हरियाणा रोडवेज का डिपो-डिपो प्रदर्शन: चालकों के लिए 54,100 सैलरी और 7200 बसों की मांग, थमे चक्के
punjabkesari.in Friday, Sep 04, 2026 - 06:30 PM (IST)
चंडीगढ़(चंद्र शेखर धरणी): हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों ने शुक्रवार को प्रदेशभर के डिपो में दो घंटे का प्रदर्शन कर परिवहन विभाग से जुड़ी विभिन्न मांगों को प्रमुखता से उठाया। हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर चंडीगढ़ डिपो में भी कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। कर्मचारी नेताओं ने सरकार से वार्ता के माध्यम से मांगों का समाधान करने और रोडवेज के बेड़े को मजबूत बनाने की दिशा में कदम उठाने की अपील की।
यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि रोडवेज यात्रियों को बेहतर और सुचारू परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ऐसे में सरकारी बसों की संख्या बढ़ाने, कर्मचारियों से जुड़ी लंबित समस्याओं का समाधान करने और विभाग को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने पर प्राथमिकता से विचार किया जाना चाहिए।
500 नई बसों को बेड़े में शामिल करने की मांग
डिपो प्रधान राजेश बेरला और सचिव रविंदर यादव ने बताया कि 16 जून को परिवहन मंत्री के साथ हुई बैठक में रोडवेज के बेड़े में 500 नई बसें शामिल करने की घोषणा की गई थी। बैठक में कर्मचारियों की विभिन्न मांगों पर भी चर्चा हुई थी और करीब 40 दिन में दोबारा बैठक कर आगे की कार्रवाई पर विचार करने का आश्वासन दिया गया था।
यूनियन नेताओं ने कहा कि कर्मचारियों को उम्मीद है कि वार्ता में सामने आए विषयों पर सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ते हुए रोडवेज के बेड़े को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने 362 रूटों पर 3648 निजी परमिट तथा निजी इलेक्ट्रिक बसों से संबंधित प्रस्तावों पर भी कर्मचारियों के सुझावों को ध्यान में रखने की मांग की।
इलेक्ट्रिक बसों के साथ सरकारी बसों की संख्या बढ़ाने का सुझाव
रोडवेज कर्मचारियों ने परिवहन व्यवस्था को व्यापक बनाने के लिए इलेक्ट्रिक बसों के साथ साधारण सरकारी बसों की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया। कर्मचारी नेताओं के अनुसार, एक इलेक्ट्रिक बस की जगह छह साधारण बसें संचालित करने से अधिक रूटों पर सार्वजनिक परिवहन सेवा का विस्तार किया जा सकता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि प्रत्येक डिपो में प्रस्तावित 50-50 इलेक्ट्रिक बसों के स्थान पर 300-300 साधारण सरकारी बसें शामिल की जाएं तो प्रदेश में रोडवेज का बेड़ा करीब 7200 से अधिक बसों तक पहुंच सकता है। यूनियन के अनुसार, इससे परिवहन सुविधा के विस्तार के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उनका दावा है कि एक बस के संचालन से औसतन छह लोगों को रोजगार मिलता है।
वेतन विसंगतियां दूर करने और पदोन्नति की मांग
कर्मचारी नेताओं ने चालक का वेतनमान 54,100 रुपये तथा परिचालक और लिपिक का वेतनमान 35,400 रुपये करने की मांग रखी। उन्होंने वेतन विसंगतियों के समाधान के लिए स्वतंत्र आयोग गठित करने का सुझाव भी दिया। इसके अलावा बकाया बोनस का भुगतान करने, खाली पदों पर पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ाने तथा विभाग में रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करने की मांग की गई। कर्मचारियों ने 2016 के चालकों सहित अन्य कच्चे कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़े मामलों में न्यायालय के निर्णयों के अनुरूप कार्रवाई करने की भी मांग रखी।
पुरानी पेंशन और अन्य लंबित सुविधाओं पर भी जोर
यूनियन ने अर्जित अवकाश की पुरानी व्यवस्था बहाल करने, लंबित रात्रि ठहराव और ओवरटाइम का भुगतान करने तथा पिछले वर्षों के बोनस का निपटारा करने की मांग की। कर्मचारी नेताओं ने न्यायालय के निर्णय के अनुरूप 2006 से पहले नियुक्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना में शामिल करने का मुद्दा भी उठाया।
इसके साथ ही प्रदेश के सभी गांवों में रात्रि ठहराव की सुविधा शुरू करने की मांग की गई, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को और बेहतर बनाया जा सके।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि वे अपनी मांगों को बातचीत और सकारात्मक संवाद के माध्यम से आगे बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने सरकार से रोडवेज कर्मचारियों से जुड़े सभी लंबित विषयों पर जल्द बैठक कर समाधान की दिशा में कदम उठाने की अपील की।