मनोहर की ‘हरिहर’ सोच ने अनाथ युवाओं की ऐसे बदली ‘तकदीर’!
punjabkesari.in Wednesday, Jun 03, 2026 - 11:52 AM (IST)
चंडीगढ़ (संजय अरोड़ा) : केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर अपनी सादगी, अनुशासित कार्यशैली और संवेदनशील फैसलों के लिए जाने जाते हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने अनेक ऐसी योजनाएं लागू कीं, जिनके बारे में पहले शायद ही किसी ने कल्पना की हो। उनकी योजनाओं की विशेषता केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाएं भी रही हैं। ऐसी ही एक अनूठी और संवेदनशील योजना है ‘हरिहर योजना’, जिसने अनाथ बच्चों और युवाओं की जिंदगी को नई दिशा देने का काम किया। ऐसे में कहा जा सकता है कि प्रयोगधर्मी मुख्यमंत्री के रूप में देशभर में अपनी अलग पहचान बनाने वाले मनोहर लाल खट्टर की ‘हरिहर’ सोच ने अनाथ युवाओं की तकदीर ही बदल दी।
यह योजना केवल सरकारी दस्तावेजों तक सीमित नहीं रही, बल्कि हजारों ऐसे युवाओं के जीवन में उम्मीद की नई रोशनी बनकर उभरी, जिनका न कोई अपना था और न ही भविष्य का कोई सहारा। बालगृहों में रहने वाले ऐसे बच्चे, जिन्हें 18 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद व्यवस्था के अनुसार बालगृह छोडऩा पड़ता था, वे अचानक खुद को जिंदगी के कठोर संघर्ष के बीच अकेला पाते थे। न पहचान, न परिवार और न ही रहने का स्थायी ठिकाना। ऐसे युवाओं की पीड़ा को समझते हुए मनोहर लाल खट्टर ने वर्ष 2019 में हरिहर योजना की शुरुआत की थी। खास बात यह है कि अब करीब सात वर्षों के बाद जहां मनोहर लाल खट्टर ने स्वयं अपनी इस योजना का खुलासा किया है तो इसके पीछे की भावुक कहानी को एक वीडियो के रूप में प्रदेश भाजपा द्वारा अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर मनोहर लाल खट्टर को राजनीति का संत बताते हुए वायरल किया जा रहा है।
एक बेसहारा युवक के आंसुओं से ऐसे उपजी थी योजना
अहम बात यह है कि इस योजना के पीछे भी एक भावुक लेकिन बेहद प्रेरक कहानी जुड़ी हुई है। स्वयं केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान इस घटना का जिक्र करते हुए बताया कि 14 अगस्त 2019 की शाम वे मुख्यमंत्री के रूप में स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लेने के लिए एक जिले में पहुंचे हुए थे। अगले दिन उन्हें वहां मुख्य समारोह में शामिल होना था। वे विश्राम गृह में बैठे हुए थे कि तभी भाजपा का एक कार्यकर्ता और उनका पी.एस.ओ. एक युवक को लेकर वहां पहुंचे। युवक काफी मायूस था और लगातार रो रहा था। मनोहर लाल ने बताया कि उन्होंने पहले युवक से पूछा कि आखिर क्या बात है, लेकिन वह कुछ बोल नहीं पाया। इसके बाद उन्होंने अपने पी.एस.ओ. और भाजपा कार्यकत्र्ता को बाहर भेज दिया और युवक से अकेले में बातचीत की। काफी देर बाद युवक ने अपनी जिंदगी की दर्दभरी कहानी सुनाई। उसने बताया कि वह 24 वर्ष का है और अनाथ होने की वजह से 18 वर्ष की उम्र तक बालगृह में रहा।
नियमानुसार 18 वर्ष का होने के बाद उसे बालगृह छोडऩा पड़ा। उसके बाद उसका कोई ठिकाना नहीं रहा। कभी रेलवे स्टेशन पर रात गुजारी, कभी किसी अस्थायी जगह पर शरण ली। उसके पास न परिवार था, न पहचान और न ही भविष्य की कोई उम्मीद थी। उस युवक की बात सुनकर मनोहर लाल भावुक हो गए। उन्होंने तुरंत उपायुक्त को फोन कर निर्देश दिए कि जब तक अगला आदेश न हो, तब तक युवक के रहने और देखभाल की व्यवस्था विश्राम गृह में ही की जाए। कुछ दिन बाद जब उपायुक्त ने फिर युवक के भविष्य को