कोरोना के सक्रिय मामलों को लेकर हर जिले में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध: राजीव

8/1/2020 3:20:25 PM

चंडीगढ़ (धरणी): हरियाणा में कोरोना वायरस का कहर अभी तक रुका नहीं है, लेकिन इस बीच राहत की बात यह है कि प्रदेश के 80 फीसदी मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं। कोरोना मरीजों का बेहतर इलाज उपलब्ध करवाने में राज्य का स्वास्थ्य विभाग दिन रात जूटा हुआ है। इसी का प्रणाम है कि आज राज्य की रिकवरी रेट 80% पार पहुंच गई है। इस बारे हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के एसीएस राजीव अरोड़ा ने कहा कि एक समय था कि जब हरियाणा के किसी भी सामान्य अस्पताल में वेंटिलेटर नहीं होता था, लेकिन आज लगभग सभी सिविल अस्पतालों में वेंटिलेटर उपलब्ध है।

उन्होंने कहा कि आर टी पी सी आर टेस्टिंग से 15 हजार टेस्ट प्रतिदिन व एंटीजन से 1 लाख टेस्ट प्रतिदिन हरियाणा में हो रहे हैं। अरोड़ा ने कहा कि जहां जहां पर भी प्लाज्मा बैंक हैं, वहां के स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन भी ठीक हुए संक्रमित लोगों का डेटा रखकर उन्हें प्लाज्मा डोनेट करने के लिए जागरूक कर रहे हैं। राजीव ने कहा कि कोरोना को लेकर सभी जिलों में हर तरह की पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं। 

प्रस्तुत है एक्सक्ल्यूसिव इंटरव्यू के कुछ अंश प्रस्तुत हैं-

प्रश्न- हरियाणा में जिस तरह से करोना का प्रकोप जारी है उसे लेकर सरकार की ओर से किस तरह की तैयारियां हैं?
उत्तर- जो बहुत सेंसिटिव टाइम था वह मई के आखिरी सप्ताह से लेकर जून के आखिर तक था। क्योंकि अचानक कोरोना के मामले इतने अधिक बढ़ गए थे, लेकिन समय पर एक्शन लेने की वजह से और हर सप्ताह कोरोना को लेकर समीक्षा कर रणनीति तैयार करने को लेकर आज इसमें बहुत सुधार हुआ है।  एक समय में प्रदेश का रिकवरी रेट 44 प्रतिशत तक आ गया था। जो अब 80 प्रतिशत है। जबकि मृत्यु दर 1.6 प्रतिशत पार कर गया था जो अब 1.27 प्रतिशत तक पहुंच गया है। ये तब है जब हमारा राष्ट्रीय मृत्यु दर 2.3 प्रतिशत है। जबकि राष्ट्रीय स्तर पर रिकवरी रेट भी 64 प्रतिशत चल रहा है। हमारा रिकवरी रेट 80 प्रतिशत तक है। 

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सबसे बड़ी बात कि जो सैंपल पॉजिटिविटी रेट है वो कम होकर 5.75 प्रतिशत पर आ गया है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 8 प्रतिशत से अधिक है। इससे पहले 80 प्रतिशत मामले एनसीआर एरिया से आते थे, लेकिन अब कैचमेंट एरिया बड़ गया है। अब अलग-अलग जिलों से 15-20 के करीब मामले सामने आ रहे हैं। जिसको मैनेज करने के लिए हमारी फैसिलिटीज पर दवाब अब कम आ रहा है।

आज प्रदेश में कोरोना मामलों की संख्या 32 हजार पार करने के बावजूद हमारे सक्रिय मामले। साढ़े 6600 के करीब है। अगर इन 6600 मामलों को देखे तो उसके लिए हर तरह की पर्याप्त सुविधाएं हर जिले में उपलब्ध हैं। इसलिए किसी प्रकार की कोई पैनिक नहीं है। जबकि हमारे स्वास्थ्य विभाग के लोग और जिला प्रशासन के लोग पूरी तरह से इन मामलों की देखरेख कर पा रहे है।

