HKRN पर विधानसभा में CM सैनी का जवाब : ठेकेदारी और शोषण खत्म कर युवाओं को पारदर्शी व्यवस्था देने का दावा
punjabkesari.in Monday, Aug 31, 2026 - 08:31 PM (IST)
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) को लेकर विधानसभा में चल रही राजनीतिक बहस के बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सरकार का पक्ष मजबूती से रखते हुए कहा कि विपक्ष इस व्यवस्था को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के दृष्टिकोण से देख रहा है, जबकि उनकी सरकार इसे प्रदेश के युवाओं, संविदा कर्मचारियों और उनके परिवारों के हितों से जोड़कर देखती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा में अस्थायी और अनुबंध आधारित कर्मचारियों की व्यवस्था हरियाणा कौशल रोजगार निगम के गठन के बाद पैदा नहीं हुई, बल्कि यह दशकों पुरानी व्यवस्था है, जिसे समय के साथ सरकारों ने बढ़ाया।
मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि उनकी सरकार ने पुरानी ठेकेदार आधारित व्यवस्था को खत्म करते हुए संविदा रोजगार को नियम, योग्यता, आरक्षण, पारदर्शिता और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने का प्रयास किया है। उनके अनुसार HKRN को किसी राजनीतिक प्रयोग के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह मैनपावर इंगेजमेंट को ठेकेदार मुक्त और व्यवस्थित दिशा देने की पहल है।
दशकों पुरानी है अस्थायी कर्मचारियों की व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 31 मार्च 1967 को हरियाणा सरकार के कर्मचारियों की कुल संख्या 97,385 थी। इनमें भी कंटीजेंसी पेड, वर्क-चार्ज्ड और कॉन्ट्रैक्ट आधार पर काम करने वाले 11,397 कर्मचारी शामिल थे। यानी अस्थायी प्रकृति की कर्मचारी व्यवस्था HKRN के गठन से कई दशक पहले से सरकारी तंत्र का हिस्सा रही है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 तक क्लास-1 से क्लास-4 तक कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 2 लाख 55 हजार 319 हो गई। इनमें कंटीजेंसी पेड, वर्क-चार्ज्ड और कॉन्ट्रैक्ट आधार वाली संयुक्त श्रेणी के कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 84,642 हो गई।
मुख्यमंत्री के अनुसार वर्ष 2014 में अनुबंध आधारित कर्मचारियों की संख्या एक लाख से भी अधिक हो चुकी थी। वर्ष 1967 से 2005 तक कंटीजेंसी पेड, वर्क-चार्ज्ड और कॉन्ट्रैक्ट आधार वाली संयुक्त श्रेणी 11,397 से बढ़कर 38,949 हुई, जबकि
कांग्रेस सरकार के अगले नौ वर्षों में यह संख्या बढ़कर करीब 1.10 लाख तक पहुंच गई। सैनी ने इसी आंकड़े को आधार बनाते हुए कहा कि यह स्पष्ट है कि अस्थायी और अनुबंध आधारित कर्मचारियों की व्यवस्था HKRN की देन नहीं है। इसके विपरीत, समय के साथ सरकारी व्यवस्था में ऐसे कर्मचारियों पर निर्भरता बढ़ती चली गई।
‘11 महीने के वेतन’ की व्यवस्था हमने शुरू नहीं की
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती व्यवस्था में संविदा कर्मचारियों का शोषण होता था। भर्ती के नवीनीकरण का बहाना बनाकर कई बार 12 महीने की जगह 11 महीने का वेतन देने की व्यवस्था अपनाई जाती थी।
उन्होंने कहा कि अस्थायी और अनुबंध आधारित व्यवस्था उनकी सरकार ने शुरू नहीं की। सरकार ने तो पहले से चली आ रही व्यवस्था में व्याप्त ठेकेदारी, शोषण और पारदर्शिता की कमी को दूर करने का काम किया है।
सैनी ने कहा कि पुरानी ठेकेदार आधारित व्यवस्था में कर्मचारियों के वेतन में एकरूपता का अभाव था और भुगतान में भी देरी होती थी। ठेकेदार कुल बिल राशि पर दो प्रतिशत कमीशन लेते थे। HKRN के गठन के बाद इस व्यवस्था को संस्थागत स्वरूप दिया गया और 19 जनवरी 2022 से समान वेतन दरें लागू की गईं।
पोर्टल आधारित व्यवस्था से पारदर्शिता का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से तकनीक सक्षम और पारदर्शी प्रणाली लागू की है। अब युवा स्वयं HKRN के पोर्टल पर पंजीकरण करते हैं। इसके लिए सरकार ने ‘डेप्लॉयमेंट ऑफ कॉन्ट्रैक्चुअल पर्संस पॉलिसी-2022’ बनाई है।
