एक ऐसी परंपरा जो 300 साल बाद टूटी, नहीं हुआ कोई विरोध, गांव में पूरी तरह शांति

2021-06-22T10:09:19.287

भिवानी: हरियाणा के भिवानी जिले में तकरीबन 300 साल पहले दादरी रोड पर बसा गांव गोविंदपुरा शुरुआत से ही दो जातियों में विभाजित है। एक ओर जहां गांव राजपूत बाहुल्य है तो वहीं अनुसूचित समाज के लोग भी गांव में निवास करते हैं। लेकिन यह सबसे बड़ी समस्या यह रही कि जब से गांव बसा तभी से यह परंपरा चली आ रही थी कि अनुसूचित समाज के लोग गांव में घुड़चढ़ी नहीं निकालेंगे। लेकिन रविवार को इस परंपरा को तोड़ते हुए गांव के युवक विजय कुमार की घुड़चढ़ी धूमधाम से निकाली गई। गांव में पूरी तरह शांति है और किसी ने इसका विरोध नहीं किया।

सरपंच बीरसिंह राजपूत ने बताया कि उन्होंने तीन साल पहले गांव में पंचायत की थी। पंचायत में फैसला किया था कि अब गांव में अनुसूचित समाज को घुड़चढ़ी निकालने से कोई नहीं रोकेगा, लेकिन इसके बावजूद लोग आगे नहीं आ रहे थे। पंचायत के फैसले के बावजूद लोग इन बेडिय़ों में बंधे हुए थे। अब विजय ने हिम्मत दिखाई और घुड़चढ़ी निकालने के लिए मुझसे संपर्क किया। मैं तुरंत तैयार हो गया और इस काम को सिरे चढ़ाया।

विजय की घुड़चढ़ी के बाद गांव के अनुसूचित समाज के परिवारों में खुशी का माहौल है। विजय के बड़े भाई दयाचंद ने कहा कि अनुसूचित समाज में खुशी का माहौल है। चाचा नरसिंह फोरमैन ने कहा कि आज लग रहा है कि हमारी भी गांव में इज्जत है। गांव से स्नेह मिला है, उसके लिए आभारी हैं। पूर्व पंचायत सदस्य जयप्रकाश और जयभगवान का कहना है कि सरपंच बीरसिंह के प्रयासों से ये ऐतिहासिक बदलाव हो सका है।
 

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Content Writer

Shivam

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