Haryana : खाड़ी देशों में रोजगार कई परिवारों के लिए बना त्रासदी...लोकसभा में MP सतपाल ब्रह्मचारी और जेपी के सवाल पर सरकार ने दिए चौंकाने वाले आंकड़े
punjabkesari.in Tuesday, Aug 04, 2026 - 04:47 PM (IST)
चंडीगढ़ (चन्द्रशेखर धरणी): बेहतर रोजगार और अधिक आय की उम्मीद में हर साल लाखों भारतीय खाड़ी देशों का रुख करते हैं। हरियाणा से भी बड़ी संख्या में युवा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, कुवैत और ओमान जैसे देशों में काम करने जाते हैं। लेकिन इन सपनों के पीछे एक चिंताजनक तस्वीर भी सामने आई है। संसद में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 से 2025 के बीच केवल सऊदी अरब और यूएई में ही 15,439 भारतीय नागरिकों की मौत दर्ज की गई है।
यह जानकारी विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में हिसार से कांग्रेस सांसद जयप्रकाश ‘जेपी’ और सोनीपत से कांग्रेस सांसद सतपाल ब्रह्मचारी द्वारा पूछे गए संयुक्त प्रश्न के उत्तर में दी। सांसदों ने विदेशों में भारतीय नागरिकों की मौत के कारण, कामगारों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, बीमा और पीड़ित परिवारों को मिलने वाली सहायता संबंधी विस्तृत जानकारी मांगी थी।
सऊदी अरब में सबसे अधिक मौतें, यूएई दूसरे स्थान पर
विदेश मंत्रालय के अनुसार तीन वर्षों में सऊदी अरब में 7,981 भारतीय नागरिकों की मौत हुई। इनमें 6,376 प्राकृतिक मौतें, 182 कार्यस्थल दुर्घटनाएं, 354 आत्महत्या, 29 आपराधिक घटनाएं तथा 1,040 अन्य कारणों से हुई मौतें शामिल हैं।
वहीं, यूएई में इसी अवधि के दौरान 7,458 भारतीयों की मौत दर्ज की गई।
इनमें 5,702 प्राकृतिक मौतें, 128 कार्यस्थल दुर्घटनाएं, 511 आत्महत्या, 25 आपराधिक घटनाएं तथा 1,092 अन्य कारणों से हुई मौतें शामिल हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अमेरिका 2,850 मौतों के साथ तीसरे स्थान पर है। इसके अलावा कुवैत, ओमान, कतर, मलेशिया, इटली, ब्रिटेन और जर्मनी में भी भारतीय नागरिकों की उल्लेखनीय संख्या में मौतें दर्ज की गई हैं।
हरियाणा के हजारों परिवारों से जुड़ा है यह मुद्दा
हरियाणा के महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, झज्जर, भिवानी, हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, नूंह तथा आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए खाड़ी देशों में जाते हैं। ऐसे में विदेशों में भारतीय कामगारों की मौत के ये आंकड़े राज्य के हजारों परिवारों की चिंता और सुरक्षा से सीधे जुड़े हुए हैं।
सांसदों ने उठाया कामगारों की सुरक्षा का मुद्दा
लोकसभा में सांसद जयप्रकाश और सतपाल ब्रह्मचारी ने केवल मौतों का आंकड़ा ही नहीं, बल्कि विदेशों में भारतीय कामगारों की कार्य परिस्थितियों, मानसिक तनाव, सामाजिक सुरक्षा, बीमा सुविधा, कानूनी सहायता तथा किसी भारतीय की मृत्यु होने पर उसके पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक भारत लाने की व्यवस्था पर भी सरकार से जवाब मांगा।
विदेश मंत्रालय ने बताई सहायता व्यवस्था
सरकार ने बताया कि विदेशों में भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए भारतीय दूतावासों और उच्चायोगों में 24 घंटे हेल्पलाइन, प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र, 'मदद' पोर्टल, सीपी-ग्राम्स, ई-माइग्रेट, व्हाट्सएप और ई-मेल जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। जिन देशों में भारतीय कामगारों की संख्या अधिक है, वहां विशेष लेबर विंग भी कार्यरत हैं।
इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड से मिलती है मदद
विदेश मंत्रालय के अनुसार संकट में फंसे भारतीय नागरिकों को इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड (ICWF) के माध्यम से कानूनी सहायता, आर्थिक मदद, चिकित्सा सुविधा, अस्थायी आवास, हवाई यात्रा और मृतक के पार्थिव शरीर को भारत भेजने तक की सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
48 घंटे में पार्थिव शरीर भेजने का लक्ष्य
सरकार ने बताया कि ई-केयर क्लीयरेंस पोर्टल के माध्यम से विदेश में मृत भारतीय नागरिक के पार्थिव शरीर को भारत भेजने की अनुमति 48 घंटे के भीतर जारी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही प्रवासी भारतीय बीमा योजना (PBBY) के तहत ईसीआर श्रेणी के कामगारों को 10 लाख रुपये तक का बीमा कवर उपलब्ध कराया जाता है।
महिला कामगारों के लिए विशेष सुरक्षा प्रावधान
विदेश मंत्रालय ने संसद को बताया कि खाड़ी देशों तथा अन्य ईसीआर श्रेणी वाले देशों में जाने वाली महिला कामगारों की भर्ती केवल अधिकृत सरकारी एजेंसियों के माध्यम से की जाती है। उनके लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष निर्धारित की गई है, ताकि शोषण, मानव तस्करी और अन्य जोखिमों को कम किया जा सके।
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