अब जगमगा उठेंगे गांव, बिजली निगमों को शेष गांवों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति करने के निर्देश,

punjabkesari.in Friday, Jan 09, 2026 - 10:59 AM (IST)

चंडीगढ़: नई बिजली दरों से पहले हरियाणा में बिजली व्यवस्था की असल तस्वीर गुरुवार को खुलकर सामने आ गई। पंचकूला स्थित हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) के कोर्ट रूम में हुई जनसुनवाई में जहां उपभोक्ताओं ने गांवों में अधूरी बिजली आपूर्ति और बढ़ते खर्च का मुद्दा उठाया। वहीं आयोग ने दोनों बिजली वितरण निगमों को साफ संदेश दिया- नुकसान घटाइए, आपूर्ति सुधारिए।

करीब 4 घंटे चली इस सुनवाई में उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) की वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) याचिकाओं पर उपभोक्ताओं की आपत्तियां और सुझाव दर्ज किए गए। सुनवाई के दौरान हर श्रेणी के उपभोक्ताओं की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि बिजली दरों का असर अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है।

 
डिस्कॉम्स की ओर से दावा किया गया कि यूएचबीवीएन क्षेत्र के 3,393 और डीएचबीवीएन क्षेत्र के 2,517 गांवों में 24 घंटे बिजली दी जा रही है। लेकिन इसी दावे ने अगला सवाल भी खड़ा कर दिया, जो गांव अब भी पीछे हैं, उनका क्या? आयोग ने इस पर रुख साफ करते हुए कहा कि शेष गांवों में भी बिना देरी 24 घंटे बिजली सुनिश्चित की जाए।


 
सुनवाई का केंद्रीय मुद्दा रहा एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल (एटीएंडसी) लॉस। आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में यह नुकसान बढ़ना नहीं चाहिए। यूएचबीवीएन ने अपना डिस्ट्रीब्यूशन लॉस 9.33% और डीएचबीवीएन ने 10.26% बताया, लेकिन आयोग ने संकेत दिए कि अब आंकड़ों से ज्यादा नतीजे मायने रखेंगे। साथ ही सस्ती दरों पर ऋण लेने और सप्लाई कॉस्ट व रेवेन्यू के अंतर को घटाने के निर्देश भी दिए गए।

 

2026-27 के लिए डिस्कॉम्स ने 51,156.71 करोड़ रुपये की राजस्व मांग रखी है। चालू वर्ष में 1,605.16 करोड़ रुपये के सरप्लस का अनुमान दिया गया, लेकिन पुराने घाटे जोड़ने के बाद तस्वीर बदल जाती है। कुल मिलाकर 4,484.71 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अब भी बना हुआ है। यानी, हिसाब-किताब में सुधार दिख रहा है, पर वित्तीय दबाव खत्म नहीं हुआ।

 

आयोग ने ग्रीन एनर्जी पर जोर देते हुए कहा कि जब देश इस दिशा में बढ़ रहा है तो हरियाणा पीछे नहीं रह सकता। डिस्कॉम्स ने बताया कि प्रदेश की कुल स्थापित क्षमता का 40% हिस्सा ग्रीन एनर्जी से है। वहीं भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से मिलने वाली 846.14 मेगावाट बिजली का मुद्दा भी उठा, जिसकी लागत करीब 84 पैसे प्रति यूनिट बताई गई।
 

जनसुनवाई के अंत में आयोग ने साफ कर दिया कि फैसला केवल पंचकूला तक सीमित नहीं रहेगा। उपभोक्ताओं की बात सीधे जमीन से सुनने के लिए आयोग अब गुरुग्राम (10 फरवरी), पानीपत (24 फरवरी), हिसार (25 फरवरी) और यमुनानगर (2 मार्च) में जनसुनवाई करेगा। फिलहाल नई बिजली दरों से पहले आयोग ने गेंद डिस्कॉम्स के पाले में डाल दी है। साफ़ कहा है की या तो व्यवस्था सुधरे, या सवाल और कड़े होंगे।


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Content Writer

Isha

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