1857 के क्रांतिवीरों को सम्मान: 5 नवंबर को अमित शाह करेंगे भव्य शहीद स्मारक का उद्घाटन, विज का 30 साल पुराना सपना होगा साकार
punjabkesari.in Wednesday, Oct 28, 2026 - 09:49 AM (IST)
चंडीगढ़( चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज की करीब 30 वर्षों की कड़ी मेहनत, निरंतर प्रयासों और ऐतिहासिक परिकल्पना को 5 नवंबर को साकार रूप मिलने जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अंबाला छावनी पहुंचकर वर्ष 1857 की क्रांति के शहीदों को समर्पित भव्य शहीद स्मारक का उद्घाटन कर इसे जनता को समर्पित करेंगे। इस अवसर पर अमित शाह विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे। लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह स्मारक देश की आजादी की पहली लड़ाई में अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीरों की स्मृति को समर्पित है।
हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने यह जानकारी देते हुए कहा कि अंबाला छावनी में शहीद स्मारक बनाने का उनका सपना लंबे समय से रहा है। करीब तीन दशक तक इस परिकल्पना को साकार करने के लिए उन्होंने लगातार प्रयास किए। उनका उद्देश्य उन क्रांतिकारियों को राष्ट्रीय स्तर पर उचित सम्मान दिलाना है, जिनके बलिदान और योगदान को इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया। अब 5 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हाथों स्मारक जनता को समर्पित होने के साथ यह सपना धरातल पर उतरने जा रहा है।
अमित शाह करेंगे उद्घाटन, विशाल जनसभा को भी करेंगे संबोधित
अनिल विज ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 5 नवंबर को अंबाला छावनी में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। इस दौरान वे शहीद स्मारक का उद्घाटन कर इसे आम जनता को समर्पित करेंगे। उनके आगमन पर विशाल जनसभा का आयोजन भी किया जाएगा।
विज ने कहा कि यह स्मारक केवल अंबाला या हरियाणा की धरोहर नहीं, बल्कि पूरे देश की ऐतिहासिक विरासत है। इसका उद्देश्य 1857 की क्रांति के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में हुए संघर्षों, वीरों के बलिदान और स्वतंत्रता की चेतना को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। स्मारक खुलने के बाद देश-प्रदेश के नागरिक यहां आकर स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास को विस्तार से जान सकेंगे।उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता की पहली लड़ाई में सैनिकों के साथ किसानों, महिलाओं और आम नागरिकों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इन सभी के योगदान को सम्मान देना राष्ट्रीय दायित्व है।
तीन दशक के प्रयासों के बाद पूरी हुई ऐतिहासिक परिकल्पना
अनिल विज ने बताया कि अंबाला छावनी में शहीद स्मारक स्थापित करने का विचार उनके मन में वर्षों से था। उन्होंने पिछली सरकारों के कार्यकाल में भी विधानसभा के विभिन्न सत्रों में इस मांग को उठाया था, लेकिन उस समय परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।
वर्ष 2014 में हरियाणा में भाजपा सरकार बनने के बाद उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समक्ष ऐतिहासिक दस्तावेज प्रस्तुत कर अंबाला छावनी में स्मारक निर्माण की आवश्यकता रखी। इसके बाद इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में काम शुरू हुआ।
विज के अनुसार, अंबाला छावनी का 1857 की क्रांति के शुरुआती घटनाक्रमों से महत्वपूर्ण संबंध रहा है। ऐसे में यहां शहीद स्मारक का निर्माण इस ऐतिहासिक भूमिका को राष्ट्रीय पटल पर सामने लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परिसर में इतिहास, शोध, आधुनिक तकनीक और पर्यटन को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है।
23 गैलरियों में दिखेगा 1857 की क्रांति का इतिहास
शहीद स्मारक में कुल 23 गैलरियां बनाई गई हैं। इनमें अंबाला, हरियाणा, मेरठ, दिल्ली, पंजाब, गुजरात, झांसी और देश के अन्य क्षेत्रों में वर्ष 1857 के दौरान हुए संघर्षों और घटनाओं को प्रदर्शित किया गया है।स्मारक की ऐतिहासिक सामग्री तैयार करने के लिए व्यापक शोध किया गया। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. केसी यादव के शोध सहित विभिन्न ऐतिहासिक दस्तावेजों का अध्ययन किया गया। ऐतिहासिक तथ्यों की प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के लिए पांच प्रतिष्ठित इतिहासकारों की समिति गठित की गई। इसके अलावा देश-विदेश के अभिलेखागारों से भी दस्तावेज जुटाए गए।
अनिल विज ने बताया कि अब तक 700 से अधिक वीरों की पहचान कर उनके नाम, पिता के नाम और गांवों से संबंधित जानकारी जुटाई गई है। इन वीरों के नाम स्मारक में स्वर्ण अक्षरों में अंकित किए गए हैं। भविष्य में अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के संबंध में प्रमाणिक जानकारी मिलने पर उनके नाम भी शामिल किए जा सकेंगे।
आधुनिक तकनीक से जीवंत होंगे क्रांति के घटनाक्रम
स्मारक में 360 डिग्री प्रोजेक्शन, साउंड और लेजर शो जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। इनके माध्यम से आगंतुकों को 1857 की क्रांति के प्रमुख घटनाक्रमों से परिचित कराने का प्रयास किया गया है। परिसर में एक विशेष गैलरी भी बनाई गई है, जहां डिजिटल माध्यम से शहीदों को श्रद्धांजलि दी जा सकेगी।
यहां 2,500 दर्शकों की क्षमता वाला ओपन एयर थिएटर और 300 लोगों की क्षमता वाला ऑडिटोरियम बनाया गया है। परिसर में 63 मीटर ऊंची कमल के फूल के आकार की संरचना भी आकर्षण का केंद्र होगी। इसमें दो हाई-स्पीड लिफ्ट लगाई गई हैं और शीर्ष पर स्काई कैफे विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा परिसर में हेलीपैड और आगंतुकों के लिए आधुनिक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
ऑनलाइन टिकट बुकिंग और स्मृति-चिह्नों की भी सुविधा
अनिल विज ने बताया कि स्मारक में प्रवेश के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मोबाइल ऐप और वेबसाइट विकसित की गई है। परिसर में स्मारक से जुड़े स्मृति-चिह्नों की बिक्री के लिए आठ दुकानें भी बनाई गई हैं। पूरे स्मारक का विस्तार से भ्रमण करने में लगभग छह घंटे लग सकते हैं।
उन्होंने सभी राज्यों से आग्रह किया है कि वे अपने राज्य दिवस से जुड़े कार्यक्रम इस राष्ट्रीय स्मारक में आयोजित करें, ताकि देश के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और शहीदों के बलिदान से जुड़ने का अवसर मिले।
राष्ट्रीय स्मृति, इतिहास और पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनेगा
अनिल विज ने कहा कि अंबाला छावनी में निर्मित यह स्मारक शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ इतिहास, पर्यटन और राष्ट्रीय चेतना का प्रमुख केंद्र बनेगा। 5 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा इसे जनता को समर्पित किए जाने से आम लोगों को 1857 की क्रांति के वीरों के संघर्ष और योगदान को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।
करीब 30 वर्षों से इस ऐतिहासिक परिकल्पना को साकार करने में जुटे अनिल विज के लिए यह अवसर उनके लंबे प्रयासों की परिणति के रूप में देखा जा रहा है। स्मारक की 23 गैलरियां, वीरों के नामों का अभिलेखन और आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत इतिहास आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता संग्राम की विरासत से जोड़ने का माध्यम बनेंगे।