दिल्ली क्लाइमेट इनोवेशन वीक 2026 में ‘पीपुल-फर्स्ट क्लाइमेट एक्शन वॉक’ और एआई राउंडटेबल का आयोजन, पैदल यात्रा कर लोगों को किया जागरूक

punjabkesari.in Saturday, Feb 21, 2026 - 07:11 PM (IST)

गुड़गांव ब्यूरो : दिल्ली क्लाइमेट इनोवेशन वीक 2026 के तहत राहगीरी फाउंडेशन और नगारो ने मिलकर 'पीपल-फर्स्ट क्लाइमेट एक्शन: वॉकिंग द फ्यूचर' कार्यक्रम का आयोजन किया। इस आयोजन ने सरहौल गांव के पड़ोस में एक पैदल यात्रा की और एआई राउंडटेबल के माध्यम से यह प्रदर्शित किया कि कैसे जन-केंद्रित शहरी नियोजन और उभरती तकनीकें मिलकर जलवायु के प्रति अनुकूल शहरों का निर्माण कर सकती हैं। कार्यक्रम की शुरुआत सरहौल गांव और सनथ रोड पर एक पैदल यात्रा से हुई, जहाँ प्रतिभागियों ने जलवायु-उत्तरदायी सड़क परिवर्तनों का प्रत्यक्ष अनुभव किया। इस पैदल यात्रा के दौरान छायादार पैदल पथ, साइकिलिंग के बुनियादी ढांचे, जलभराव प्रबंधन के लिए बायोस्वैल्स और शहरी हरियाली जैसे हस्तक्षेपों को दिखाया गया, जो न केवल सुरक्षा बढ़ाते हैं बल्कि भीषण गर्मी के प्रभाव को कम कर पड़ोस की प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करते हैं।

 

मौके पर 'एआई और नागरिक डिजाइन' पर एक गोलमेज चर्चा आयोजित की गई। चर्चा में गुरुग्राम नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त यश झालुका ने स्पष्ट किया कि शहर केवल तकनीक से स्मार्ट नहीं बनते, बल्कि वे तब लचीले बनते हैं जब सरकार, नागरिक समाज और डेटा मिलकर काम करते हैं। वहीं, राहगीरी फाउंडेशन की सह-संस्थापक और नगारो की निदेशक सारिका पांडा ने कहा कि “जलवायु कार्रवाई तब वास्तविक बनती है जब लोग अपने रोजमर्रा के जीवन में अधिक सुरक्षित, ठंडी और समावेशी सड़कों का अनुभव करते हैं। शहरों की योजना वाहनों के बजाय लोगों को केंद्र में रखकर बननी चाहिए। चर्चा में वक्ताओं ने बताया कि पैदल चलने योग्य सड़कें और गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक स्थल शिक्षा, रोजगार और सामुदायिक कल्याण से जुड़े हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित वीडियो निगरानी, नवीकरणीय ऊर्जा ग्रिड का अनुकूलन और डिजिटल ट्विन तकनीक से जल रिसाव की पूर्वानुमानित पहचान जैसे उपाय शहरों को प्रतिक्रियात्मक व्यवस्था से सक्रिय योजना की ओर ले जा सकते हैं। गुरुग्राम नगर निगम के आयुक्त प्रदीप दाहिया ने कहा कि “सुरक्षित शहर समावेशी डिजाइन से बनते हैं जहां दृश्यता, पहुंच और गरिमा सभी के लिए सुनिश्चित हो।”

 

कार्यक्रम के दौरान गुरुग्राम नगर निगम सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने सरकार, नागरिक समाज और निजी क्षेत्र के बीच मजबूत सहयोग पर जोर देते हुए कहा कि बढ़ते जलवायु दबाव के बीच चुनौतियों को नवाचार और व्यापक प्रभाव के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। इस सत्र में शहरी नेताओं, नीति निर्माताओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने इस बात पर मंथन किया कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सड़कों पर सूक्ष्म जलवायु परिस्थितियों को मापने, पैदल यात्रियों की सुरक्षा में सुधार करने और डेटा-संचालित योजना बनाने में सहायक हो सकती है।  इस आयोजन में जाना अर्बन स्पेस, आईसीसीटी इंडिया, पर्पस, ज़ीका कैपिटल और हनू एआई के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार साझा किए। ज़ीका कैपिटल के प्रतिनिधि पवन राज कुमार ने सुझाव दिया कि एआई को एक अदृश्य परत के रूप में काम करना चाहिए जो मानवीय स्पर्श को खोए बिना शहरों को सुरक्षित और अधिक समावेशी बनाए। सरहौल को एक 'लिविंग लैब' के रूप में पेश करते हुए इस पहल ने भविष्य के लिए एक ऐसा मार्ग प्रशस्त किया है जहां गतिशीलता, आजीविका और सामुदायिक जीवन के चौराहे पर जलवायु समाधानों को लागू किया जा सके। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ऐसी साझेदारियां बनाना है जिससे पूरे भारत के शहरों में जलवायु-अनुकूल सड़कों के मॉडल को बड़े पैमाने पर अपनाया जा सके।


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Content Editor

Gaurav Tiwari

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