15 साल बाद मिला इंसाफ: ट्रेन हादसे में बेटे को खोने वाली बुजुर्ग मां के हक में हाई कोर्ट का फैसला... रेलवे को लगाई फटकार
punjabkesari.in Saturday, Sep 05, 2026 - 02:16 PM (IST)
चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए रेलवे दावा अधिकरण (Railway Claims Tribunal) के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें ट्रेन से गिरकर जान गंवाने वाले युवक की मां के मुआवजे के दावे को ठुकरा दिया गया था। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी यात्री की कथित लापरवाही रेलवे को अपनी वैधानिक जिम्मेदारी और मुआवजे के भुगतान से मुक्त नहीं करती है।
मामला 3 जुलाई 2011 का है, जब राकेश नाम का युवक ट्रेन से जींद से बहादुरगढ़ की यात्रा कर रहा था। ट्रेन में अत्यधिक भीड़ होने और अचानक लगे तेज झटके के कारण वह नीचे गिर गया और उसकी दर्दनाक मौत हो गई। राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) रोहतक ने उसी दिन इस संबंध में डीडीआर दर्ज की थी। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस हरकेश मनुजा की पीठ ने कहा कि मृतक के पास से बरामद हुआ रेल टिकट वैध था और उसे फर्जी नहीं माना जा सकता। अदालत ने माना कि बिना किसी प्रत्यक्षदर्शी के भी यह स्पष्ट है कि यह एक 'अवांछित घटना' थी।
हाई कोर्ट ने यह भी साफ किया कि पिता को दावेदार न बनाने के आधार पर मां का न्यायसंगत दावा खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि मां कानूनन पूरी तरह से आश्रित अभिभावक की श्रेणी में आती है।
9 प्रतिशत ब्याज के साथ 4 लाख मुआवजा देने का आदेश
अदालत ने रेलवे दावा अधिकरण के 19 सितंबर 2016 के पुराने फैसले को निरस्त कर दिया। हाई कोर्ट ने रेलवे को निर्देश दिया है कि मृतक की मां को 4 लाख रुपये की मूल मुआवजा राशि पर दावा दायर करने की तिथि से लेकर भुगतान होने तक 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ राशि का भुगतान तीन महीने के भीतर किया जाए।