मानसून सत्र : हंगामे की भेंट चढ़ी पहले दिन की कार्यवाही, वीडियो पर घमासान और ‘गुंडा’ शब्द पर तीखी बहस; हुड्डा-स्पीकर भिड़े

punjabkesari.in Thursday, Aug 27, 2026 - 05:41 PM (IST)

चंडीगढ़ (चंद्र शेखर धरणी) : हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई। विधानसभा गेट पर कांग्रेस विधायकों के साथ धक्का-मुक्की से शुरू हुआ विवाद सदन के भीतर वीडियो फुटेज, स्पीकर की निष्पक्षता और 1984 के सिख दंगों तक पहुंच गया। कांग्रेस विधायकों की लगातार नारेबाजी और हंगामे पर स्पीकर एक्शन लेते हुए 8 विधायकों को नेम कर दिया। इसके विरोध में कांग्रेस ने वाकआउट किया। 

हरियाणा विधानसभा के मानूसन सत्र के पहले दिन स्पीकर हरविंद्र कल्याण और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बीच तीखी नोक-झोक हुई। नेता प्रतिपक्ष ने धक्का-मुक्का का मुद्दा उठाया तो स्पीकर ने विपक्ष को चैंबर में वीडियो फुटेज देखने का न्योता दिया, लेकिन कांग्रेस की ओर से कोई सदस्य वहां नहीं पहुंचा। मंत्री अनिल विज ने वीडियो सदन में चलाने की मांग की, जिसे स्पीकर ने नियमों का हवाला देते हुए स्वीकार नहीं किया। इसके बाद कांग्रेस विधायक वेल में डटे रहे। 

कांग्रेस के आठ विधायक नेम

कांग्रेस के आठ विधायकों को नेम किए जाने का डॉ. रघुबीर सिंह कादियान ने विरोध किया। हुड्डा ने भी उनका समर्थन किया और कांग्रेस ने विधायकों को बाहर किए जाने के फैसले पर सवाल उठाए। इस दौरान कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री से माफी मांगने की मांग भी उठाई गई। हंगामा उस समय भी जारी रहा जब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इनेलो विधायकों आदित्य देवीलाल और अर्जुन चौटाला की ओर से कानून व्यवस्था से संबंधित ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर जवाब दे रहे थे। मुख्यमंत्री ने विपक्ष के हंगामे के बीच अपना जवाब जारी रखा और कांग्रेस पर लगातार पलटवार किया। अंततः कांग्रेस विधायकों ने अपना विरोध दर्ज करवाते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।

हंगामे के दौरान स्पीकर और हुड्डा के बीच तीखी बहस हुई। उन्होंने कहा कि यदि धक्का-मुक्की के आदेश दिए गए थे तो स्पष्ट किया जाए। हुड्डा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने सदन में ‘गुंडा’ शब्द का इस्तेमाल किया है। इस पर स्पीकर ने कहा कि उन्होंने कार्यवाही देख ली है और मुख्यमंत्री ने ऐसा कोई शब्द नहीं कहा। स्पीकर ने चेयर पर की गई टिप्पणियों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वह इससे आहत हैं और पिछले दो वर्षों से हाउस के कस्टोडियन के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उन्होंने विपक्ष से दोबारा अपने चैंबर में आकर वीडियो देखने की अपील की और कहा कि सदन में वीडियो चलाने के भी नियम हैं। लेकिन कांग्रेस विधायक मानने को तैयार नहीं हुए। विधायक आफताब अहमद को भी स्पीकर ने चेतावनी दी। इसके बाद सदन में मार्शलों ने मोर्चा संभाल लिया। पहले विधायकों से बाहर जाने का आग्रह किया गया, लेकिन जब वे नारेबाजी करते हुए वेल में डटे रहे तो मार्शलों ने उन्हें पकड़कर बाहर निकालना शुरू कर दिया। सदन में ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे भी गूंजे। मानसून सत्र के पहले दिन का घटनाक्रम इस बात का संकेत दे गया कि आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो सकता है।

तख्तियों ने बढ़ाया टकराव

कांग्रेस विधायक हाईकोर्ट चौक से विधानसभा गेट तक नारेबाजी करते हुए पहुंचे। उनके हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर एचकेआरएन, कानून व्यवस्था, पेपर लीक और चंदा चोरी जैसे मुद्दे लिखे थे। विधानसभा के मुख्य गेट पर सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोक दिया। नियमों के तहत विधानसभा परिसर में तख्तियां लेकर प्रवेश की अनुमति नहीं है। इसी दौरान कांग्रेस विधायकों और सुरक्षा कर्मियों के बीच कहासुनी और धक्का-मुक्की हुई। इस दौरान बादली विधायक कुलदीप वत्स के हाथों में हल्की चोट लगने की बात सामने आई। हुड्डा की शर्ट की जेब भी फट गई। बाद में कांग्रेस विधायकों ने तख्तियां छोड़ दीं और नारेबाजी करते हुए विधानसभा परिसर में प्रवेश किया। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया कि विरोध दर्ज कराने के नाम पर विधायक तख्तियों और बैनरों के साथ विधानसभा परिसर में प्रवेश नहीं कर सकते।  

हुड्डा से जुड़े वीडियो पर हुआ हंगामा 

विधानसभा में विवाद के बीच भूपेंद्र सिंह हुड्डा से जुड़े दो वीडियो भी सामने आए। एक वीडियो में पुलिसकर्मी द्वारा हुड्डा के सिर पर हाथ मारते हुए दिखाई देने का दावा किया गया। वहीं दूसरे वीडियो में विधानसभा के बाहर प्रदर्शन के दौरान हुड्डा एक पुलिसकर्मी को कोहनी मारते हुए नजर आते हैं, जबकि पुलिसकर्मी उन्हें रोकने का प्रयास करता दिखता है। इन वीडियो के सामने आने के बाद विधानसभा में आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए। विपक्ष ने पुलिस के व्यवहार को मुद्दा बनाया तो सत्ता पक्ष की ओर से विपक्ष के आचरण पर सवाल खड़े किए गए।

सिख दंगों का मुद्दा भी सदन में गूंजा

हंगामे के बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कांग्रेस पर 1984 के सिख दंगों को लेकर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश की जनता ने 55 साल तक अन्याय सहा है और कांग्रेस झूठ फैलाने का काम करती रही है। मुख्यमंत्री ने 1984 के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों को टायर गले में डालकर जलाया गया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को अपने केश से प्रेम था, उन्हें भय के कारण केश कटवाने पड़े। इसी दौरान जरनैल सिंह से संबंधित सिख दंगों का पोस्टर दिखाए जाने पर भी विवाद हुआ। हुड्डा ने कहा कि सदन में इस तरह का पोस्टर नहीं दिखाया जा सकता और नियम हैं। उन्होंने स्पीकर की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि स्पीकर सरकार को बचाने का काम कर रहे हैं।
 
 


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Harman

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