सैनी के अनुसार चयन के लिए सिलेक्शन क्राइटेरिया और एलिजिबिलिटी पैरामीटर निर्धारित प्रक्रिया के तहत पहले से सार्वजनिक हैं। उनका कहना था कि इससे नियुक्तियों की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने और ठेकेदार की भूमिका को समाप्त करने में मदद मिली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य संविदा कर्मचारियों को नियमित सरकारी नौकरी बताना कभी नहीं रहा। HKRN का उद्देश्य ठेकेदारों के माध्यम से होने वाले शोषण से कर्मचारियों को निकालकर उन्हें एक व्यवस्थित प्लेटफार्म उपलब्ध कराना है।
DDO शिफ्टिंग और स्थानांतरण के लिए पहली बार संस्थागत व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुरानी व्यवस्था में संविदा कर्मचारियों के स्थानांतरण अथवा DDO शिफ्टिंग के लिए कोई व्यवस्थित और पारदर्शी संस्थागत तंत्र नहीं था। HKRN ने पहली बार संविदा कर्मचारियों के लिए DDO शिफ्टिंग और स्थानांतरण का प्रावधान किया।
उन्होंने बताया कि अब तक निगम के माध्यम से DDO शिफ्टिंग के 1,316 मामले स्वीकृत किए जा चुके हैं। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से कर्मचारियों को प्रशासनिक स्तर पर अधिक स्पष्टता और सुविधा मिली है।
मृत्यु की स्थिति में परिवार को अनुकंपा तैनाती
मुख्यमंत्री सैनी ने संविदा कर्मचारियों की सेवा के दौरान मृत्यु की स्थिति में उनके परिवारों के सामने आने वाली कठिनाइयों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने ‘डेप्लॉयमेंट ऑफ कॉन्ट्रैक्चुअल पर्संस पॉलिसी-2022’ के खंड 12 के तहत अनुकंपा तैनाती का प्रावधान किया।
अब तक 306 पात्र अभ्यर्थियों को अनुकंपा आधार पर रोजगार दिया जा चुका है। इसके अलावा कर्मचारी के परिवार को तीन लाख रुपये की अनुकंपा सहायता अथवा अनुकंपा तैनाती में से एक विकल्प चुनने का अधिकार दिया गया है।
महिला कर्मचारियों के लिए प्रसूति अवकाश और छुट्टियों का प्रावधान
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला संविदा कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। HKRN की स्थापना के बाद पात्र महिला संविदा कर्मचारियों के लिए प्रसूति अवकाश का प्रावधान सुनिश्चित किया गया।
इसके साथ ही एक कैलेंडर वर्ष में 10 चिकित्सा अवकाश और 10 आकस्मिक अवकाश का प्रावधान है। महिला कर्मचारियों को 22 दिन के आकस्मिक अवकाश का लाभ दिए जाने की बात भी मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कही।
EPF और ESI में करोड़ों रुपये का योगदान
सैनी ने कहा कि संविदा कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा के लिए वैधानिक अंशदान की व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। HKRN ने EPF, ESI और श्रम कल्याण निधि को व्यवस्थित निगरानी व्यवस्था से जोड़ा।
सरकार के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2022-23 में 288 करोड़ 86 लाख रुपये EPF, 47 करोड़ 2 लाख रुपये ESI और 4 करोड़ 30 लाख रुपये श्रम कल्याण निधि के रूप में जमा किए गए। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 30 जून 2026 तक 129 करोड़ 94 लाख रुपये EPF और 10 करोड़ 17 लाख रुपये ESI के रूप में जमा किए जा चुके हैं।
वर्तमान व्यवस्था में 21 हजार रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले संविदा कर्मचारियों को ESI के माध्यम से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सुविधाएं देने का भी प्रावधान है।
आरक्षण के आंकड़ों से सरकार ने रखा अपना पक्ष
मुख्यमंत्री ने कहा कि HKRN के माध्यम से तैनाती में सरकार की आरक्षण नीति को भी लागू किया गया है। हरियाणा सरकार की ओर से जारी नियमों, नीतियों और निर्देशों के अनुसार आरक्षण संबंधी प्रावधान तैनाती प्रक्रिया में शामिल किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि निगम द्वारा 28,350 नए कर्मचारी लगाए गए। इनमें लेवल-1 के 4,548, लेवल-2 के 9,577 और लेवल-3 के 14,225 कर्मचारी शामिल हैं।
