''उसके लिए देश सबसे पहले था'', पहलगाम हमले में शहीद विनय नरवाल को याद कर भावुक हुई बहन सृष्टि

punjabkesari.in Wednesday, Apr 22, 2026 - 04:52 PM (IST)

करनाल : पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले को एक साल पूरा हो गया है, लेकिन इस दर्दनाक घटना की यादें आज भी परिवार के दिलों में ताजा हैं। उस दिन की हर बात आज भी घरवालों को बेचैन कर देती है। एक फोन कॉल के जरिए मिली दुखद खबर ने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी थी। समय बीतने के बावजूद परिवार आज भी उस सदमे से उबरने की कोशिश कर रहा है और अपने बेटे की यादों के सहारे जीवन जी रहा है।

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हर दिन याद आती है वो आखिरी बातचीत 

शहीद लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की बहन सृष्टि नरवाल ने बताया कि सुबह से ही उस दिन की बातें याद आ रही थीं, जब दादा और पिता ने विनय से फोन पर आखिरी बार बात की थी। उसके कुछ समय बाद ही फोन पर यह दुखद खबर मिली कि आतंकी हमले में विनय की जान चली गई। सृष्टि ने कहा कि यह घटना परिवार के लिए एक ऐसा घाव बन गई है, जो समय के साथ भी नहीं भर पा रहा।

माता-पिता को संभालना सबसे मुश्किल

सृष्टि नरवाल ने कहा कि अपने माता-पिता को इस दर्द से गुजरते हुए देखना एक बेटी के लिए बेहद कठिन होता है। उन्होंने बताया कि वह चाहकर भी कुछ नहीं कर पाईं, लेकिन अब उनकी कोशिश रहती है कि उनके माता-पिता स्वस्थ रहें और अपने खान-पान का ध्यान रखें। वह परिवार के साथ अच्छी यादें साझा करती हैं, ताकि विनय हमेशा दिलों में जिंदा रहे।

देश सेवा का था बचपन से सपना 

उन्होंने कहा कि विनय के लिए देश सबसे पहले था। बचपन से ही उसका सपना सेना में जाकर देश की सेवा करना था। सृष्टि ने कहा कि हम सभी को भी देश के लिए कुछ करने और एक अच्छा नागरिक बनने की सोच रखनी चाहिए। सृष्टि नरवाल ने सरकार से अपील की है कि किसी मेडिकल या एजुकेशन संस्थान का नाम विनय नरवाल के नाम पर रखा जाए, जिससे उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि मिल सके। उन्होंने बताया कि 1 मई को विनय के जन्मदिन पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। सृष्टि ने कहा कि आतंकवाद एक ऐसी बीमारी है, जो पूरे विश्व को नुकसान पहुंचा रही है। इसे जड़ से खत्म करना बेहद जरूरी है, ताकि कोई और परिवार इस तरह का दर्द न झेले।

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Content Writer

Manisha rana

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