परिवार हो, मित्रता हो या राजनीति, हर रिश्ते को पूरी निष्ठा और संवेदनशीलता से निभाते हैं अनिल विज

punjabkesari.in Friday, Jul 10, 2026 - 10:12 AM (IST)

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : राजनीति में अक्सर नेताओं की पहचान उनके भाषणों, फैसलों और चुनावी जीत-हार से होती है, लेकिन कुछ व्यक्तित्व ऐसे भी होते हैं जिनकी पहचान उनके मानवीय व्यवहार, रिश्तों को निभाने की क्षमता और कठिन परिस्थितियों में लिए गए निर्णयों से बनती है। हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ऐसे ही नेताओं में शामिल हैं। करीब पांच दशक के सार्वजनिक जीवन में उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे, सत्ता और विपक्ष दोनों की राजनीति की, लेकिन एक बात कभी नहीं बदली—रिश्तों और दायित्वों को निभाने का उनका अंदाज।

अनिल विज का व्यक्तित्व जितना बेबाक और स्पष्टवादी है, उतना ही संवेदनशील भी है। वे केवल राजनीतिक मंचों पर ही नहीं, बल्कि निजी जीवन और सामाजिक व्यवहार में भी अपने कर्तव्यों को सर्वोपरि रखते हैं। परिवार, मित्र, कार्यकर्ता, कर्मचारी और जनता—हर रिश्ते को उन्होंने हमेशा समान महत्व दिया है। यही कारण है कि उनके राजनीतिक जीवन में ऐसे अनेक उदाहरण मिलते हैं, जो उन्हें केवल एक राजनेता नहीं बल्कि एक संवेदनशील इंसान के रूप में भी स्थापित करते हैं।

भाई के प्रति निभाया पारिवारिक धर्म

हाल ही में अनिल विज के बड़े भाई राजेंद्र विज की फोर्टिस अस्पताल में बाईपास सर्जरी हुई। परिवार के लिए यह चिंता और परीक्षा का समय था। ऐसे समय में अनिल विज मंत्री होने की जिम्मेदारियों से पहले एक छोटे भाई की भूमिका में नजर आए। वे अस्पताल में लगातार मौजूद रहे और तब तक कहीं नहीं गए, जब तक डॉक्टरों ने सफल ऑपरेशन की सूचना नहीं दे दी। उनकी यह उपस्थिति केवल औपचारिक नहीं थी। वह उस भावनात्मक जुड़ाव का प्रमाण थी, जिसमें परिवार हर पद और प्रोटोकॉल से ऊपर होता है। एक मंत्री के रूप में उनके पास अनेक सरकारी कार्य थे, लेकिन उस समय उनकी पहली प्राथमिकता अपने भाई का स्वास्थ्य था।

मित्र धर्म भी पूरी आत्मीयता से निभाया

उसी दिन उनके सामने एक और महत्वपूर्ण दायित्व था। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तथा भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके जे.पी. नड्डा अंबाला दौरे पर थे। नड्डा और अनिल विज के बीच वर्षों पुराने आत्मीय संबंध हैं।
भाई की सफल सर्जरी की पुष्टि होते ही अनिल विज बिना समय गंवाए अंबाला के लिए रवाना हुए। वहां उन्होंने नड्डा से मुलाकात की, उनका स्वागत किया और उनके कार्यक्रमों में भी शामिल हुए। इतना ही नहीं, वापसी के समय वे स्वयं उन्हें रेलवे स्टेशन तक छोड़ने पहुंचे। यह घटना बताती है कि अनिल विज केवल राजनीतिक संबंध नहीं निभाते, बल्कि मित्रता को भी जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। उनके लिए रिश्ते केवल अवसरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें निभाना भी उतना ही आवश्यक है।

