हाईकोर्ट ने सेबी के डिस्क्लोजर नियमों में मौजूद संभावित ब्लाइंड स्पॉट पर चिंता जताई

punjabkesari.in Sunday, Feb 15, 2026 - 06:14 PM (IST)

गुड़गांव ब्यूरो :वरिष्ठ कॉरपोरेट अधिकारियों की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने सेबी के डिस्क्लोजर नियमों में मौजूद संभावित ब्लाइंड स्पॉट पर गंभीर चिंता जताई है। यह टिप्पणी सीएफओ नीतिका सूर्यवंशी से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान आई, जहां उनके कथित लंबित आपराधिक मामलों के गैर-प्रकटीकरण और कंपनी के शेयरों में असामान्य उतार-चढ़ाव को लेकर याचिका दायर की गई थी। फ़िलहाल नीतिका सूर्यवंशी को आपराधिक मामलों में अभी बेल पर मंजूरी मिल गई।

 


अदालत ने सेबी को ट्रेडिंग पैटर्न, सीएफओ की भूमिका और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए कड़े डिस्क्लोजर मानकों पर विचार करने का निर्देश दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला सिर्फ नियमों की समीक्षा नहीं, बल्कि सीएफओ नीतिका सूर्यवंशी की व्यक्तिगत साख और भारत में कॉरपोरेट गवर्नेंस मानकों की भी बड़ी परीक्षा बन सकता है। 2 जनवरी 2026 के आदेश में अदालत ने सेबी से पूछा कि क्या मौजूदा नियम वरिष्ठ अधिकारियों को उनके पूर्व कानूनी या पेशेवर इतिहास को निवेशकों से छुपाने की छूट देते हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसा होना निवेशक संरक्षण की मूल भावना के खिलाफ है।

 


याचिका के अनुसार, 2019 से 2025 के बीच सीएफओ नीतिका सूर्यवंशी के कार्यकाल के दौरान कंपनी के शेयरों में 20 रुपए से 375 रुपए तक का तेज़ और असामान्य उतार-चढ़ाव देखा गया और पुनर्नियुक्ति के बाद 80-88 रुपए तक गिरावट। हालांकि कोर्ट ने बाज़ार हेरफेर का सीधा आरोप नहीं लगाया, लेकिन इस पैटर्न को चिंताजनक बताया। अदालत को बताया गया कि सीएफओ नीतिका सूर्यवंशी के खिलाफ आईपीसी के तहत आपराधिक मामले और आईसीएआई में पेशेवर शिकायतें लंबित हैं, जिनका कथित रूप से न तो नियुक्ति के समय और न ही बाद में निवेशकों को खुलासा किया गया। हाईकोर्ट ने संकेत दिया कि सेबी (एलओडीआर) नियमों में केवल वर्तमान कार्यकाल के मामलों के प्रकटीकरण की बाध्यता एक गंभीर नियामकीय कमी हो सकती है। कोर्ट ने कहा कि  निवेशक संरक्षण को तकनीकी खामियों की भेंट नहीं चढ़ाया जा सकता।


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Content Editor

Gaurav Tiwari

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