खनिज से लेकर जल-जंगल-जमीन तक का पूरा लेखा-जोखा रखेगी हरियाणा सरकार... हर दो महीने में होगी अधिकारियों की बैठक
punjabkesari.in Friday, Oct 30, 2026 - 08:18 PM (IST)
चंडीगढ़( चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा सरकार अब प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करेगी। इसके लिए वित्त विभाग ने प्राकृतिक संसाधन लेखांकन प्रकोष्ठ का पुनर्गठन किया है। अधिकारियों की यह टीम हर दो महीने में बैठक कर खनिज, ऊर्जा, जल, भूमि और वन संसाधनों से जुड़े आंकड़ों का आकलन करेगी। इसके माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता, उपयोग, आर्थिक मूल्य और उनसे होने वाली आय-व्यय की जानकारी एकत्रित की जाएगी।
वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रकोष्ठ प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित आंकड़ों को निर्धारित लेखांकन ढांचे में संकलित करेगा। इसकी अध्यक्षता वित्त विभाग के अतिरिक्त सचिव करेंगे। समिति में प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) हरियाणा कार्यालय के उप महालेखाकार (अकाउंट्स एवं वीसीएल) और प्रधान महालेखाकार (ऑडिट) कार्यालय के उप महालेखाकार (एएमजी-IV) को सदस्य बनाया गया है।
इसके अलावा हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण के अध्यक्ष, खान एवं भूविज्ञान विभाग के अतिरिक्त निदेशक/राज्य खनन अभियंता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग तथा जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ भी समिति में शामिल होंगे।
शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त निदेशक (मुख्यालय), हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण के कार्यकारी उपाध्यक्ष तथा वित्त विभाग के उप सचिव को भी सदस्य बनाया गया है। वित्त विभाग के उप सचिव सदस्य सचिव होंगे। प्रकोष्ठ का मुख्यालय चंडीगढ़ में निर्धारित किया गया है।
प्रकोष्ठ प्रदेश के खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों के एसेट अकाउंट तैयार करने की कार्यप्रणाली निर्धारित करेगा। इसके साथ ही प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित राजस्व और व्यय का विवरण तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों के राष्ट्रीय एसेट अकाउंट के अलावा जल, भूमि और वन संसाधनों के अलग-अलग संपत्ति खाते भी तैयार किए जाएंगे।
समिति प्राकृतिक संसाधनों के इनपुट, उत्पादों और अवशेषों के प्रवाह को भौतिक और मौद्रिक आधार पर दर्शाने वाली सप्लाई एंड यूज टेबल भी तैयार करेगी। इसके अतिरिक्त प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण को समायोजित करने वाले आर्थिक आंकड़ों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों के लेन-देन का भी रिकॉर्ड रखा जाएगा।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य प्रदेश की प्राकृतिक संपदा का वास्तविक आकलन करना और विकास योजनाओं में संसाधनों के उपयोग तथा संरक्षण को लेकर अधिक व्यवस्थित जानकारी उपलब्ध कराना है।