दिव्यांग सैनिकों को बड़ी राहत ! सेना में 15 साल से कम सेवा करने पर भी मिलेगी पेंशन, HC का ऐतिहासिक फैसला
punjabkesari.in Tuesday, May 12, 2026 - 01:56 PM (IST)
चंडीगढ़ : सेना में सेवा के दौरान दिव्यांगता के आधार पर रिटायर हुए सशस्त्र बलों के कर्मियों को उनकी दिव्यांगता पेंशन का अधिकार है, भले ही उन्होंने 15 वर्ष की न्यूनतम सेवा अवधि पूरी न की हो। इस टिप्पणी के साथ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने भारत सरकार द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया।
जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और दीपक मनचंदा की खंडपीठ केंद्र की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (ए.एफ.टी.) के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें सरकार को लगभग साल तक सेवा कर चुके लोगों को दिव्यांगता पैंशन देने का निर्देश दिया गया था।
सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि प्रतिवादी ने सशस्त्र बलों में लगभग नौ वर्षों तक ही सेवा की है और इसलिए वह दिव्यांगता पैंशन के हकदार नहीं है क्योंकि आवश्यक न्यूनतम सेवा 15 वर्ष है। जब प्रतिवादी को सेवामुक्त किया गया था, तब चिकित्सा बोर्ड ने यह आकलन किया था कि प्रतिवादी की बीमारी सेना में सेवा के कारण बढ़ गई थी और उनकी दिव्यांगता आजीवन 30 प्रतिशत आंकी गई थी। इसे ध्यान में रखते हुए उन्हें सेवा अवधि को छोड़कर पेंशन का लाभ पहले ही दिया जा चुका था। इसलिए सेवा अवधि को जोड़कर इसे संशोधित करना गलत था।
सुप्रीम कोर्ट पहले ही कर चुका है स्पष्ट
सभी पक्षों को सुनने के हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि लाभ प्राप्त करने के लिए संबंधित अधिकारी के पास 15 वर्ष की सेवा अवधि नहीं थी लेकिन उक्त कानूनी प्रश्न अब अनसुलझा नहीं है क्योंकि इस पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले ही निर्णय लिया जा चुका है। यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य बनाम वी. आर. नानूकुट्टन नायर के मामले में सुप्रीम कोर्ट इसी तरह के मुद्दे से निपट रहा था। खंडपीठ ने यह निष्कर्ष दर्ज करते हुए याचिका खारिज कर दी कि उक्त पहलू पर कानून के स्थापित सिद्धांत के बावजूद भारत सरकार कानून के प्रावधानों की अनदेखी करते हुए याचिकाएं दायर कर रही है।
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