राजनीतिक धर्म निभाने में भी नहीं करते समझौता

कुछ दिन पहले भी अनिल विज का ऐसा ही एक रूप देखने को मिला। उस समय उनके भाई पीजीआई में उपचाराधीन थे और परिवार अस्पताल में मौजूद था। इसी दौरान सूचना मिली कि प्रदेशभर से हजारों बिजली कर्मचारी अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर अंबाला स्थित उनके आवास पहुंच रहे हैं।स्थिति आसान नहीं थी। एक ओर अस्पताल में भर्ती भाई थे और दूसरी ओर हजारों कर्मचारी उनसे मिलने की प्रतीक्षा कर रहे थे। ऐसे समय में उन्होंने राजनीतिक दायित्व को भी उतनी ही गंभीरता से लिया। अस्पताल से निकलकर वे सीधे अंबाला पहुंचे और कर्मचारियों के बीच जाकर उनकी बात सुनी।

सुरक्षा सलाह के बावजूद पहुंचे कर्मचारियों के बीच

बताया जाता है कि सुरक्षा एजेंसियों ने भीड़ और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें वहां जाने से मना किया था। अधिकारियों की सलाह थी कि इतनी बड़ी भीड़ के बीच जाना उचित नहीं होगा, लेकिन अनिल विज ने सुरक्षा से अधिक महत्व उन कर्मचारियों को दिया जो उनसे मिलने और अपनी बात रखने आए थे। वे सीधे कर्मचारियों के बीच पहुंचे, उनसे संवाद किया और उनकी समस्याओं को सुना। यही कारण है कि कर्मचारी संगठनों के बीच भी उनकी एक अलग पहचान है। वे अक्सर कहते हैं कि जनता और कर्मचारियों के बीच जाकर उनकी बात सुनना ही जनप्रतिनिधि का सबसे बड़ा दायित्व है।

रिश्तों को निभाने की लंबी परंपरा

यह कोई पहला अवसर नहीं है जब अनिल विज ने अपने व्यवहार से लोगों का दिल जीता हो। लगभग पचास वर्षों के सार्वजनिक जीवन में ऐसे सैकड़ों उदाहरण मिलते हैं, जब उन्होंने अपने सहयोगियों, कार्यकर्ताओं, मित्रों और कर्मचारियों के सुख-दुख में व्यक्तिगत रूप से शामिल होकर रिश्तों को मजबूत किया।यदि किसी सहयोगी के परिवार में शोक हो, किसी कर्मचारी के घर खुशी का अवसर हो या किसी पुराने साथी को उनकी जरूरत हो, अनिल विज यथासंभव स्वयं वहां पहुंचने का प्रयास करते हैं। यही कारण है कि उनके साथ वर्षों से जुड़े लोग उन्हें केवल मंत्री नहीं, बल्कि परिवार का सदस्य मानते हैं।

सादगी और सहजता उनकी सबसे बड़ी ताकत

अनिल विज का सार्वजनिक जीवन हमेशा सादगी और सहजता से जुड़ा रहा है। वे बिना किसी औपचारिकता के आम लोगों से मिलते हैं, उनकी बातें सुनते हैं और समस्याओं के समाधान का प्रयास करते हैं। उनका स्पष्टवादी स्वभाव कई बार राजनीतिक बहस का विषय भी बनता है, लेकिन उनकी कार्यशैली में दिखने वाली ईमानदारी और मानवीय संवेदनाएं उन्हें अलग पहचान दिलाती हैं।

यही है अनिल विज की सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी

राजनीति में पद, शक्ति और लोकप्रियता समय के साथ बदलती रहती है, लेकिन रिश्तों को निभाने वाले व्यक्तित्व लंबे समय तक लोगों के दिलों में जगह बनाए रखते हैं। अनिल विज का राजनीतिक जीवन इसी सत्य का उदाहरण है। उन्होंने हमेशा यह साबित किया है कि एक जनप्रतिनिधि की असली पहचान केवल उसके भाषणों या फैसलों से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार, संवेदनशीलता और अपने लोगों के साथ खड़े रहने की क्षमता से होती है। आज जब राजनीति में मानवीय रिश्तों की चर्चा कम होती दिखाई देती है, तब अनिल विज का जीवन यह संदेश देता है कि परिवार का धर्म, मित्रता का धर्म और राजनीति का धर्म—यदि पूरी ईमानदारी से निभाया जाए, तो वही किसी जननेता की सबसे बड़ी पहचान बन जाता है।


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Content Editor

Harman

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