यमुना की धारा को फिर से बदलने की कोशिश, सिंचाई विभाग ने दर्ज कराया मुकदमा

punjabkesari.in Friday, Oct 09, 2020 - 04:00 PM (IST)

यमुनानगर (सुरेंद्र मेहता): एनजीटी और प्रदूषण विभाग के नियमों को दरकिनार करते हुए एक बार फिर से माइनिंग माफिया ने यमुना की प्राकृतिक जलधारा को बदलने की कोशिश की है। यमुना के बीचो-बीच अस्थाई बांध बनाया गया है। विभाग ने इस संबंध में माइनिंग कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। पिछले साल इस तरह के 12 मुकदमे दर्ज करवाए गए थे।

यमुनानगर में एक बार फिर यमुना की प्राकृतिक जलधारा को प्रभावित किया जा रहा है। माइनिंग का ठेका लेने वाली कंपनियों के कर्मचारियों द्वारा यमुना के बीचो-बीच अपनी सहूलियत के लिए अवैध बांध बनाए जाते हैं। इससे यमुना की जलधारा प्रभावित होती है और उसका खामियाजा आसपास के इलाकों के किसानों को भुगतना पड़ता है। यमुना की जलधारा प्रभावित होने से जहां भूमि कटाव बढ़ता है, वहीं किसानों की करोड़ों की फसलें भी यमुना में समा जाती हैं।

पिछले साल यमुनानगर जिला के अलग-अलग इलाकों में माइनिंग कंपनियों के कर्मचारियों ने ऐसे 12 अवैध बांध बनाए थे। जिस पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज करवाए थे। विभाग ने जहां इस संबंध में मुकदमे दर्ज कराए, वहीं पुलिस की जांच बहुत ज्यादा आगे नहीं बढ़ी और इनमें से कुछ मामले बंद कर दिए गए। अब यमुना की जलधारा को फिर से प्रभावित किए जाने की सूचनाओं के बाद सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने यमुना के इलाकों का दौरा किया। उन्होंने पाया कि माइनिंग कंपनियों के कर्मचारियों ने फिर से यह प्रयास किया है। इस संबंध में सिंचाई विभाग ने एक मुकदमा दर्ज करवाया है।

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आरटीआई कार्यकर्ता वरयाम सिंह एडवोकेट का कहना है कि यमुना से अवैध माइनिंग और प्राकृतिक धारा को बार-बार मोड़ा जा रहा है। अधिकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को गुमराह कर रहे हैं जबकि हकीकत में अवैध बांध अभी भी कायम हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना चाहिए और जितना नुकसान यमुना व सड़कों को पहुंचाया गया है उनकी भरपाई करवाई जानी चाहिए।

सिंचाई विभाग के सुपरिटडेंट इंजीनियर आरएस मित्तल का कहना है कि इस सीजन में अभी तक एक मुकदमा दर्ज करवाया गया है। जबकि पिछले वर्ष पूरे सीजन में 12 एफआईआर दर्ज करवाई गई थी। उनका कहना है कि विभाग के अलग-अलग अधिकारियों को इलाके अलाट किए हुए हैं जो बार-बार यमुना के इलाकों का दौरा करके अपनी रिपोर्ट देते रहते हैं।

बता दें कि यमुना की जलधारा को प्रभावित करने का यह पहला प्रयास नहीं है। इस तरह के प्रयास माइनिंग माफिया और माइनिंग में लगी एजेंसियां लगातार करती रही हैं। सिंचाई विभाग द्वारा भी इनके खिलाफ मुकदमे दर्ज करवा कर अपनी जिम्मेवारी पूरी कर ली जाती है। लेकिन उसके बाद पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी इसकी गंभीरता को नहीं समझते। जिसके चलते माइनिंग माफिया लगातार हावी होता रहा है और लोगों की करोड़ों की जमीन इसके चलते यमुना में समाती रही है।


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Shivam

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