IDFC Bank Scam: 590 करोड़ के घोटाले में आरोपियों ने उड़ाई विदेशी यात्राओं की मौज, लूटी गई रकम से खरीदीं लग्जरी गाड़ियां
punjabkesari.in Friday, May 01, 2026 - 09:12 AM (IST)
पंचकूला: हरियाणा के चर्चित 590 करोड़ रुपये के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में सीबीआई की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है भ्रष्टाचार की परतें उतनी ही चौंकाने वाली निकल रही हैं। रिमांड के दौरान हुए खुलासों ने साफ कर दिया है कि यह सिर्फ पैसों का गबन नहीं बल्कि सरकारी तंत्र और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से रचा एक मल्टी-लेयर्ड महाघोटाला है।
जांच में सामने आया कि आरोपी अधिकारियों राजेश सांगवान (मार्केटिंग बोर्ड) रणधीर सिंह (शिक्षा बोर्ड) और अमित दीवान (एचपीजीसीएल) ने निजी बैंकों में सरकारी खाते खुलवाने के बदले भारी-भरकम कमीशन डकारा।
यह रिश्वत सिर्फ नकदी तक सीमित नहीं थी, आरोपियों ने बदले में विदेशी यात्राएं और आलीशान दूर पैकेज का लुत्फ उठाया। जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे से खरीदी गई हाई-वैल्यू लग्जरी गाड़ियां और संपत्ति अब सीबीआई के रडार पर हैं। यह खुलासा 27 अप्रैल को सीबीआई द्वारा लिए गए रिमांड के दौरान हुआ है।
शेल कंपनियों में निवेश के नाम पर गबन की गई राशि को उन कागजी कंपनियों के नाम पर सोना खरीदने और पंजाब-हरियाणा में अचल संपत्तियां बनाने में इस्तेमाल किया गया। सीबीआई अब इन गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन और संपतियों के सेल डीड खंगाल रही है ताकि भ्रष्टाचार की कड़ियों की पूरी तरह जोड़ा जा सके। सीबीआई ने अदालत की संकेत दिया है कि इस खेल में अभी कई और बड़े बैंक अधिकारी फंस सकते हैं। एजेंसी ने आशंका जताई है कि अगर ये आरोपी बाहर आते हैं तो जांच की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं और अहम सबूतों को नष्ट कर सकते हैं। अभी बार मुख्य आरोपियों अंकुर शर्मा, राजेश सांगवान, रणधीर सिंह और अमित दौवान को न्यायिक हिरासत में भेजा है।
अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें मूंदीं
सीचीआई की रिमांड रिपोर्ट के अनुसार, भ्रष्टाचार का खेल इतना व्यवस्थित था कि सरकारी खातों से शेल कंपनियों को लगातार भुगतान हो रहे थे। ताज्जुब की बात यह है कि विभाग को इसके इंमेल और एसएमएस अलर्ट भी मिल रहे थे लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें मूंदे रखीं।