लेकर चर्चा की तो मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया। इसी मंथन से ‘हरिहर योजना’ का जन्म हुआ। इस योजना के तहत 18 वर्ष की उम्र पूरी कर बालगृह छोडऩे वाले अनाथ युवाओं को 25 वर्ष की उम्र तक सरकार की ओर से संरक्षण देने का प्रावधान किया गया। योजना का उद्देश्य केवल आश्रय देना नहीं बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना था। यदि कोई युवा पढ़ाई जारी रखना चाहता है तो उसकी शिक्षा का प्रबंध किया जाता है। यदि वह रोजगार करना चाहता है तो उसके लिए भी व्यवस्था की जाती है। इतना ही नहीं, योजना के तहत पात्र युवाओं को एक्सग्रेशिया के आधार पर सरकारी नौकरी देने का भी प्रावधान किया गया।
मनोहर लाल ने युवा की करवाई शादी और दी सरकारी नौकरी
खास बात यह है कि यह योजना उस दौर में चर्चा का विषय बनी जब समाज में ऐसे अनाथ युवाओं की समस्याओं पर बहुत कम ध्यान दिया जाता था। हरिहर योजना ने यह संदेश दिया कि सरकार केवल प्रशासनिक इकाई नहीं बल्कि संवेदनशील अभिभावक की भूमिका भी निभा सकती है। मनोहर लाल खट्टर ने केवल योजना बनाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की बल्कि जिस युवक की कहानी से यह योजना शुरू हुई, उसके जीवन को भी संवारने का काम किया। दरअसल योजना में शुरुआत में 25 वर्ष तक के युवाओं को सरकारी नौकरी देने का नियम था, जबकि वह युवक आयु सीमा के कारण लाभ से वंचित रह गया। जब यह बात मनोहर लाल के संज्ञान में आई तो उन्होंने योजना में संशोधन करवाया।
इसके बाद न केवल उस युवक को सरकारी नौकरी दिलवाई गई बल्कि उसकी शादी भी करवाई गई। यह प्रेरक कहानी मनोहर लाल खट्टर की संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाती है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने प्रशासनिक सुधारों के साथ-साथ समाज के कमजोर वर्गों के लिए कई दूरगामी योजनाएं लागू कीं। हरिहर योजना आज हरियाणा में एक मिसाल बन चुकी है। बालगृहों में रहने वाले अनेक युवा इस योजना के माध्यम से शिक्षा, रोजगार और सम्मानजनक जीवन प्राप्त कर चुके हैं। जिन युवाओं के सामने कभी भविष्य अंधकारमय नजर आता था, वे आज आत्मविश्वास के साथ समाज में अपनी पहचान बना रहे हैं।
सामाजिक बदलाव के लिए लागू की कई योजनाएं
खास बात यह है कि मनोहर लाल खट्टर के कार्यकाल में ऐसी कई योजनाएं लागू की गईं, जिनका उद्देश्य केवल विकास नहीं बल्कि सामाजिक बदलाव भी था। उन्होंने बिना सिफारिश और रिश्वत के सरकारी नौकरियां देने की व्यवस्था को मजबूत किया। पारदर्शी भर्ती प्रणाली ने युवाओं में विश्वास पैदा किया। इसी प्रकार भूजल संरक्षण के लिए ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना शुरू की गई, जिसके तहत किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रेरित किया गया। पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष प्रयास किए गए। किसानों को अनुदान देकर रासायनिक खेती से बाहर निकलने और प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इन योजनाओं का उद्देश्य केवल सरकारी आंकड़े बढ़ाना नहीं बल्कि आने वाली पीढिय़ों के लिए सुरक्षित और संतुलित भविष्य तैयार करना था। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि मनोहर लाल खट्टर की राजनीति की सबसे बड़ी विशेषता यही रही कि उन्होंने संवेदनशील मुद्दों को गंभीरता से लिया। हरिहर योजना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसने यह साबित किया कि एक संवेदनशील निर्णय किसी की पूरी जिंदगी बदल सकता है।