प्रश्न- प्लाज्मा थेरेपी किस तरह की थरेपी है? हरियाणा में कितनी जगह प्लाज्मा बैंक खोले गए हैं और वे किस तरह से काम करते है?
उत्तर- संक्रमण से ठीक हुए व्यक्ति के शरीर मे एंटीबॉडी डेवलप हो जाती है। ऐसे व्यक्तियों के खून में से अगर प्लाज्मा को अलग करके अगर मरीज को चढ़ाते है तो ये ट्रेटमेंट का एक प्रोटोकॉल है। हरियाणा में इस समय चार प्लाज्मा बैंक रोहतक मेडिकल कॉलेज, फरीदाबाद, गुरुग्राम और पंचकूला में खोले जा चुके हैं। पिछले करीब एक सप्ताह में ही हरियाणा में ये प्लाज्मा बैंक एस्टेब्लिश हुए है और हम उम्मीद करते हैं कि जो लोग कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके हैं और जिनमें इनके एंटीबॉडी बन चुके है अगर इनका प्लाज्मा उन संक्रमित मरीजों को डोनेट किया जाए तो उनके इलाज में काफी मदद मिलती है।

प्रश्न- प्लाज्मा डोनेशन के लिए लोगों को अवेयर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं, क्योंकि जितनी संख्या में लोग ठीक हो रहे है उतनी संख्या में लोग प्लाज्मा डोनेट नहीं कर रहे ?
उत्तर- अभी कुछ ही दिन पहले हमारे चार प्लाज्मा बैंक एस्टेब्लिश हुए हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की ओर से भी प्रदेश के लोगों को प्लाज्मा डोनेट करने की अपील की गई है। जबकि जहां जहां पर भी प्लाज्मा बैंक है, वहां के स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन भी ठीक हुए संक्रमित लोगों का डेटा रखकर उन्हें प्लाज्मा डोनेट करने के लिए जागरूक कर रहे हैं। हम उम्मीद करते है कि आगे और अधिक लोग इसके लिए जागरूक होंगे। जिसके बाद हमारे पास पर्याप्त मात्रा में प्लाज्मा डोनेट करने वाले होंगे।

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प्रश्न- हरियाणा में प्लाज्मा थेरेपी से अब तक कितने लोग ठीक हो चुके हैं, हरियाणा में अन्य जगह भी प्लाज्मा बैंक खोले जाएंगे?
उत्तर- ये चारों प्लाज्मा बैंक सिटी बेस प्लाज्मा बैंक ही नहीं है, जबकि यहां अन्य जगह से भी प्लाज्मा डोनेट किया जा सकता है। हालांकि अगर इससे ठीक होने की दर की बात करे तो ये अभी जल्दबाजी होगी। क्योंकि अभी प्रदेश में कुछ ही दिन पहले यह प्लाज्मा बैंक खोले गए है। अगले दो सप्ताह बाद ही इसके आंकड़े बताए जा सकेंगे।

प्रश्न- पंजाब में जिस तरह प्राइवेट अस्पताल के लिए भी प्लाज्मा की राशि निर्धारित कर दी गई है क्या हरियाणा में भी प्राइवेट अस्पताल में ये शुरू किया जा सकता है?
उत्तर- अभी हमारे पास प्लाज्मा बैंक में जो भी डोनेशनस आ रही है उसमें केवल पब्लिक अस्पताल को ही प्रेफरेंस दी जा रही है। अभी इस बारे में विचार नहीं किया गया। 

प्रश्न- क्या प्रदेश में कुछ ऐसे  मामले भी सामने आए जो ठीक होने के बाद फिर से संक्रमित हुए हो?
उत्तर- हमारे पास ऐसे कोई रिकॉर्ड आंकड़े नहीं है। अब तक 26-27 हजार मरीज ठीक हो चुके है जबकि ऐसे कोई आंकड़े हमारे पास नहीं आए। हालांकि मेडिकल इंस्टीट्यूशन्स के पास ऐसा कोई मामला आया हो तो कहा नहीं जा सकता।

प्रश्न- कोविड वैक्सीन को लेकर रोहतक पीजीआई में जो ट्रायल चल रहा है उसका फिलहाल क्या लेटेस्ट स्टेटस है और ये कितने फेस में कम्पलीट हो चुका है?
उत्तर- इसकी ज्यादा डिटेल तो रोहतक मेडिकल कॉलेज वाले ही बता पाएंगे, लेकिन इतना जरूर है कि कोविड वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल के लिए रोहतक मेडिकल कॉलेज को चुना गया है, जिसके लिए वहां के डॉक्टर्स बधाई के पात्र है।

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प्रश्न- हरियाणा में टेस्टिंग की फिलहाल क्या प्रक्रिया है? कितने प्रकार की और कितने लोगों की टेस्टिंग हो रही है?
उत्तर- टेस्टिंग में हमने अपनी क्षमता काफी बढ़ाई है। जहां तक कि जून के माह में हमारे रोजाना एवरेज टेस्ट 5 हजार होते थे जबकि जुलाई के आखिर तक अब हम 11हजार टेस्ट रोजाना अचीव कर लेंगे। इस समय हमारे पास आर टी पी सी आर टेस्टिंग शुरू से चल रही है। उसमे हमारी 11 लैब्स सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज में है, जबकि 7 प्राइवेट लैब हरियाणा में है।  इसके अलावा 6 और लैब्स ऐसी है जो हमारे सरकारी अस्पतालों और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजे में एस्टेब्लिश हो रही है।

