पैरलल लाइसेंस के फैसले पर स्टे लेने का प्रयास करेगी हरियाणा सरकार, जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी जाएगी कानूनी लड़ाई : अनिल विज

punjabkesari.in Wednesday, Oct 21, 2026 - 09:37 PM (IST)

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी):  गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए पैरलल लाइसेंस दिए जाने के हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) के फैसले को लेकर प्रदेश की राजनीति और बिजली विभाग में हलचल तेज हो गई है।

राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने स्पष्ट किया है कि सरकार विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) में अपील दायर करने के साथ ही फैसले पर स्टे लेने का भी प्रयास करेगी। आवश्यकता पड़ने पर सरकार इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएगी।

विज ने बुधवार को चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार अगले पांच से छह दिनों के भीतर एपीटीईएल में अपील दायर करने की तैयारी कर रही है। हालांकि, अपील के लिए 45 दिन का समय उपलब्ध है, लेकिन सरकार इस मामले में देरी नहीं करना चाहती। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बिजली कर्मचारियों के साथ है और पैरलल लाइसेंस के फैसले के खिलाफ अपना पक्ष मजबूती से रखेगी।

इस मुद्दे को लेकर बुधवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी आपात बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। वहीं, ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बिजली कर्मचारियों की प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल को देखते हुए विभागीय तैयारियों और मौजूदा परिस्थितियों का जायजा लिया। सरकार की ओर से एक तरफ कानूनी विकल्पों पर काम किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ बिजली आपूर्ति सुचारू बनाए रखने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं।

HERC के फैसले से असहमत सरकार
अनिल विज ने कहा कि हरियाणा बिजली नियामक आयोग एक स्वायत्त संस्था है, जिसका गठन केंद्र सरकार के बिजली कानून के तहत किया गया है। आयोग के समक्ष कोई भी व्यक्ति या कंपनी निर्धारित प्रावधानों के अनुसार आवेदन कर सकती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने निजीकरण करने के उद्देश्य से न तो कोई आवेदन आमंत्रित किया था और न ही किसी कंपनी से बिजली वितरण का लाइसेंस लेने के लिए आवेदन मांगा था। केंद्रीय कानून के तहत निजी कंपनी को बिजली वितरण लाइसेंस के लिए आयोग में आवेदन करने का प्रावधान है। इसी प्रक्रिया के तहत आवेदन आने के बाद आयोग ने अपना फैसला सुनाया है।

विज ने कहा कि सरकार इस फैसले से सहमत नहीं है। विभाग ने आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए पूरी मेहनत की और मामले की पैरवी के लिए अच्छे वकील भी लगाए गए। सरकार ने आयोग के स्तर पर इस फैसले का विरोध किया, लेकिन अब आयोग का निर्णय सरकार के पक्ष में नहीं आया है। ऐसे में सरकार के पास अपीलीय न्यायाधिकरण में जाने का विकल्प है।

उन्होंने कहा कि सरकार एपीटीईएल में अपील दायर करेगी और फैसले पर रोक लगवाने का प्रयास भी करेगी। सरकार का मानना है कि इस मामले को कानूनी तरीके से आगे बढ़ाकर अपने पक्ष को मजबूती से रखा जाना चाहिए।
एपीटीईएल के बाद सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे

ऊर्जा मंत्री ने संकेत दिया कि राज्य सरकार इस मामले में कानूनी लड़ाई को बीच में नहीं छोड़ेगी। पहले विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अपील की जाएगी। वहां से अपेक्षित राहत नहीं मिलने की स्थिति में आगे उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर मामला सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया जाएगा।

विज के इस रुख से स्पष्ट है कि गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए पैरलल लाइसेंस दिए जाने का मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमा सकता है। सरकार के लिए एक ओर आयोग के फैसले को कानूनी चुनौती देना महत्वपूर्ण है, तो दूसरी ओर बिजली कर्मचारियों की नाराजगी और प्रस्तावित हड़ताल के कारण बिजली व्यवस्था बनाए रखना भी बड़ी चुनौती है।

