ताने सुनने से 'ArjunaAward' तक: 16 साल की कड़ी मेहनत रंग लाई, मुक्केबाज Narender Berwal को मिला देश का सर्वोच्च खेल सम्मान

punjabkesari.in Wednesday, Aug 19, 2026 - 08:07 PM (IST)

हांसी(संदीप सैनी) : हांसी जिले के सोरखी गांव के किसान परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाले मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल का अर्जुन अवॉर्ड के लिए चयन हुआ है। नरेंद्र के चयन की खबर मिलते ही परिवार और गांव में खुशी का माहौल है। परिजनों और ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर खुशी जताई।नरेंद्र ने वर्ष 2009 में मुक्केबाजी शुरू की थी। शुरुआत में गांव के लोग उनके इस फैसले को लेकर ताने भी मारते थे, लेकिन पिता जगदीश बेरवाल ने बेटे का हौसला बढ़ाया और मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। 

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नरेंद्र ने भी तमाम मुश्किलों के बावजूद अपना अभ्यास जारी रखा। भिवानी बॉक्सिंग अकादमी में कोच देवराज के मार्गदर्शन में उन्होंने मुक्केबाजी की बारीकियां सीखीं।वर्ष 2013 में नरेंद्र भारतीय सेना में भर्ती हुए। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया। फिलीपींस यूथ वर्ल्ड कप में रजत, आर्मेनिया यूथ एशियन चैंपियनशिप में रजत और मिलिट्री वर्ल्ड गेम्स में रजत पदक जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित की। वर्ष 2023 के एशियन गेम्स में कांस्य और 2025 के नेशनल गेम्स में स्वर्ण पदक भी उनके नाम रहा।हाल ही में ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में 90 किलोग्राम से अधिक भारवर्ग में नरेंद्र ने रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। 

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फाइनल मुकाबले में उन्हें इंग्लैंड के डेमर थॉमस के खिलाफ 0-5 से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने रजत पदक अपने नाम किया।नरेंद्र के अर्जुन अवॉर्ड के लिए चयन पर उनके पिता जगदीश बेरवाल और माता रोशनी देवी ने खुशी जताई।

उन्होंने कहा कि बेटे की यह उपलब्धि पूरे परिवार के साथ-साथ सोरखी गांव और हांसी जिले के लिए गर्व की बात है।2009 में शुरू हुआ सफर, 16 साल की मेहनत और देश के लिए लगातार पदक—अब नरेंद्र बेरवाल अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित होकर हांसी के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहे हैं।

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Content Writer

Isha

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