कुरुक्षेत्र में आज से धान की खरीद शुरु, दूसरे जिले में फसल बेचने का विकल्प भी बंद; किसानों की बढ़ी परेशानी

punjabkesari.in Tuesday, Sep 29, 2026 - 02:35 PM (IST)

कुरुक्षेत्र (कपिल शर्मा) : कुरुक्षेत्र में धान की सरकारी खरीद शुरू होने के साथ ही किसानों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है। दूसरे जिले की मंडियों में धान बेचने पर रोक के कारण किसानों के पास अपनी फसल बेचने के विकल्प सीमित हो गए हैं। वहीं पिछले दिनों से हो रही बारिश के कारण मंडियों में खुले में पड़ा धान भी प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने सरकार से दूसरे जिलों में फसल बेचने पर लगी पाबंदी को तुरंत हटाने की मांग की है।

चढ़ूनी ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर अधिकारियों से बातचीत हुई है और उन्हें व्यवस्था जल्द ठीक करने का आश्वासन दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो किसान दोबारा अपनी समस्या प्रशासन के सामने रखेंगे। उनके अनुसार धान की खरीद पहले ही देरी से शुरू हुई है, ऐसे में मंडियों में फसल लेकर पहुंचे किसानों को दूसरे जिले की मंडियों में भी फसल बेचने का विकल्प मिलना चाहिए।

बारिश से बढ़ी किसानों की चिंता

जिले में धान की सरकारी खरीद शुरू हो चुकी है। बताया गया है कि 26 सितंबर से 17 प्रतिशत नमी वाले धान के गेट पास काटने शुरू किए गए थे। अब बारिश के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। बारिश से धान में नमी बढ़ने की आशंका है, जबकि निर्धारित नमी की शर्त पूरी नहीं होने पर किसानों को फसल बेचने में परेशानी हो सकती है।

चढ़ूनी ने कहा कि सरकार को मंडियों में जमा धान की स्थिति को देखते हुए पहले से इंतजाम करने चाहिए थे। मंडियों में बड़ी मात्रा में धान पड़ा हुआ है और बारिश के कारण खुले में रखी फसल खराब होने का खतरा बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि खरीद व्यवस्था शुरू होने में देरी के कारण मंडियों में धान जमा होता गया और अब बारिश से किसानों को नुकसान की चिंता सताने लगी है।

केंद्र की खरीद शुरू होने का भी इंतजार

चढ़ूनी के अनुसार अभी तक केंद्र सरकार की खरीद भी शुरू नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि मंडियों में बड़ी मात्रा में धान पड़ा है और बारिश के कारण खुले में रखे धान को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने सरकार से राइस मिलों से बातचीत कर धान को वहां भिजवाने तथा खरीद एजेंसियों के लिए गोदामों और भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि जितना धान तुल चुका है, उसका बड़ा हिस्सा अभी भी मंडियों से बाहर नहीं निकला है। यदि बारिश के कारण यह धान खराब होता है तो इसका सीधा असर किसानों के साथ-साथ सरकारी व्यवस्था पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अनाज किसान की निजी संपत्ति ही नहीं बल्कि देश की खाद्य व्यवस्था का हिस्सा है, इसलिए इसकी सुरक्षा के लिए समय रहते व्यवस्था करना जरूरी है।

जिम्मेदारी तय करने की मांग

चढ़ूनी ने धान को समय पर नहीं संभालने वाली व्यवस्था के लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो। उन्होंने प्रशासन से मंडियों में पड़े धान की सुरक्षा, उठान और खरीद प्रक्रिया को तेज करने की मांग की।


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Content Editor

Harman

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