राष्ट्रीय अंगदान दिवस: NOTTO ने लॉन्च किया एक साल का महाअभियान, जरूरतमंदों को मिलेगा नया जीवन

punjabkesari.in Tuesday, Aug 18, 2026 - 07:52 PM (IST)

 

चंडीगढ़(  चन्द्र शेखर धरणी): देश वासियों में अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने तथा इसका लाभ अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों को मिले, इसी उद्देश्य के साथ भारत सरकार ने इस साल भारतीय अंगदान दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन  द्वारा "अंगदान करो, जुग जुग जियो" नामक देशव्यापी अभियान शुरू किया है। यह अभियान एक साल तक चलेगा।

शुरू किया गया एक साल तक चलने वाला देशव्यापी जागरूकता अभियान है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को अंगदान के महत्व के बारे में शिक्षित करना और समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना। परिवारों के बीच अंगदान को लेकर खुली और सार्थक बातचीत को बढ़ावा देना। अधिक से अधिक लोगों को अंगदान की प्रतिज्ञा लेने तथा डिजिटल पंजीकरण के लिए प्रेरित करना। देश भर में अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण की व्यवस्था और सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना है।

अंगदान वह चिकित्सा प्रक्रिया है जिसमें किसी जीवित या मृत व्यक्ति के शरीर से स्वस्थ अंगों या ऊतकों को शल्य चिकित्सा द्वारा निकालकर किसी ऐसे जरूरतमंद व्यक्ति के शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है, जिसके अंग फेल हो चुके हों। यह दो तरह से होता है। जीवित अंगदान में कोई स्वस्थ व्यक्ति अपने जीवनकाल में ही अपनी एक किडनी या लीवर का एक हिस्सा किसी जरूरतमंद (आमतौर पर परिवार के सदस्य) को दान करता है।

मृत्यु के बाद अंगदान में व्यक्ति की मृत्यु (विशेषकर ब्रेन डेथ की स्थिति) के बाद उसके सुरक्षित और स्वस्थ अंगों (जैसे हृदय, यकृत, गुर्दे, फेफड़े आदि) को दान किया जाता है। इससे एक व्यक्ति के अंगों से कई लोगों को जीवन दान मिलता है। इस क्षेत्र में निरंतर जागरूकता के चलते वर्ष 2023 में राष्ट्रीय डिजिटल प्रतिज्ञा पोर्टल के शुभारंभ के बाद से देश में आधार-सत्यापित अंगदान प्रतिज्ञाओं का आंकड़ा पांच लाख से अधिक हो चुका है। वर्ष 2013 में जहां अंग प्रत्यारोपण की संख्या 4,990 थी वहीं 2025 में यह बढक़र 20,000 से अधिक हो गई है। मृतक दाताओं से अंग प्रत्यारोपण की संख्या वर्ष 2013 में 837 से बढक़र 2025 में 3,500 से अधिक हो गई।

हरियाणा के संबंध में अगर बात की जाए तो यहां भी लोगों में अंगदान के प्रति धीरे-धीरे जागरूकता बढ़ रही है। हरियाणा सरकार ने जनवरी 2020 में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लोगों को प्रेरित करने के लिए मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी कार्यक्रम के तहत 'अंगदान योजना' की शुरुआत की थी। इस योजना को शुरुआती चरण में हरियाणा के चार जिलों—गुरुग्राम, पंचकूला, रोहतक और फरीदाबाद में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया था। सरकार ने रोहतक पीजीआई को मुख्य नोडल सेंटर बनाकर राज्य में अंगदान को बढ़ावा देने की पहल की है। पीजीआई रोहतक में ब्रेन डेड लोगों के परिजनों की सहमित से अंग प्रत्यारोपण करके कई लोगों को नया जीवन दिया जा चुका है।

इस अभियान के लिए ओरगन इंडिया को एडवोकेसी पार्टनर बनाया गया था, जिसने स्कूलों, बैनर, ब्रोशर और लघु फिल्मों के जरिए जागरूकता फैलाई।  इस प्रकार की पहलों के कारण अब हरियाणा के 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के युवा अंगदान के पंजीकरण में सबसे आगे हैं। इस संबंध में जगह-जगह सामाजिक संस्थाओं की मदद से जागरूकता सेमिनार किए जा रहे हैं। नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से लोगों में इसके प्रति फैली भ्रांतियों को दूर किया जा रहा है। जिन जिलों में यह पायलट प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है वहां डेस्क की स्थापना करके अस्पतालों में आने वाले लोगों को अंगदान की जानकारी दी जा रही है।

हरियाणा में अंगदान को लेकर लोगों की सोच में तेजी से बदलाव आ रहा है। प्रदेश में कुल 7940 लोगों ने अंगदान का संकल्प लिया है। जिलों के बीच आंकड़ों में बड़ा अंतर भी सामने आया है, जो जागरूकता के असमान स्तर को दर्शाता है। प्रदेश में जींद जिला 1076 पंजीकरण के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद गुरुग्राम के 973 पंजीकरण और फरीदाबाद के 791 पंजीकरण का नंबर आता है।

सबसे निचले पायदान पर नूंह के 48, चरखी दादरी के 21 और पलवल के 21 पंजीकरण हैं, जहां जागरूकता अभियान की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निचले पायदान पर खड़े जिलों में जागरूकता बढ़ाई जाए तो हरियाणा इस क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है। फिलहाल आंकड़े यह जरूर संकेत दे रहे हैं कि प्रदेश में अंगदान को लेकर डर से संकल्प की ओर यात्रा शुरू हो चुकी है, लेकिन इसे जन आंदोलन बनाने के लिए अभी और प्रयास जरूरी हैं। वर्ष 2024 में जहां केवल 2 अंगदान हुए थे, वहीं 2026 में यह आंकड़ा 4 से अधिक हो चुका है। साथ ही अब तक करीब 35 किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। इस बदलाव के पीछे स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (सोटो) की अहम भूमिका रही है।

अंगदान में जागरूकता की कमी सबसे बड़ी बाधा बन रही है। कई भ्रांतिया होने के कारण लोग अंगदान से हिचकते हैं, जिसका नतीजा है कि कई मरीज अंगों के इंतजार में ही दम तोड़ देते हैं। एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा में 1984 मरीज अंगदान के इंतजार में हैं। इसमें 1042 किडनी ट्रांसप्लांट, 879 लिवर, 42 हार्ट, 20 लंग्स और एक मरीज पैंक्रियाज के इंतजार में हैं। हरियाणा में 2020 से 2024 के बीच करीब 215 ऐसे मरीज हैं, जिनकी मृत्यु अंगदान के इंतजार में हो गई थी। हरियाणा में चार साल में 1765 कुल ट्रांसप्लांट हुए। इनमें 1254 किडनी और 511 लिवर के ट्रांसप्लांट हुए हैं। इसके अलावा 3727 कॉर्निया ट्रांसप्लांट भी हुए हैं।

अंगदान को लेकर फैली भ्रांतियां एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। कोई भी प्रमुख धर्म अंगदान का निषेध नहीं करता; बल्कि सभी धर्म करुणा, सेवा और जीवन बचाने के मूल्यों को बढ़ावा देते हैं, जिससे अंगदान एक महान मानवीय कार्य बन जाता है। इसलिए इस अभियान को तेजी से गति देने की जरूरत है।


 

 

 

 

 

 

 


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Content Writer

Isha

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