सबसे अधिक उभरकर सामने आया, वह केवल तकनीकी सटीकता नहीं, बल्कि उनकी प्रभावशाली उपस्थिति थी। उनकी गतियों में स्पष्टता, लय में आत्मविश्वास और अभिनय में वह संवेदनशीलता थी, जिसने प्रत्येक प्रस्तुति को सहजता और प्रामाणिकता के साथ जीवंत किया। यह सहजता प्रयास की नहीं, बल्कि निरंतर साधना से प्राप्त आत्मविश्वास की प्रतीक थी। इस संतुलन के पीछे एक ऐसी यात्रा है, जिसमें उन्होंने शिक्षा और खेल सहित अनेक जिम्मेदारियों के साथ अनुशासन बनाए रखा- जिसने उनकी शारीरिक क्षमता और मानसिक दृढ़ता को सशक्त किया, बिना नृत्य के प्रति उनकी निष्ठा को कम किए।

 

इस यात्रा पर विचार करते हुए उनके पिता ने कहा:“इस दौरान कई बार शारीरिक थकान और भावनात्मक चुनौतियाँ सामने आईं, लेकिन आन्या की निरंतरता और समर्पण उल्लेखनीय रहा। यह अरंगेत्रम केवल एक प्रस्तुति नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, धैर्य और विश्वास का परिणाम है।” गुरु प्रिया वेंकटरमन ने कहा: आन्या एक विचारशील नृत्यांगना के रूप में विकसित हुई हैं। तकनीक से आगे बढ़कर उन्होंने कला को आत्मसात करना शुरू किया है- उनकी अभिव्यक्ति सच्ची है और लय स्वाभाविक। यहीं से वास्तविक कला की शुरुआत होती है।” इस प्रस्तुति को विशिष्ट अतिथियों से विशेष सराहना प्राप्त हुई। विदुषी मैत्रेयी पहाड़ी ने आन्या की “प्रभावशाली लयबद्धता और अभिनय में सहजता, जिसने प्रस्तुति को संरचना और भावनात्मक गहराई दोनों प्रदान की,” धीरा खंडेलवाल, प्रसिद्ध लेखिका और पूर्व आईएएस अधिकारी, ने कहा कि “उनकी अभिव्यक्ति में स्पष्टता, गरिमा और भावनात्मक जुड़ाव ने कथानक को अत्यंत प्रभावी और सहज बना दिया। लाइव ऑर्केस्ट्रा के साथ प्रस्तुत इस कार्यक्रम ने भरतनाट्यम की पारंपरिक रचनाओं को संतुलन और सौंदर्य के साथ प्रस्तुत किया। किन्तु नृत्य-संरचना से परे, जो सबसे अधिक प्रभाव छोड़ गया, वह एक युवा कलाकार की अपनी पहचान की ओर बढ़ते हुए कदम थे- सच्चाई, आत्मविश्वास और अपनी कला पर शांत नियंत्रण के साथ। इस दृष्टि से, यह अरंगेत्रम केवल एक उपलब्धि नहीं था- बल्कि एक नई यात्रा की शुरुआत था, जो भविष्य में गहराई और उत्कृष्टता का संकेत देता है।


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Content Editor

Gaurav Tiwari

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