एक ही FIR में दोबारा गिरफ्तारी का आधार दोहराना जरूरी नहीं, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
punjabkesari.in Tuesday, Apr 21, 2026 - 04:03 PM (IST)
चंडीगढ़ : एक आपराधिक रिट याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि यदि एक ही एफ.आई.आर. में गिरफ्तारी के आधार पहले ही बताए जा चुके हैं तो दूसरी गिरफ्तारी पर आधारों को दोबारा बताने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। जस्टिस जसजीत सिंह बेदी एक याचिका की सुनवाई कर रहे थे जिसमें याचिकाकर्ताओं की फिर से गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने और उन्हें हिरासत से रिहा करने के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट जारी करने की मांग की गई थी।
यह मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत भिवानी के सिविल लाइंस पुलिस थाने में फरवरी 2026 में दर्ज एफ.आई.आर. से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं को घटना वाले दिन ही गिरफ्तार कर लिया गया था और मैजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया था, जहां गिरफ्तारी के कारणों को प्रस्तुत करने की आवश्यकता का पालन न करने के कारण गिरफ्तारी को अवैध घोषित कर रिहा कर दिया गया था। लेकिन अनुमति लेने के बाद उसी दिन दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया, जिसके बाद उन्हें फिर से मैजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि उनकी दोबारा गिरफ्तारी अवैध थी क्योंकि दूसरी बार हिरासत में लेने से पहले गिरफ्तारी के कारणों को नए सिरे से नहीं बताया गया था।
अदालत परिसर में चलाई थी गोलियां: हाईकोर्ट ने घटनाक्रम की जांच की और पाया कि प्रथम रिमांड आवेदन की सुनवाई के दौरान दोपहर 3:20 से 3:35 बजे के बीच याचिकाकर्ताओं को गिरफ्तारी के आधार बता दिए गए थे, जब पहली गिरफ्तारी को अवैध घोषित किया गया था। यह भी पाया कि दोबारा गिरफ्तारी लगभग शाम 6:20 बजे हुई और याचिकाकर्ताओं को रात 8:00 से 8:15 बजे के बीच मैजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया।
हाईकोर्ट ने दोहराया कि मैजिस्ट्रैट के समक्ष पेशी से कम से कम दो घंटे पहले गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में प्रस्तुत किए जाने चाहिए। वर्तमान मामले में यह शर्त पूरी हो गई थी। यह आवश्यक नहीं है कि गिरफ्तारी के कारणों को प्रत्येक गिरफ्तारी पर उसी एफ. आई. आर. में दोबारा बताया जाए। एक बार कारणों की जानकारी दे दिए जाने के बाद आरोपी को गिरफ्तारी का आधार समझने में सक्षम बनाने का उद्देश्य पूरा हो जाता है। हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आरोप गंभीर थे, जिनमें अदालत परिसर में गोलीबारी करना शामिल था और याचिकाकर्ताओं में से कुछ का आपराधिक इतिहास भी था। इसलिए फिर से गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने और हिरासत से रिहाई की मांग वाली रिट याचिका को खारिज कर दिया गया।
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