घूसखोर पंडत व गोदान फिल्म का जमकर किया विरोध, कहा इसके निर्माता भाजपा के एजेंट : श्रीकान्त
punjabkesari.in Wednesday, Feb 11, 2026 - 07:42 PM (IST)
गुड़गांव ब्यूरो : राष्ट्रवादी नवनिर्माण दल के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीकान्त त्यागी का उत्तर प्रदेश के हाथरस, आगरा तथा राजस्थान के धौलपुर का राजनीतिक व सामाजिक दौरा प्रदेश की बदलती राजनीतिक हवा का स्पष्ट संकेत बन गया। जिस तरह हर जिले में हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर उनका स्वागत किया, फूल-मालाओं और नारों के बीच उनका अभिनंदन किया, उसने यह साबित कर दिया कि राष्ट्रवादी नवनिर्माण दल को मिल रहा जनसमर्थन अब केवल समर्थन नहीं, बल्कि सत्ता परिवर्तन की स्पष्ट प्रबल संभावना है।
इस पूरे दौरे के दौरान आयोजित जनसभाओं और संवाद कार्यक्रमों में सबसे प्रमुख मुद्दा हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म “घूसखोर पंडत” के ट्रेलर और फिल्म “गोदान” को लेकर ब्राह्मण समाज में फैला आक्रोश रहा। श्रीकान्त त्यागी ने इन फिल्मों को ब्राह्मण समाज के खिलाफ चलाए जा रहे एक सुनियोजित वैचारिक और सांस्कृतिक हमले का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि “घूसखोर पंडत” में पूरे ब्राह्मण समाज को भ्रष्ट और अपराधी के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की गई है, जो न केवल सामाजिक सौहार्द को चोट पहुंचाता है बल्कि समाज को अपमानित व कलंकित करने का खुला प्रयास भी है। रानद सुप्रीमो श्रीकान्त त्यागी ने भाजपा सरकार की भूमिका पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म सीधे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन आते हैं, ऐसे में बिना सरकारी मौन-सहमति के इस तरह का कंटेंट रिलीज़ होना संभव नहीं है। इसके बावजूद भाजपा सरकार बाद में एफआईआर दर्ज कराकर यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि वह ब्राह्मण समाज के साथ खड़ी है। उन्होंने इसे राजनीतिक पाखंड करार देते हुए कहा कि यदि सरकार सच में गंभीर होती तो इस ट्रेलर को रिलीज़ से पहले ही रोका जाता।
भाजपा एक ओर यूजीसी जैसे मुद्दों के जरिए समाज को बाटने व भटकाने का कार्य कर रही है और दूसरी ओर इस तरह की फिल्मों को आगे बढ़ाकर ब्राह्मण समाज के खिलाफ वातावरण बनाती है। फिर बाद में प्रतीकात्मक कार्रवाई कर समाज को भ्रमित किया जाता है। उनके अनुसार, यदि भाजपा वास्तव में ब्राह्मण समाज की चिंता करती है तो उसे ओटीटी प्लेटफॉर्म और फिल्म से जुड़े लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। श्रीकान्त त्यागी ने राजनीतिक भागीदारी का सवाल भी उतनी ही मुखरता से उठाया। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल सांस्कृतिक सम्मान की बात नहीं कर सकती, उसे राजनीतिक अधिकार भी देने होंगे। उन्होंने मांग रखी कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मुख्यमंत्री बनाया जाए और भाजपा शासित राज्यों में समाज के प्रतिनिधियों को नेतृत्व दिया जाए। इसके साथ ही उन्होंने कैबिनेट में ब्राह्मण समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कम से कम 10 त्यागी ब्राह्मण नेताओं को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देने की बात कही। उनका कहना था कि यदि ऐसा नहीं होता तो यह स्पष्ट होगा कि भाजपा केवल वोटों के लिए समाज का इस्तेमाल कर रही है। फिल्म “गोदान” को लेकर भी उन्होंने गंभीर आपत्ति जताई।
इस फिल्म में ब्राह्मणों को सामंतवादी और शोषक के रूप में चित्रित करना ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना है। ब्राह्मण समाज परंपरागत रूप से दान में मिली गाय का पालन-पोषण करता है। ब्राह्मण समाज ने गाय पालन करने पर ग़रीब, कमजोर, आसहाय, मज़दूर, दलित, कमजोर, कामगार, अनुसूचित, आदिवासी समाज का कभी शोषण नहीं किया। ऐसे में इस तरह की फिल्मों के जरिए कमजोर एवं शोषित वंचित वर्गों को भ्रमित कर ब्राह्मण समाज की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। भाजपा ये स्पष्ट करे कि उक्त गोदान में होरी नामक व्यक्ति की क्या जाति है और चौथी शताब्दी की उपज और 16वीं शताब्दी में लगभग समाप्त हुए सामंती किस जाति के थे। हाथरस, आगरा और धौलपुर में उमड़ा जनसैलाब यह दर्शाता है कि ब्राह्मण समाज अब केवल नाराज़ नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से संगठित भी हो रहा है। लोगों का उत्साह और समर्थन यह संकेत दे रहा है कि राष्ट्रवादी नवनिर्माण दल एक वैकल्पिक शक्ति के रूप में तेजी से उभर रहा है। इस पूरे दौरे ने यह साफ कर दिया कि श्रीकान्त त्यागी आज सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि सम्मान, प्रतिनिधित्व और सत्ता परिवर्तन की आकांक्षा की आवाज बनते जा रहे हैं।