पंजाब से लगभग डेढ़ गुना ज्यादा हुई हरियाणा की जीडीपी, छोटे भाई ने बड़े भाई को कोसों पीछे छोड़ा
punjabkesari.in Wednesday, Feb 18, 2026 - 04:05 PM (IST)
चंडीगढ़: एक समय था जब पंजाब को भारत का 'अन्नदाता' और सबसे समृद्ध राज्य कहा जाता था, लेकिन 1966 में पंजाब से अलग होकर बना हरियाणा आज आर्थिक प्रगति के मामले में अपने "बड़े भाई" को काफी पीछे छोड़ चुका है। ताज़ा सरकारी आंकड़ों और आर्थिक सर्वेक्षण (2025-26) के अनुसार, हरियाणा की जीडीपी और विकास दर ने पंजाब के मुकाबले एक बड़ी बढ़त बना ली है।
हरियाणा की जीत के 'तीन स्तंभ'
गुरुग्राम का 'ग्लोबल' उदय
हरियाणा की कुल जीडीपी में अकेले गुरुग्राम का योगदान लगभग 20% है। IT, बैंकिंग और फॉर्च्यून 500 कंपनियों के हब के रूप में गुरुग्राम ने हरियाणा को सर्विस सेक्टर में वैश्विक पहचान दिलाई है।
औद्योगिक क्रांति
हरियाणा आज देश का ऑटोमोबाइल हब है। मारुति सुजुकी, होंडा और हीरो जैसे ब्रांड्स के साथ-साथ अब खरखौदा में मारुति का तीसरा बड़ा प्लांट राज्य की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को और बढ़ा रहा है।
दिल्ली-NCR का रणनीतिक लाभ
हरियाणा के 14 जिले NCR क्षेत्र में आते हैं, जिससे कनेक्टिविटी और निवेश (FDI) पंजाब की तुलना में कहीं अधिक सुलभ है।

पंजाब के लिए चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब की धीमी गति का मुख्य कारण कृषि पर अत्यधिक निर्भरता और औद्योगिक विविधीकरण (Diversification) की कमी है। जहाँ हरियाणा ने सर्विस सेक्टर (IT/BPO) की ओर रुख किया, वहीं पंजाब का एक बड़ा हिस्सा अभी भी गेहूं-धान के चक्र और भारी कर्ज (Debt Crisis) से जूझ रहा है। हरियाणा की सफलता का राज उसके सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का संतुलन है। पंजाब को अपनी अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए खेती से हटकर एग्रो-प्रोसेसिंग और नई तकनीक वाले उद्योगों पर ध्यान देना होगा।