आज के दिन भी हमारी कैपेसिटी प्राइवेट और सरकारी मिलाकर 15 हजार  टेस्ट रोजाना की है। इसके साथ-साथ रैपिड एंटीजेन टेस्ट दिल्ली में जिस प्रकार किए गए और एनसीआर जिलों में 1 लाख से अधिक टेस्ट किए गए। ये हमने एनसीआर जिलो में शुरू किए थे, लेकिन अब सभी जिलों में रैपिड एंटीजेन टेस्ट किए जा रहे है।  आर टी पी सी आर और रैपिड एंटीजेन टेस्ट मिलाकर हमने 22 हजार से अधिक प्रति मिलियन सैंपलिंग हरियाणा में की है। हरियाणा में काफी अच्छी टेस्टिंग चल रही है। जबकि इसे और अधिक बढ़ाया जा रहा है। एंटीजन से प्रतिदिन 1 लाख  टेस्ट प्रतिदिन हो रहें है। प्रत्येक जिले में कम से कम एक कोरोना टेस्टिंग लैब खोली जानी चाहिए।  जहां पर ऐंटीजेन टेस्टिंग की बजाय आरटीपीसीआर प्रणाली से टेस्टिंग की सुविधा हो।

वर्तमान में कोरोना टेस्टिंग लैब्स की संख्या प्रदेश में 16 है, जिनमें 11 सरकारी तथा पांच लैब प्राइवेट अस्पतालों में हैं। मुख्यमंत्री ने आदेश दिए कि चार जिलों के सरकारी अस्पतालों और पांच मेडिकल कॉलेजों में एक-एक नई लैब अगले 10 दिन में खोली जाए। वर्तमान में, प्रतिदिन 9500 टेस्ट किए जा रहे हैं और नई लैब्स खुलते ही ये संख्या 20,000 तक हो जाएगी। इसी प्रकार, ओइसोलेटिड बैड्स की
संख्या 10,630 है, आईसीयू बैड्स की संख्या 12,846 तथा कुल बैड्स 52000 हैं और 426 क्वारंटाइन केन्द्र हैं।  

प्रश्न- प्राइवेट लैब्स की टेस्ट रिपोर्ट्स को लेकर कुछ शंकाएं उभरी थी। क्या विभाग की और से इन मामलों को लेकर कोई कदम उठाए गए, ताकि इन चीजों की पुनरावृति न हो?
उत्तर- जिस समय सरकारी तौर पर भी बहुत अधिक टेस्टिंग नही थी और प्राइवेट लैब्स पर बहुत अधिक निर्भरता थी उस समय कुछ ऐसे मामले आये थे जहां पर कुछ लैब्स में सरकारी और प्राइवेट के टेस्ट रिजल्ट्स में अंतर था। एक दो जगह तो कुछ ऐसे मामले आए कि उनकी रिपोर्ट आईसीएमआर को भेजनी पड़ी और एफआईआर भी दर्ज हुई थी। लेकिन अब हमारी सरकारी तौर ही इतनी पर्याप्त टेस्टिंग हो रही है कि हमें अपने टेस्ट करवाने के लिए प्राइवेट लैब्स की जरूरत नही पड़ती। जो लोग डायरेक्ट प्राइवेट लैब से  अपना टेस्ट करवाना चाहते है उसके लिए भी हरियाणा पहला ऐसा प्रदेश है, जिसने आर टी पी सी आर के 2400 रुपये प्रति टेस्ट के हिसाब से रेट तय किए है।

प्रश्न- प्राइवेट अस्पताल की ओर से मनमाने दाम लिए जाने को लेकर सरकार ने कुछ कदम उठाए थे। किस तरह के कदम उठाए गए थे?
उत्तर- जिस समय हमारे पास उतने मरीज भी नहीं थे हमने उसी समय से ही प्राइवेट अस्पातल में इलाज के रेट्स तय कर दिए थे। इसलिए मुझे नहीं लगता कि हमें हरियाणा में कोई इस तरह की समस्या आई है जिससे लोगों मे ऐसा लगा हो कि प्राइवेट अस्पताल उनसे मनमाने दाम वसूल रहे है। क्योंकि हमने समय रहते इसपर कारवाही की है।