कर्मचारियों से बातचीत के लिए सरकार तैयार
हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के कुछ पदाधिकारियों के ऊर्जा मंत्री से मिलने के संबंध में पूछे गए सवाल पर विज ने कहा कि कुछ यूनियन पदाधिकारी उनसे मिले थे और इस विषय पर बातचीत हुई है।

उन्होंने कहा कि कर्मचारियों से यह भी पूछा गया है कि यदि उनके पास कोई ऐसा विकल्प है, जिससे समस्या का समाधान निकल सकता है, तो वे उसे सरकार के सामने रखें। यदि कोई व्यवहारिक रास्ता सामने आता है, तो सरकार उस पर विचार करने के लिए तैयार है।
विज ने यह भी कहा कि पूरे मामले की जानकारी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को दे दी गई है। सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों और कानूनी लड़ाई की रणनीति से मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया है।

हड़ताल से पहले सरकार ने कसी कमर, अधिकारियों की छुट्टियां रद्द
बिजली कर्मचारियों ने 22 से 24 अक्तूबर तक तीन दिन की राज्यव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। ऐसे में सरकार ने बिजली आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने के लिए प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी हैं। सरकार ने बुधवार को आदेश जारी कर बिजली निगम के 25 अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दीं। संबंधित अधिकारियों को तत्काल अपने कार्यस्थल पर रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस कदम को प्रस्तावित हड़ताल के दौरान बिजली व्यवस्था बनाए रखने की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बुधवार दोपहर तीन बजे बिजली कर्मचारियों के प्रतिनिधियों को बैठक के लिए बुलाया था। हालांकि, हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने बैठक में शामिल होने में असमर्थता जताई।

मोर्चे ने एचवीपीएनएल के चीफ इंजीनियर को पत्र भेजकर बताया कि वार्ता के लिए बहुत कम समय दिया गया। इसके अलावा संगठन के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी अस्वस्थ हैं और अन्य पदाधिकारियों की पहले से निर्धारित व्यस्तताएं हैं। इन परिस्थितियों के कारण बैठक में शामिल नहीं होने का निर्णय लिया गया। अब देखना होगा कि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत का कोई नया रास्ता निकलता है या 22 अक्तूबर से प्रस्तावित हड़ताल के कारण बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ता है।

हुड्डा भी निजीकरण के विरोध में उतरे
इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को पैरलल लाइसेंस दिए जाने का विरोध किया है।
हुड्डा ने इसे घातक कदम बताते हुए आशंका जताई कि इससे भविष्य में कृषि उपभोक्ताओं को मिलने वाली बिजली और सब्सिडी पर असर पड़ सकता है। उनका आरोप है कि कृषि उपभोक्ताओं के लिए एग्री डिस्कॉम को अलग करने की प्रक्रिया के जरिए निजी कंपनी को किसानों के हिस्से की बिजली आपूर्ति से जोड़ने और धीरे-धीरे सब्सिडी समाप्त करने की जमीन तैयार की जा रही है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में किसानों को 10 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली दी जाती थी और इस व्यवस्था को समाप्त करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। इस तरह पैरलल लाइसेंस का मुद्दा अब केवल बिजली वितरण व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कानूनी, प्रशासनिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। 

एक तरफ सरकार आयोग के फैसले पर रोक लगवाने के लिए न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाने जा रही है, दूसरी तरफ कर्मचारी संगठन हड़ताल पर अड़े हैं और विपक्ष ने भी निजीकरण के मुद्दे पर सरकार तथा बिजली व्यवस्था से जुड़े फैसले पर सवाल उठाए हैं। आने वाले कुछ दिन इस पूरे विवाद की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे।

(पंजाब केसरी हरियाणा की खबरें अब क्लिक में Whatsapp एवं Telegram पर जुड़ने के लिए लाल रंग पर क्लिक करें)   


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Krishan Rana

Related News

static