मानवता को ही सर्वस्व मानकर शांतिस्थापना के लिए प्रतिबद्ध : डॉ. दिव्यज्योति सैकिया

punjabkesari.in Sunday, Sep 25, 2022 - 08:34 PM (IST)

गुड़गांव ब्यूरो: अक्सर लोग सेवा के लिए कदम बढ़ाते है और कुछ दूर चलकर उनके कदम लड़खड़ाने लगते हैं। ऐसा इसलिए होता है कि वह व्यक्ति समाज मे परिवर्तन के लिए नही बल्कि स्वयं के स्वार्थ सिद्धि के लिए सेवा करता है। सेवा के लिए निश्छलता और कुछ कर गुजरने व मर-मिटने जैसा जुनून चाहिए। भोजन बांटना अलग विषय है और भोजन हमेशा मिले इसकी लड़ाई लड़कर उसका अधिकार दिलाना अलग विषय। ज्यादातर समाजसेवी अधिकारों के लिए नही बल्कि आवश्यकताओं की पूर्ति करके सेवा करते हैं। मगर कुछ शख्सियत ऐसे भी हैं जो आवश्यकता पूर्ति के बाद भी इस बात की लड़ाई में शामिल होते हैं कि घर,भोजन व शिक्षा जब अधिकार हैं तो वो उन्हें क्यों नही? वो हाशिये के समाज मे क्यों? उनको बराबरी क्यों नही? इन्ही बराबरी,भाईचारे व मानवाधिकार की लड़ाई लड़ने वाले 40 वर्षीय एक शख्स हैं असम में जन्मे डॉ दिव्यज्योति सैकिया (Dr. Dibyajyoti  Saikia) । डॉ. सैकिया पिछले दो दशक से अपना जीवन मानवता व शांति स्थापना को समर्पित कर चुके हैं।

 

डॉ. दिव्यज्योति सैकिया ने असम के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी जनजातियों के बीच जाकर उनको अंधविश्वास व कुरीतियों के खिलाफ जागरूक करने के लिए मुहिम  शुरू की। असम और छत्तीसगढ़ में दशकों पुरानी चली आ रही कुप्रथा, जिसमे किसी महिला (या पुरुष) को डायन या राक्षस बताकर समाजिक बहिष्कार कर दिया जाता था या उसे वर्षों वर्षों तक प्रताड़ित किया जाता रहा है। यहां तक कि उनकी हत्या भी की जाती रही हैं। उन्होंने असम के साथ-साथ मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ में लोगों के बीच जाकर इन कुप्रथाओं के खिलाफ जागरूकता लाने के साथ ही जमीनी स्तर पर काम किया। वो हमेशा शांतिदूत बनकर लोगों के लिए खड़े रहते हैं और शान्ति व्यवस्था स्थापित करने की अपील भी करते हैं। उन्होंने मानसिक रूप से विकार गस्त या गरीब बच्चों को सड़कों से उठाकर न केवल उनका इलाज करवाया बल्कि एनजीओ के हवाले करने से पहले उन्हें जरूरत की सामग्री भी मुहैया करवाई। इनमें असम के अलावा आसपास के कई राज्यों के बच्चे भी शामिल है। उन्होंने शिक्षा से वंचित गरीब किसान के बच्चों को अपनी जेब से पैसा खर्च कर किताब व कॉपी मुहैया करवाई है।

 

2009 से डायन अंधविश्वास कुप्रथा के विरुद्ध काम कर रहे डॉ. सैकिया के प्रयासों से 2015 में असम विधानसभा में इसके खिलाफ एक विधेयक पारित हुआ। जिसे वर्ष 2018 में राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिलने के बाद यह कानून बन गया। उसके बाद भी डॉ. सैकिया इसे जमीनी स्तर पर क्रियान्वयित (इम्पलीमेंट) करने में लगे रहे। यह कानून है 'द आसाम व्हिच हंटिंग PPP एक्ट 2015' आज इस कानून के चलते हज़ारों लोगों को प्रताड़ना व समाज निकाला जैसी कुरीतियों से मुक्ति मिल गयी। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी ने डॉ. दिव्यज्योति सैकिया को उनके मानवाधिकार सम्बन्धी आंदोलनों व कार्यों हेतु डॉक्टरेट की उपाधि से भी सम्मानित किया।

 

जीवन को मानवता के लिए समर्पित कर चुके दिव्यज्योति सैकिया ने जनजागरूकता को ही सबसे बड़ा हथियार बनाया है, जिसकी मदद से पुलिस व सरकार पर दबाब बनाकर पीड़ित लोगों को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ते हैं। उनका जोर ज्ञानआधारित शिक्षा को लेकर है। उनका मानना है कि डिग्री के लिए की गई पढ़ाई समाज मे कूड़े के समान है। वह एक अच्छे व सभ्य शिक्षित समाज की स्थापना करने में बाधक है।  डॉ. सैकिया इतना ही नही, बल्कि फेक एनकाउंटर के खिलाफ भी लड़ाई लड़ रहे हैं। इसके खिलाफ उनके द्वारा राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को पत्र लिखने और मीडिया में लगातार आवाज उठाने की वजह से फिलहाल असम में फेक एनकाउंटर के मामले कम होने लगे हैं। उनके इस कार्य को राष्ट्रीय  मीडिया में सराहा भी चुका है। नक्सल व आतंक प्रभावित क्षेत्रों में जाकर वो युवाओं को सही मार्ग पर मोड़ने व उन्हें शिक्षा व रोजगार से जोड़ने का भी काम कर रहे हैं।

 

सैकिया को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए देश व विदेश में पहचान जा चुका है। उसके लिए उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर के सौ से भी ज्यादा सम्मान भी दिए जा चुके हैं। जिनमे भारत सरकार द्वारा  बाबू जगजीवन राम स्मृति सम्मान,  मौलाना आजाद राष्ट्रीय सम्मान, नेल्सन मंडेला राष्ट्रीय सम्मान, भारतीय सूर्य सम्मान, तिलका मांझी राष्ट्रीय सम्मान, राष्ट्रीय गौरव आइकन अवार्ड, वीर अब्दुल हमीद करुणा योद्धा अवार्ड मुख्य रूप में शामिल हैं।  अपने सामाजिक कार्यों व न्यायिक व्यवस्था और मानवता के साथ साथ शांति स्थापना की इस लड़ाई को जारी रखते हुए डॉ. दिव्यज्योति सैकिया को असम के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों में एक मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में बुलाये जाते हैं। वो विश्व मानवाधिकार संरक्षण आयोग जैसे वैश्विक संगठन (World Organisations)  में सदस्य के रूप में भी आमंत्रित किये जाते हैं।

 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Gaurav Tiwari

Related News

static