इनमें अनुसूचित जाति वर्ग के 6,788 कर्मचारी हैं, जो निर्धारित 20 प्रतिशत हिस्सेदारी के मुकाबले 23.94 प्रतिशत है। इसी प्रकार पिछड़ा वर्ग के 8,128 कर्मचारी लगाए गए, जो निर्धारित 27 प्रतिशत हिस्सेदारी के मुकाबले 28.67 प्रतिशत है।
गरीब परिवारों के युवाओं के लिए प्राथमिकता का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार में युवाओं का हौसला बढ़ा है। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों में पहले कोई सरकारी नौकरी नहीं थी, ऐसे गरीब परिवारों के लिए भी निर्धारित मापदंड के तहत प्रावधान किया गया है।
उनके अनुसार निगम की स्थापना के बाद से तैनाती निर्धारित मानकों के आधार पर की जा रही है। सरकार का जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि संविदा रोजगार की प्रक्रिया में नियमों और सामाजिक प्रतिनिधित्व का पालन हो।
ग्रिवांस रिड्रेसल के लिए SOP, कार्रवाई पर भी प्रक्रिया तय
HKRN से कर्मचारियों को हटाए जाने को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर भी मुख्यमंत्री ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि बिना नोटिस और बिना जांच के रिलीजिंग ऑर्डर थमा दिए जाने का आरोप सही नहीं है।
सैनी ने कहा कि HKRN में शिकायतों के समाधान के लिए बाकायदा ग्रिवांस रिड्रेसल की निर्धारित SOP बनाई गई है। इसी तरह पेनल एक्शन के लिए भी पहले से निर्धारित SOP और प्रक्रिया मौजूद है। यानी कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई के लिए संस्थागत प्रक्रिया का पालन किया जाता है।
सेवा सुरक्षा के लिए आए 62,497 आवेदन
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में सेवा सुरक्षा से संबंधित ताजा आंकड़े भी रखे। उन्होंने बताया कि 31 अगस्त की सुबह 10 बजे तक सर्विस सिक्योरिटी के 62,497 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से DDOs द्वारा 55,077 और HODs द्वारा 27,896 आवेदन अनुमोदित किए जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि अगले दो महीनों में ऐसा कोई पात्र कर्मचारी नहीं बचेगा, जिसे सेवा सुरक्षा नहीं दी गई हो।
सैनी का राजनीतिक संदेश—‘HKRN ठेकेदार मुक्त व्यवस्था की दिशा में कदम’
HKRN पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का जवाब केवल प्रशासनिक आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके जरिए उन्होंने सरकार की राजनीतिक दृष्टि भी स्पष्ट करने का प्रयास किया। उनका मूल तर्क यह रहा कि विपक्ष जिस व्यवस्था को सरकार की विफलता के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, उसकी जड़ें कई दशक पुरानी हैं। सैनी सरकार का दावा है कि उसने उस व्यवस्था को समाप्त करने के बजाय उसे अधिक पारदर्शी, नियमबद्ध और सामाजिक सुरक्षा से युक्त स्वरूप दिया है।
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि उनकी सरकार संविदा कर्मचारियों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। उनके अनुसार HKRN को नियमित सरकारी नौकरी के विकल्प के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया, बल्कि ठेकेदार आधारित रोजगार व्यवस्था से बाहर निकालकर कर्मचारियों को एक संस्थागत प्लेटफार्म देने के उद्देश्य से बनाया गया है।
इस पूरे जवाब के राजनीतिक मायने भी महत्वपूर्ण हैं। विधानसभा में HKRN को लेकर विपक्ष के हमलों के बीच सैनी सरकार अब बहस को केवल संविदा रोजगार के सवाल तक सीमित रखने के बजाय ठेकेदारी बनाम पारदर्शी व्यवस्था, शोषण बनाम सामाजिक सुरक्षा और पुरानी व्यवस्था बनाम तकनीक आधारित प्रणाली के मुद्दे पर ले जाना चाहती है। मुख्यमंत्री के आंकड़ों का इस्तेमाल इसी व्यापक राजनीतिक नैरेटिव को स्थापित करने के लिए किया गया कि HKRN समस्या की शुरुआत नहीं, बल्कि दशकों पुरानी समस्या को व्यवस्थित करने का सरकार का प्रयास है