डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की स्मृति में विशाल साइंस म्यूजियम और विशाल प्रतिमा स्थापित करेगी सरकार : अनिल विज
punjabkesari.in Thursday, Jul 30, 2026 - 03:01 PM (IST)
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा है कि जिस धरती ने कभी राष्ट्रवाद की बुलंद आवाज सुनी थी, वही धरती अब एक बार फिर उस विचारधारा को नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाएगी। उन्होंने घोषणा की कि हरियाणा सरकार अंबाला छावनी में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की स्मृति में आधुनिक साइंस म्यूजियम, एक भव्य संग्रहालय और उनकी विशाल प्रतिमा स्थापित करेगी। विज ने कहा कि यह केवल एक स्मारक नहीं होगा, बल्कि राष्ट्रवाद, इतिहास और प्रेरणा का केंद्र बनेगा।
अंबाला छावनी से फिर गूंजेगी राष्ट्रवाद की आवाज
अनिल विज ने कहा कि अंबाला छावनी का इतिहास देश के राष्ट्रवादी आंदोलन से गहराई से जुड़ा हुआ है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जब जम्मू-कश्मीर के लिए रवाना हुए थे, तब हरियाणा में उनका एकमात्र पड़ाव अंबाला छावनी ही था। यहीं उन्होंने ऐतिहासिक जनसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्र की एकता और अखंडता का संदेश दिया था।उन्होंने कहा कि इसी ऐतिहासिक धरती से "एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान नहीं चलेंगे" का उद्घोष पूरे देश में गूंजा था। इसलिए सरकार ने इस ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का निर्णय लिया है।
नेहरू मंत्रिमंडल से दिया था सिद्धांतों के लिए इस्तीफा
अनिल विज ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे और स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग मंत्री के रूप में उन्होंने देश के औद्योगिक विकास की मजबूत नींव रखी। उन्होंने बताया कि पंडित जवाहरलाल नेहरू की सरकार में उद्योग मंत्री रहते हुए डॉ. मुखर्जी ने कई महत्वपूर्ण कार्य किए, लेकिन जब उन्हें लगा कि सरकार की नीतियां राष्ट्रहित के अनुरूप नहीं हैं तो उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता करने के बजाय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना उचित समझा।
अनुच्छेद 370 के खिलाफ सबसे बुलंद आवाज बने
विज ने कहा कि जब जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के कारण अलग व्यवस्था लागू थी और वहां जाने के लिए परमिट लेना अनिवार्य था, तब डॉ. मुखर्जी ने इसका खुलकर विरोध किया। उन्होंने घोषणा की कि "मैं बिना परमिट कश्मीर जाऊंगा।" उन्होंने बताया कि 11 मई को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 23 जून को श्रीनगर जेल में उनका निधन हो गया। विज ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का यह बलिदान देश की एकता और अखंडता के लिए था, जिसे राष्ट्र हमेशा स्मरण करेगा।
औद्योगिकीकरण और श्रमिक कल्याण के प्रबल समर्थक थे डॉ. मुखर्जी
अनिल विज ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल राष्ट्रवादी नेता ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी अर्थशास्त्री और उद्योग नीति के निर्माता भी थे। उन्होंने 52 वर्ष की अल्पायु में ऐसे कार्य किए, जिनकी छाप आज भी देश के औद्योगिक विकास में दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी सरकारी नियंत्रण और निजी उद्योगों के संतुलित विकास के पक्षधर थे। उनका मानना था कि उद्योगों की प्रगति तभी संभव है, जब श्रमिकों के हितों की रक्षा हो और पूंजी तथा श्रम के बीच समन्वय स्थापित किया जाए। उनके अनुसार श्रमिक कल्याण के बिना राष्ट्र निर्माण की कल्पना अधूरी है।
इतिहास में योगदान को नहीं मिला पर्याप्त स्थान
विज ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को इतिहास की पुस्तकों में वह स्थान नहीं मिला, जिसके वे वास्तविक रूप से अधिकारी थे। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि नई पीढ़ी को उनके विचारों, संघर्षों और राष्ट्र निर्माण में निभाई गई भूमिका से परिचित कराया जाए।
भाजपा की वैचारिक नींव रखने वाले महापुरुष
अनिल विज ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय दोनों ही अल्पायु में इस दुनिया से विदा हो गए, लेकिन उनके विचार और सिद्धांत आज भी जीवंत हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की वैचारिक आधारशिला इन्हीं महापुरुषों के विचारों पर खड़ी है और उनके आदर्श आज भी करोड़ों कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
अंबाला को मिलेगी नई ऐतिहासिक पहचान
विज ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की स्मृति में बनने वाला संग्रहालय, साइंस म्यूजियम और विशाल प्रतिमा अंबाला छावनी को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएंगे। यह स्थान न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा, बल्कि देशभक्ति, राष्ट्रवाद और भारतीय इतिहास के अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र भी सिद्ध होगा।