ज्ञानचंद गुप्ता के एक्शन से सभी विभागों के अधिकारी चौकन्ने, एक अधिकारी को महंगा पड़ा

10/26/2020 2:26:45 PM

चंडीगढ़ (धरणी): हरियाणा गुरुग्राम जिले के पटौदी विधानसभा के विधायक सत्यप्रकाश गरावता द्वारा बुलाई अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण मीटिंग को गुरुग्राम एचआईडीसी के एक अधिकारी द्वारा अनदेखा करना महंगा पड़ गया। अधिकारी के खिलाफ विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता के एक्शन ने सभी विभागों के अधिकारियों के कान खड़े कर दिए हैं। एचआईडीसी के अधिकारी द्वारा बाद में लिखित माफी मांगने व भविष्य में ऐसी गलती न करने के वायदे के बाद जाकर कहीं एक्शन में नरमी आई है।

जानकारी के अनुसार एचआईडीसी के एक अधिकारी द्वारा विधायक सत्यप्रकाश गरावता द्वारा बुलाई गई अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण मीटिंग में जानबूझ कर न जाने की शिकायत विधायक गरावता ने हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता को की।

स्पीकर गुप्ता ने उस पर तीन दिनों में रिपोर्ट तलब की। अधिकारी द्वारा लिखित जवाब में कहा गया कि उन्होंने अपने अधीनस्थ एजीएम स्तर के अधिकारी से 11 बजे मीटिंग बुलाई थी, इसलिए नहीं गई, जबकि विधायक की मीटिंग उसी दिन प्रात 9 बजे बुलाई गई थी। एचआईडीसी के अधिकारी का कार्यालय भी जहां, विधायक ने मीटिंग बुलाई थी के अत्यंत निकट है।

पता चला कि अधिकारी अपने लिखित में खुद ही निशाने पर आ गई क्योंकि अपने अधीनस्थ एजीएम स्तर के अधिकारी से 11 बजे मीटिंग बुलाई थी, वह  उनके जूनियर कर्मचारी हैं। अपने विभाग की मीटिंग यह जीएम स्तर की अधिकारी हैं, जिससे वे मीटिंग दोबारा से भी बुला सकती थी। 

गुरुग्राम एचआईडीसी के अधिकारी को स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता के दफ्तर में व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ा। गलती पकड़े जाने पर  गुरुग्राम एचआईडीसी के अधिकारी ने माफी मांगी। स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता ने तब केवल इतना कहा कि अगर विधायक सत्यप्रकाश गरावता उन्हें लिख कर दें व अपनी शिकायत वापिस लें तभी यह सम्भव है। विधायक सत्यप्रकाश गरावता से एचआईडीसी अधिकारी ने जाकर माफी मांगी, उनसे लिखवा कर भिजवाया, तब जाकर यह मामला निपटा। 
 

गौरतलब है कि स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता ने विधायकों का मान-सम्मान न रखने व फोन न उठाने वाले अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लेने शुरू कर दिए हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग से जब विधायकों की बातचीत सुनी तो उन दिनों भी विधायकों ने अधिकारियों द्वारा उनके फोन न सुनने की शिकायत की थी, जिस पर गुप्ता यह मामला मुख्यमंत्री के दरबार में भी ले गए थे। मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने भी उन दिनों अधिकारियों को आदेश दिए थे कि विधायकों के फोन सुनें, अगर व्यस्त हैं तो बाद में काल बैक करें। 


Shivam

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