Haryana के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत: अनधिकृत लोड पर सरचार्ज में ढील, लोड घटाने-बढ़ाने के नियम हुए सरल

punjabkesari.in Tuesday, Aug 04, 2026 - 08:32 PM (IST)

चंडीगढ़ (चन्द्रशेखर धरणी): हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने राज्य के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए बिजली आपूर्ति से जुड़े दो महत्वपूर्ण विनियमों में संशोधन किया है। इन संशोधनों के बाद अब स्वीकृत अनुबंधित मांग (कॉन्ट्रैक्ट डिमांड) से 10 प्रतिशत तक अधिक बिजली उपयोग करने पर कोई सरचार्ज नहीं लगेगा। 

पहले स्वीकृत लोड से 5 प्रतिशत से अधिक मांग होने पर कुल बिजली शुल्क पर सीधे 25 प्रतिशत सरचार्ज लगाया जाता था। इसके साथ ही औद्योगिक, वाणिज्यिक तथा अन्य उपभोक्ताओं के लिए स्वीकृत लोड घटाने और बाद में उसे पुनः बहाल कराने की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में काफी सरल और उपभोक्ता-अनुकूल बना दी गई है।
                                              
एचईआरसी द्वारा अधिसूचित बिजली आपूर्ति संहिता विनियम, 2014 (सातवां संशोधन) विनियम, 2026 के तहत अनधिकृत लोड पर लागू सरचार्ज व्यवस्था को अधिक तर्कसंगत बनाया गया है। अब नई व्यवस्था के अनुसार स्वीकृत लोड के 110 प्रतिशत तक उपयोग पर कोई सरचार्ज नहीं लगेगा। यदि मांग 110 से 115 प्रतिशत के बीच रहती है तो कुल बिजली शुल्क पर 20 प्रतिशत सरचार्ज लगेगा, जबकि 115 प्रतिशत से अधिक मांग होने पर पहले की तरह 25 प्रतिशत सरचार्ज लागू रहेगा।

आयोग का मानना है कि यह संशोधन विशेष रूप से उन औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए राहतकारी साबित होगा, जिनके यहां मौसमी, उत्पादन संबंधी अथवा अन्य अस्थायी कारणों से बिजली की मांग अचानक बढ़ जाती है। इससे उन्हें अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी और उत्पादन गतिविधियों में अधिक लचीलापन मिलेगा।

इसी के साथ आयोग ने ड्यूटी टू सप्लाई ऑफ इलेक्ट्रिसिटी विनियम, 2016 (चौथा संशोधन) विनियम, 2026 के माध्यम से लोड कम कराने और पुनर्बहाली के नियमों को भी आसान बना दिया है। अब यदि कोई उपभोक्ता बिना वोल्टेज स्तर बदले अपना लोड कम कराता है तो उसे केवल निर्धारित प्रोसेसिंग शुल्क देना होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 20,000 रुपये होगी। यदि वोल्टेज स्तर (एचटी से एलटी) में परिवर्तन होता है तो सेवा कनेक्शन शुल्क केवल संशोधित लोड के अनुसार ही देय होगा।

संशोधित नियमों के अनुसार, लोड कम कराने वाला उपभोक्ता तीन वर्ष के भीतर अपने मूल स्वीकृत लोड को बिना नया सेवा कनेक्शन शुल्क दिए पुनः बहाल करा सकेगा। हालांकि यह सुविधा कुछ शर्तों के अधीन होगी। लोड घटाने या पुनर्बहाली के बाद छह माह का लॉक-इन पीरियड रहेगा तथा तीन वर्ष में केवल एक बार लोड कम कराने और एक बार पुनर्बहाली की अनुमति होगी। पुनर्बहाली वितरण निगम द्वारा उपलब्ध प्रणाली क्षमता के आकलन के बाद ही की जाएगी तथा आवश्यक मीटर परिवर्तन का खर्च उपभोक्ता को स्वयं वहन करना होगा। जिन 

उपभोक्ताओं पर बिजली बिल बकाया है, जिनके मामले न्यायालय या अन्य सक्षम प्राधिकरण के समक्ष लंबित हैं अथवा जिन पर बिजली चोरी या अनधिकृत उपयोग के मामले विचाराधीन हैं, वे इस सुविधा का लाभ नहीं ले सकेंगे।
हरियाणा सरकार के राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ ही ये संशोधन प्रभावी हो गए हैं।

आयोग के इन फैसलों से राज्य के औद्योगिक, वाणिज्यिक तथा अन्य बिजली उपभोक्ताओं को अधिक परिचालन सुविधा, कम वित्तीय जोखिम और अधिक संतुलित, पारदर्शी एवं उपभोक्ता-हितैषी नियामकीय व्यवस्था का लाभ मिलने की उम्मीद है।

(पंजाब केसरी हरियाणा की खबरें अब क्लिक में Whatsapp एवं Telegram पर जुड़ने के लिए लाल रंग पर क्लिक करें)               


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Krishan Rana

Related News

static