प्रश्न- कोरोना के इलावा बरसात के मौसम में डेंगू मलेरिया जैसी बीमारियों से निपटने के लिए क्या तैयारी है?
उत्तर- कोरोना काल के दौरान भी स्वास्थ्य विभाग ने अपने अन्य नार्मल कार्यक्रमों की अनदेखी नहीं की। केवल अप्रैल माह में लॉकडाउन के समय इम्यूनाइजेशन की कुछ फिगर्स ड्राप की थी। जिसे अब कॉम्पेनसेट किया जा रहा है। जबकि हम अपने रोजमर्रा के सभी तरह के इम्यूनाइजेशन, डेंगू,h1n1 हेपेटाइटिस, टीबी और अन्य बीमारियों को लेकर कार्यक्रम पहले की तरह चला रहे हैं।

हमने पूरी कोशिश की है कि कोरोन की वजह से स्वास्थ्य विभाग की और से अन्य बीमारियों को लेकर चलाये जा रहे कार्यक्रमों पर कोई असर न पड़े। हालांकि जो ओपीडी सेवाएं भी अप्रैल में लॉकडाउन की वजह से प्रभावित हुई उस समय भी मोबाइल टीम्स इन सेवायों के लिए हर जिले में लगाई गई थी। कोरोना की वजह से स्वास्थ्य विभाग में इतनी जागरूकता आ गयी है कि अन्य बीमारियों को लेकर
चलाये जा रहे कार्यक्रमों में भी पहले से काफी अच्छी परफॉरमेंस आ रही है।

प्रश्न- कोरोना के जो क्रिटीकल मरीज आते है उन लोगों का इलाज स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती होती है। ऐसे मरीजों की देखभाल कैसे की जाती है?
उत्तर- जो एक स्तर से अधिक क्रिटिकल मरीज होते है उन्हें मेडिकल इंस्टीट्यूशन्स की जरूरत पड़ती है। हरियाणा में जितने मेडिकल कॉलेज है उन्हें हमने डेडिकेटेड कोविड अस्पताल के तौर पर डिक्लेअर किया है। हर मेडिकल कॉलेज के साथ डियाट्रिक्टस को अटैच किया है जबकि यह कोशिश की जाती है कि पिछले दो माह में जितने ऐसे इंस्टीट्यूशन्स है उन्हें अपग्रेड करें। 

एक समय था कि जब हरियाणा के किसी भी सामान्य अस्पताल में वेंटिलेटर नहीं होता था। लेकिन आज लगभग सभी सिविल अस्पतालों में वेंटिलेटर  उपलब्ध है। काफी सिविल अस्पतालों में वेंटिलेटर चालू कर उनमे आईसीयू एस्टेब्लिश कर दिए गए है। मेडिकल इंस्टीट्यूशन्स में भी 250 वेंटिलेटर इंस्टॉल किए है। 200 और वेंटिलेटर भारत सरकार की और से दिए जा रहे है। हमारे मेडिकल इंस्टीट्यूशन्स की क्रिटिकल मरीज को आखिर तक बचाने की कोशिश रहती है।लेकिन ऐसे बहुत से मरीज जिनकी कोरोना की वजह से मौत हो रही है वह पहले से किसी गंभीर बीमारी का शिकार होते है। जबकि अपनी तरफ से इंस्टिट्यूशनस की मरीज को सेव करने की पूरी कोशिश होती है। इसके लिए उसे हर तरह की मेडिकल सुविधा दी जाती है।

प्रश्न- कुछ युवकों ने प्रतिबंधित दवाएं इराक भेजने की कोशिश की। गुरुग्राम में उनसे 45 लाख की दवाइयां बरामद की गई है।आपके विभाग की और से इनपर शिंकजा कसने के लिए क्या विशेष कदम उठाए जा रहे है?
उत्तर- हमारा फ़ूड एंड ड्रग विभाग की लगातार यह कोशिश रहती है कि इस प्रकार की गतिविधियों पर तुरंत कारवाही करे। लेकिन जो घटना आप बता रहे है यह आज ही टीवी के जरिए मैंने देखा है। जबकि उसकी पूरी जानकारी आने के बाद ही इसे बारे में मैं कुछ बता पाऊंगा। लेकिन फ़ूड एंड ड्रग विभाग ने चाहे वो सैनिटाइजर हो, चाहे मास्क हो या कोरोना को लेकर दूसरी प्रकार की दवाइयां हो या
नशीली दवाइयां हो, इनपर पिछले दो तीन माह से काफी शिकंजा कसा है।


Edited By

vinod kumar

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