एनएसजी मानेसर में भारत के पहले महिला कमांडो कन्वर्जन कोर्स हुआ शुरू
punjabkesari.in Tuesday, Aug 25, 2026 - 09:12 PM (IST)
गुड़गांव, (ब्यूरो): राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के हरियाणा स्थित मानेसर प्रशिक्षण अकादमी में राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की चुनिंदा महिला कर्मियों के लिए देश का पहला महिला कमांडो कन्वर्जन कोर्स औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। शी हू डेयर्स, लीड्स (जो साहस करती है, वही नेतृत्व करती है) के ध्येय वाक्य के साथ शुरू की गई यह अभूतपूर्व पहल देश की सुरक्षा व्यवस्था में नारी शक्ति की बढ़ती और निर्णायक भागीदारी का प्रतीक बन गई है। यह कोर्स केवल एक साधारण प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि देश की अग्रिम सुरक्षा पंक्ति में महिलाओं को कमान सौंपने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत कदम है।
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यह विशेष कोर्स कुल 12 हफ्तों का एक बेहद कठिन, अनुशासित और थका देने वाला प्रशिक्षण कार्यक्रम है। इसका मूल उद्देश्य केवल शारीरिक सहनशीलता की जांच करना नहीं, बल्कि हर लिहाज से एक अत्याधुनिक, तकनीकी रूप से दक्ष और मानसिक रूप से मजबूत कमांडो तैयार करना है जो किसी भी आपातकालीन स्थिति में त्वरित कार्रवाई कर सके। कोर्स के दौरान महिला कमांडो को अत्यंत कठिन और विषम परिस्थितियों में काम करने के लिए उच्च स्तरीय फिटनेस व मानसिक सहनशक्ति के लिए तैयार करना। इसके अलावा अत्याधुनिक हथियारों का त्वरित संचालन और जटिल परिस्थितियों में सटीक निशाना लगाने का अभ्यास, आतंकवाद-रोधी अभियानों के दौरान इमारतों, वाहनों या संदिग्ध ठिकानों में त्वरित और सटीक कार्रवाई, हाई-जैक या कॉम्प्लेक्स बंधक स्थितियों से आम नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने की जटिल सैन्य तकनीकें शामिल है।
इस कोर्स की सबसे खास बात यह है कि यह केवल एनएसजी तक सीमित नहीं है। इसमें विभिन्न राज्यों के पुलिस बलों और सीएपीएफ (जैसे सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ आदि) की महिला कर्मियों को शामिल किया गया है। इस प्रशिक्षण से अलग-अलग बलों के बीच एक समान पेशेवर मानक स्थापित होंगे, जिससे किसी भी बड़े संकट के समय विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां आपस में सहजता से समन्वय बनाकर काम कर सकेंगी। 12 हफ्तों का कठिन प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये महिला कर्मी जब अपने मूल बलों और राज्य कैडर में लौटेंगी, तो वे वहां अन्य कर्मियों को प्रशिक्षित करेंगी। इससे पूरे देश के राज्य स्तरीय सुरक्षा ढांचे में आतंकवाद-रोधी क्षमता का विस्तार होगा। यह पहल केवल सुरक्षा बलों में महिलाओं की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें वास्तविक ऑपरेशन्ल कैपेबिलिटी देकर देश की सबसे कठिन सुरक्षा भूमिकाओं और चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार किया जा रहा है।