हरियाणा के सरकारी स्कूलों में शिक्षक संकट पर HC सख्त, ACS से मांगा विस्तृत हलफनामा, जवाब न देने पर...
punjabkesari.in Thursday, Mar 12, 2026 - 11:19 AM (IST)
चंडीगढ़ : हरियाणा के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों और शिक्षकों के अनुपात को लेकर पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत तय मानकों के अनुसार विस्तृत आंकड़े पेश करने के निर्देश दिए हैं। चीफ जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पिछली सुनवाई में दिए गए आदेश के बावजूद जवाब दाखिल न किए जाने पर नाराजगी जताई और चेतावनी दी कि यदि अगली सुनवाई तक जवाब नहीं दिया गया तो अदालत सख्त आदेश जारी कर सकती है।
21 अप्रैल तक देना होगा हलफनामा
कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ए.सी.एस.) को निर्देश दिया है कि वे 21 अप्रैल तक विस्तृत हलफनामा दाखिल करें। इसमें सरकारी स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात और बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
सरकार के हलफनाने पर कोर्ट की आपत्ति
सुनवाई में सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया था कि फरीदाबाद, नूंह (मेवात) और पलवल को छोड़कर बाकी जिलों में छात्र-शिक्षक अनुपात के मानकों का पालन किया जा रहा है। हालांकि अदालत ने पाया कि ये आंकड़े प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के लिए शिक्षा के अधिकार अधिनियम में तय मानकों के अनुसार प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। इस पर कोर्ट ने सरकार को अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए।
निजी स्कूल जी.एस.टी. नोटिस के खिलाफ पहुंचे हाईकोर्ट, सरकार से जवाब तलब
हरियाणा के निजी स्कूलों से संबंधित जी.एस.टी. विवाद अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने सर्व हरियाणा प्राइवेट स्कूल ट्रस्ट द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। याचिका में ट्रस्ट ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों द्वारा 5 नवम्बर 2025 को जारी पत्र/नोटिफिकेशन के जरिए निजी स्कूलों की सेवाओं को जी.एस.टी. के दायरे में मानते हुए कार्रवाई की जा रही है, जबकि केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड के अधीन डायरैक्टोरेट जनरल ऑफ टैक्सपेयर सर्विसेज द्वारा पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि इस प्रकार की सेवाएं वस्तु एवं सेवा कर से मुक्त हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान याची की ओर से कोर्ट को बताया कि उक्त स्पष्टीकरण के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने उसे ध्यान में नहीं रखा और विवादित पत्र जारी कर दिया। जस्टिस कुलदीप तिवारी ने याची पक्ष की दलील सुनने के बाद हरियाणा सरकार व अन्य पक्ष को नोटिस जारी कर 30 मार्च तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। शिक्षक भर्ती की स्थिति भी बतानी होगी।
अदालत ने 9 अगस्त 2024 को जारी शिक्षक भर्ती विज्ञापन के तहत शुरू की गई भर्ती प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति भी हलफनामे में बताने को कहा है। दरअसल कोर्ट ने एक रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए इस मामले की सुनवाई शुरू की थी। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि हरियाणा के कुछ जिलों में 500 विद्यार्थियों पर केवल एक शिक्षक कार्यरत है। कोर्ट के संज्ञान के अनुसार अंबाला, फरीदाबाद, सिरसा और यमुनानगर जैसे जिले इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित बताए गए हैं।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से इन मुद्दों पर मांगी विस्तृत जानकारी
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए कितने विशेष शिक्षा शिक्षक तैनात हैं।
स्कूल भवन आर टी.ई. मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।
स्कूलों में शिक्षण-अधिगम उपकरणों की उपलब्धता और उनकी स्थिति।
लाइब्रेरी में पत्रिकाएं और कहानी की किताबें उपलब्ध हैं या नहीं।
खेल और शारीरिक गतिविधियों के लिए खेल सामग्री और उपकरणों की व्यवस्था।
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