फ्लैट पर कब्जा देने में देरी, HRERA ने खरीदारों को ब्याज देने के बिल्डर को दिए आदेश

punjabkesari.in Thursday, Sep 03, 2026 - 08:54 PM (IST)

गुड़गांव, (ब्यूरो): हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (हरेरा), गुरुग्राम ने अंसल हाउसिंग लिमिटेड की सहायक कंपनी आइडेंटिटी बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड को फ्लैट की पजेशन में देरी के लिए खरीदारों को ब्याज देने का आदेश दिया है। मामला सेक्टर-103 स्थित अंसल हाईलैंड पार्क परियोजना से जुड़ा है। ब्रिटेन में रहने वाले दंपती ने करीब पांच साल पहले इस परियोजना में फ्लैट बुक किया था, लेकिन उन्हें अभी तक पजेशन नहीं मिला है।

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हरेरा चेयरमैन अरुण कुमार ने यह आदेश अनिल कुमार भारद्वाज और ललिता भारद्वाज की शिकायत पर सुनाया। दंपती ने वर्ष 2016 में सेक्टर-88ए स्थित अंसल्स अमांत्रे परियोजना में फ्लैट बुक किया था। परियोजना समय पर पूरी नहीं होने के बाद वर्ष 2019 में उनकी ओर से जमा कराई गई 48 लाख रुपये से अधिक की राशि को अंसल हाईलैंड पार्क में नए फ्लैट में ट्रांसफर कर दिया गया। दिसंबर 2019 में नए खरीदार समझौते के तहत फ्लैट की पजेशन 30 नवंबर 2021 तक दी जानी थी। शिकायतकर्ताओं के अनुसार उन्होंने इसके बाद करीब 18 लाख रुपये और जमा कराए तथा डेवलपर की ओर से मांगी गई सभी किस्तों का भुगितान किया। इसके बावजूद परियोजना में निर्माण कार्य में कोई खास प्रगति नहीं हुई। अब तक न तो परियोजना को ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट मिला है और न ही उन्हें पजेशन का ऑफर दिया गया है।

 

दंपति ने दिसंबर 2025 में दिए गए कस्टमर लेजर में पांच लाख रुपये से अधिक की ब्याज राशि दिखाए जाने पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि बिना किसी पूर्व सूचना या डिमांड लेटर के यह राशि उनके खाते में जोड़ दी गई। हरेरा ने शिकायत में शामिल दो अन्य पक्षों को इस मामले में जिम्मेदार नहीं माना। एग्रो गोल्ड केमिकल्स इंडिया एलएलपी के पास परियोजना में जमीन का छोटा हिस्सा था और 2020 के समझौते के तहत उसके बदले 18 फ्लैट दिए गए थे। हरेरा ने माना कि कंपनी की परियोजना में प्रमोटर, डेवलपर या एजेंट के तौर पर कोई भूमिका नहीं थी। इसलिए उसे जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया।

 

इसी तरह अंसल हाउसिंग लिमिटेड को भी मामले में जिम्मेदार नहीं माना गया। हरेरा ने कहा कि खरीदार समझौता केवल आइडेंटिटी बिल्डटेक के साथ हुआ था और प्रमोटर के तौर पर देनदारी भी उसी कंपनी की है। डेवलपर की ओर से शिकायत को समय सीमा से बाहर बताए जाने और देरी से संबंधित मामलों को केवल समझौते की शर्तों के तहत तय करने का तर्क भी हरेरा ने खारिज कर दिया। अथॉरिटी ने कहा कि परियोजना को अभी तक ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट नहीं मिला है, इसलिए यह परियोजना अभी भी चल रही है और इस पर रेरा के प्रावधान लागू होते हैं। हरेरा ने खरीदारों को 10.80 प्रतिशत सालाना की दर से देरी का ब्याज देने का आदेश दिया है। यह ब्याज पजेशन की तय तारीख से लेकर वैध पजेशन ऑफर या वास्तविक पजेशन मिलने तक, जो भी पहले हो, देना होगा। अब तक जमा ब्याज की बकाया राशि 90 दिन के भीतर चुकानी होगी। इसके बाद हर महीने का ब्याज अगले महीने की 10 तारीख तक देना होगा।


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Content Editor

Pawan Kumar Sethi

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