हरियाणा में ''टीबी'' की हार: प्रदेश की 2157 पंचायतें हुई टीबी-मुक्त, ये जिला रहा नंबर-1 पर
punjabkesari.in Monday, Mar 16, 2026 - 06:15 PM (IST)
डेस्क: हरियाणा ने टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। साल 2025 में प्रदेश की 2,157 ग्राम पंचायतें अब पूरी तरह टीबी-मुक्त घोषित कर दी गई हैं। यह संख्या राज्य की कुल 6,237 पंचायतों का लगभग 35 प्रतिशत है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में टीबी-मुक्त पंचायतों की संख्या में आई तेजी जमीनी स्तर पर कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाती है।
तीन वर्षों में चार गुना सुधार
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, टीबी-मुक्त पंचायतों की संख्या में पिछले तीन वर्षों के दौरान लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। साल 2023 में राज्य की महज 574 पंचायतों को टीबी-मुक्त प्रमाण पत्र मिला था, जो कुल पंचायतों का करीब 9 प्रतिशत था। साल 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 1,855 पंचायतों तक पहुंचा और अब 2025 में यह संख्या बढ़कर 2,157 हो गई है। डॉ. मिश्रा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता, जांच और समय पर उपचार सुनिश्चित करने से ही यह संभव हो पाया है।
टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत पंचायतों के प्रदर्शन को तीन श्रेणियों गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज में प्रमाणित किया जाता है। वर्ष 2025 में टीबी-मुक्त घोषित 2,157 पंचायतों में से 211 पंचायतों ने 'गोल्ड' श्रेणी हासिल की है, जो उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को दर्शाता है। इसके अलावा 646 पंचायतें 'सिल्वर' और 1,300 पंचायतें 'ब्रॉन्ज' श्रेणी में आई हैं। इन श्रेणियों का निर्धारण टीबी के नए मामलों में कमी, सफल उपचार की दर और स्वास्थ्य जांच की निरंतरता जैसे कड़े मानकों के आधार पर किया गया है।
जिला स्तर पर अम्बाला ने प्रदेश में बाजी मारी है। जिले की 400 में से 191 पंचायतें टीबी-मुक्त घोषित की गई हैं, जिनमें 9 गोल्ड, 79 सिल्वर और 103 ब्रॉन्ज श्रेणी की पंचायतें शामिल हैं। भिवानी जिले की 165 पंचायतें इस सूची में जगह बनाने में सफल रही हैं। कुरुक्षेत्र में 145, रेवाड़ी में 131, सिरसा में 119 और पलवल में 110 पंचायतें टीबी-मुक्त हुई हैं। छोटे जिलों में पंचकूला का प्रदर्शन सराहनीय रहा, जहां 133 में से 105 पंचायतें इस लक्ष्य तक पहुंच चुकी हैं। गुरुग्राम, नूंह और हिसार में भी सुधार देखा गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस मुहिम की सफलता के पीछे आशा वर्करों, स्वास्थ्य कर्मचारियों और पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में संदिग्ध मरीजों की पहचान के लिए घर-घर जाकर व्यापक स्क्रीनिंग की गई और उन्हें समय पर दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में राज्य की शत-प्रतिशत पंचायतों को टीबी-मुक्त श्रेणी में लाकर राष्ट्रीय लक्ष्य को समय से पहले हासिल करना है।