हरियाणा में शहरी विकास को गति देने के लिए सरकार की नई पहल, दिव्य नगर योजना से चमकेंगे शहर
punjabkesari.in Thursday, Jun 25, 2026 - 03:32 PM (IST)
चंडीगढ़ (धरणी) : हरियाणा सरकार ने शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए ‘दिव्य नगर योजना’ को गति देना शुरू कर दिया है। योजना के तहत नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं को अपने क्षेत्रों में बड़े विकास और सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइंस के अनुसार अब स्थानीय निकाय आधुनिक शहरी सुविधाओं, हरित क्षेत्रों, पर्यटन स्थलों और तकनीक आधारित सेवाओं से जुड़े प्रस्ताव तैयार कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पहले ही प्रदेश के विधायकों से अपने-अपने क्षेत्रों में दिव्य नगर योजना के अंतर्गत विकास परियोजनाओं की पहचान करने और शहरों के सौंदर्यीकरण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान कर चुके हैं। इसके बाद विभिन्न शहरों में संभावित परियोजनाओं को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। सरकार का उद्देश्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों और निकायों की सहभागिता से विकास कार्यों को तेजी से धरातल पर उतारना है।
योजना के अंतर्गत शहरों में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार, खेल अवसंरचना का निर्माण, बड़े पार्क और हरित क्षेत्र विकसित करने, प्रमुख चौकों और सार्वजनिक स्थलों का सौंदर्यीकरण करने जैसे कार्य किए जा सकेंगे। इसके अलावा इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर, स्मार्ट स्ट्रीट लाइटिंग नेटवर्क, ऑडिटोरियम, ओपन एयर थिएटर तथा डिजिटल नागरिक सेवाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इससे शहरों में आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
सरकार ने विभिन्न निकायों के लिए परियोजनाओं की न्यूनतम लागत निर्धारित की है। नगर निगम क्षेत्र में एक परियोजना की न्यूनतम लागत 5 करोड़ रुपये, नगर परिषद में 2 करोड़ रुपये और नगर पालिका क्षेत्र में 1 करोड़ रुपये तय की गई है। प्रत्येक परियोजना के लिए पहले विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी, जिसके बाद मंजूरी की प्रक्रिया पूरी होगी। निकाय अपनी आवश्यकता के अनुसार कई परियोजनाओं के प्रस्ताव तैयार कर सकेंगे।
योजना में वित्तीय भागीदारी और जवाबदेही का भी विशेष प्रावधान किया गया है। नगर निगम परियोजनाओं में राज्य सरकार और स्थानीय निकाय 50-50 प्रतिशत खर्च वहन करेंगे। नगर परिषदों के लिए यह अनुपात 65:35 तथा नगर पालिकाओं के लिए 75:25 निर्धारित किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित हिस्सेदारी उपलब्ध कराने वाले निकायों को ही योजना का लाभ मिलेगा।
अनुदान राशि दो चरणों में जारी की जाएगी। दूसरी किस्त तभी मिलेगी जब पहली किस्त और स्थानीय हिस्सेदारी का कम से कम 75 प्रतिशत उपयोग कर उसका प्रमाण प्रस्तुत किया जाएगा। नगर निगम आयुक्त और जिला नगर आयुक्त स्तर पर नियमित समीक्षा के माध्यम से परियोजनाओं की निगरानी की जाएगी। सरकार का मानना है कि दिव्य नगर योजना के जरिए शहरों में आधुनिक आधारभूत ढांचा, बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं और आकर्षक शहरी वातावरण विकसित होगा, जिससे प्रदेश के शहरी क्षेत्रों को नई पहचान मिलेगी।