भाजपा सरकार में चौपट होती शिक्षा प्रणाली से बच्चों का खराब हो रहा है भविष्य: रणदीप सुरजेवाला
punjabkesari.in Sunday, Jan 04, 2026 - 03:56 PM (IST)
चंडीगढ़ (संजय अरोड़ा) : अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं राज्यसभा के सदस्य रणदीप सिंह सुर्जेवाला ने जहां हरियाणा में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं तो स्कूलों में खाली पड़े शिक्षकों के पदों को लेकर सरकार पर आरोप लगाए हैं। सुरजेवाला ने प्रदेश में बढ़ते अपराध पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि हरियाणा में आए दिन संगीन आपराधिक घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने मनरेगा योजना में केंद्र सरकार की ओर से किए गए बदलाव को किसान एवं मजदूर को बांटने की गहरी साजिश बताया है।
कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा में भाजपा का चौतरफा चौपटकाल चल रहा है। बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है तथा शिक्षा-व्यवस्था बदहाल है। भाजपा के फैलाए नाउम्मीदी और अशिक्षा के घोर अंधकार में हरियाणा के बच्चों की पढ़ाई भी खतरे में है। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में वैसे ही शिक्षकों के 29,800 से अधिक और कालेजों में प्रोफेसरों के 50 फ़ीसदी पद खाली पड़े हैं। जो शिक्षक बचे हैं, उन्हें भी स्कूल जाने की बजाय चुनाव, सर्वे, जनगणना, कुत्तों की गिनती और सरकार की प्रचार मशीनरी बना दिया है। पहले से शिक्षकों की भारी कमी की मार झेलते स्कूलों में तैनात शिक्षकों को भी पढ़ाना छोडक़र, 25 से अधिक गैर-शिक्षण कार्यों में उलझा दिया है। इसी कारण एक शिक्षक साल में 80 से 100 दिन स्कूल और कक्षा से बाहर रहने को मजबूर है और बच्चे बिना टीचर के पढ़ाई से दूर हो रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि न केवल पूरी शिक्षा प्रणाली चौपट हो चुकी है, बल्कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चों का परीक्षा परिणाम और भविष्य भी खराब हो रहा है। हरियाणा के लिए अभिशाप बन चुकी भाजपा, भयानक बेरोजगारी और अपराध से लेकर, अशिक्षा के अंधकार तक... प्रदेश का वर्तमान और भविष्य दोनों बर्बाद कर रही है।
अपराध के अंधकार से हर तरफ मचा हाहाकार
इसी तरह से हरियाणा में बढ़ती आपराधिक घटनाओं को लेकर भी राज्यसभा के सदस्य रणदीप सिंह सुर्जेवाला ने कहा कि हर दिन हरियाणा में अब अपराध का अंधकार है, मगर सरकार गायब नजर आ रही है और हर तरफ हाहाकार है। गांव-शहर, घर-बाहर, दुकान-सडक़, हर तरफ गुंडोड्ड की मनमर्जी और लूटमार का आतंक है। शनिवार रात की पानीपत और करनाल की दो दिल दहलाने वाली नृशंस वारदात इस बात का प्रमाण हैं। करनाल के सैक्टर-16 इलाके में बदमाशों ने अचानक हमला बोलकर सर्राफा व्यापारी के साथ बड़ी लूट की वारदात को अंजाम दे दिया। स्कूटी से जा रहे सर्राफा व्यापारी पर, झाडिय़ों में छिपे बदमाशों ने अचानक हमला बोल दिया।
व्यापारी को लोहे की रॉड से पीट कर गंभीर रूप से घायल कर डाला, 15 लाख रुपए कैश और 1500 ग्राम सोने से भरा बैग लूट कर फरार हो गए। बाद में राहगीरों ने जब व्यापारी को 10 फुट गहरी खाई में घायल पड़ा देखा तो अस्पताल पहुंचाया। पानीपत में एक महिला की बेरहमी से हत्या कर दी गई और उसका शव अर्धनग्न अवस्था में खेतों में पड़ा मिला। सुर्जेवाला ने कहा कि अपराधियों ने दरिंदगी की हद पार करते हुए महिला के सिर और चेहरे पर ईंट मारकर कु्ररता से जान ले ली। आए दिन महिलाओं के खिलाफ बढ़ते जघन्य और कु्रर अपराध देश और प्रदेश को शर्मसार करने वाले हैं। पूरे प्रदेश में अपराध का राज कायम हो गया है, हर तरफ़ भय और आतंक का कहर है, मगर मुख्यमंत्री नायब सैनी जिम्मेदारी से मुंह फेर केवल बयानवीर बने फिर रहे हैं। हरियाणा में कानून का शासन अब केवल कागजों पर रह गया है, भाजपा के नायाब नकारेपन के काल में पूरा प्रदेश बेलगाम अपराध से बेहाल है।
मनरेगा में बदलाव को लेकर कांग्रेस नेता ने जताई आपत्ति
कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुर्जेवाला ने केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा में किए गए बदलाव पर भी आपत्ति जाहिर करते हुए कहा कि अब इस योजना के तहत केंद्र सरकार की धौंस के आधार पर बजट मिलेगा। इससे पहले मनरेगा कानून में बजट की कोई सीमा नहीं थी। जब भी, जितने भी लोग, जिस जिले या राज्य में काम मांगें, काम देना होग, बजट देना होगा।नए कानून में केंद्र सरकार फैसला करेगी कि किस राज्य को कितना बजट देना है। जिसे चाहे दो, जिसे चाहे मत दो। यानी अंधा बांटे सिरणी, मुड़-मुड़ अपनों को दे। मनरेगा की गारंटी बनाम स्पांसर्ड स्कीम है। मनरेगा कानून 100 दिन तक के काम का अधिकार है, गारंटी है। यह गारंटी भारत के संविधान के आॢटकल 39 की धारा 41 का प्रतिबिंब है। जैसा नए कानून के सैक्शन 3 में कहा भी है कि मौजूदा कानून एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है और कुछ नहीं। यानी रोजगार के अधिकार की गारंटी अब खत्म।
अब सरकार किसान और मजदूर को बांटने की साजिश कर रही है तथा 60 दिन रोजगार न देने की शर्त रखी जा रही है। मनरेगा कानून में काम मांगने की न कोई पात्रता और न कोई समय सीमा है। पहले यह प्रावधान था कि जब भी कोई काम मांगे, तो काम देना होगा, जबकि नए कानून में किसान और मजदूर का बंटवारा करने की एक साजिश रची गई। कानून में प्रावधान है कि बिजाई और कटाई के समय 60 दिन तक कोई मजदूरी नहीं दी जाएगी।, पर क्या भारत में अलग-अलग फसलों की खेती का अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग समय नहीं है? उदाहरण के तौर पर, खरीफ सीजन में अलग-अलग राज्यों में धान की फसल के बीजने का समय मई से अगस्त तक है और धान की कटाई का समय सितंबर से जनवरी तक है।