बिना नोटिस छापेमारी पर भड़के गोपाल कांडा, कहा- कारोबारियों के मन में पैदा हो रहा है भय

punjabkesari.in Friday, Sep 18, 2026 - 07:18 PM (IST)

चंडीगढ़(चंद्र शेखर धरणी):  हरियाणा लोकहित पार्टी (हलोपा) के अध्यक्ष एवं पूर्व गृह राज्य मंत्री गोपाल कांडा ने अपने फार्महाउस और कार्यालय पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी कारोबारी या कंपनी के खिलाफ जांच की जरूरत है तो नियमानुसार दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए। बिना किसी पूर्व नोटिस के सीधे छापेमारी की कार्रवाई से व्यापारिक जगत में भय का माहौल पैदा हो सकता है।

कांडा ने कहा कि ईडी की कार्रवाई रियल एस्टेट कंपनी वाटिका लिमिटेड से जुड़े वर्ष 2008 के करीब 248.46 करोड़ रुपये के जमीन सौदे की जांच के सिलसिले में हुई है। उनके अनुसार, जांच एजेंसी को संदेह था कि वाटिका ग्रुप से कथित रूप से डायवर्ट हुआ धन उनकी कंपनियों में स्थानांतरित किया गया।

35 करोड़ रुपये की एंट्री पर उठाया सवाल
गोपाल कांडा ने दावा किया कि जांच के दौरान ईडी को 35 करोड़ रुपये की एक ऐसी एंट्री का संदेह हुआ, जिसके बारे में माना गया कि यह राशि वाटिका ग्रुप से उनकी कंपनी में आई और वापस नहीं हुई। कांडा के मुताबिक, वास्तविक स्थिति इससे अलग है। उन्होंने कहा कि वाटिका ग्रुप और उनकी कंपनी के बीच 35 करोड़ रुपये की कोई ऐसी राशि या एंट्री लंबित नहीं थी।
उन्होंने कहा कि यदि किसी वित्तीय लेनदेन को लेकर जांच एजेंसी के सामने कोई सवाल था तो संबंधित पक्ष से पहले दस्तावेज या स्पष्टीकरण मांगा जा सकता था। कांडा ने दावा किया कि इस मामले में उन्हें किसी पूर्व नोटिस के माध्यम से अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया।

कार्रवाई के तरीके पर आपत्ति
हलोपा प्रमुख ने कहा कि जांच एजेंसियों को कानून के तहत कार्रवाई करने का अधिकार है, लेकिन कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर भी पारदर्शिता जरूरी है। उनका कहना था कि अचानक की गई इस तरह की कार्रवाई से संबंधित व्यक्ति और उसके कारोबार की प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है।

कांडा ने कहा कि वाटिका ग्रुप की ओर से भी कथित तौर पर यह स्पष्ट किया जा चुका है कि गोपाल कांडा अथवा उनकी कंपनियों के साथ किसी राशि या एंट्री का भुगतान लंबित नहीं है। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि जब संबंधित पक्ष के बीच कोई बकाया लेनदेन नहीं है तो छापेमारी की आवश्यकता और उसके आधार को स्पष्ट किया जाना चाहिए।

अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
गोपाल कांडा ने कार्रवाई को लेकर कुछ ईडी अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से इस कार्रवाई का इस्तेमाल उन्हें अथवा सरकार को बदनाम करने के लिए तो नहीं किया गया। हालांकि, यह उनका आरोप और आशंका है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि उन्होंने प्रस्तुत नहीं की।
उन्होंने कहा कि किसी भी जांच में दस्तावेजी साक्ष्य और तथ्य महत्वपूर्ण होते हैं। यदि जांच एजेंसी के पास कोई ठोस आधार है तो उसे कानून के अनुसार जांच आगे बढ़ानी चाहिए और संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।

एनडीए के सहयोगी दल के प्रमुख हैं कांडा
हलोपा राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए के सहयोगी दलों में शामिल है। हरियाणा के पिछले विधानसभा चुनाव में हलोपा और भाजपा ने गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था। ऐसे राजनीतिक परिदृश्य में कांडा की ओर से ईडी की कार्रवाई को लेकर उठाए गए सवालों ने इस घटनाक्रम को राजनीतिक दृष्टि से भी चर्चा में ला दिया है।

कारोबारियों में भय को लेकर जताई चिंता
कांडा ने कहा कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर कारोबारियों और उद्यमियों के मन में यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि बिना पूर्व सूचना या पर्याप्त स्पष्टीकरण के उनके प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई हो सकती है। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की कार्रवाई का सिलसिला चलता रहा तो व्यापारियों, उद्यमियों और कारोबारियों में भय की स्थिति बन सकती है।

उन्होंने कहा कि कारोबारी गतिविधियों के लिए विश्वास और स्थिरता का माहौल जरूरी है। जांच एजेंसियों को अपनी कार्रवाई के दौरान कानून और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए, ताकि किसी भी व्यक्ति की प्रतिष्ठा और कारोबार पर अनावश्यक प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। गोपाल कांडा ने पूरे मामले में कार्रवाई के आधार और संबंधित वित्तीय लेनदेन को लेकर स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग की है।


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Content Writer

Isha

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