गुरुग्राम के जलभराव पर राव इंद्रजीत सिंह सख्त, बोले- कंक्रीट और तकनीकी रोडमैप के बिना नहीं निकलेगा समाधान
punjabkesari.in Wednesday, Aug 26, 2026 - 05:11 PM (IST)
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): गुरुग्राम में हर साल बारिश के दौरान सामने आने वाली जलभराव की गंभीर समस्या को लेकर केंद्रीय राज्य मंत्री एवं गुरुग्राम से लोकसभा सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की। चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस मुलाकात में राव इंद्रजीत सिंह ने गुरुग्राम में जल निकासी की मौजूदा व्यवस्था, बरसाती पानी के रास्तों में आ रही रुकावटों तथा समस्या के स्थायी समाधान को लेकर मुख्यमंत्री के साथ विस्तार से चर्चा की।
मुलाकात के बाद राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि गुरुग्राम में साल दर साल जलभराव की समस्या बढ़ती जा रही है और केवल अस्थायी इंतजामों से इसका समाधान संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि इस समस्या से स्थायी निजात के लिए सरकार को ठोस और तकनीकी फैसले लेने होंगे।
साल दर साल बढ़ रही है समस्या
राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि वह विशेष रूप से इसी विषय को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने आए थे। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम में बारिश के दौरान जलभराव कोई नई समस्या नहीं है, बल्कि पिछले करीब 20 वर्षों से यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।
उन्होंने कहा कि इसके पीछे कई कारण हैं। पहाड़ों और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले नालों तथा बरसाती पानी को ड्रेन नंबर-8 तक पहुंचाने वाले प्राकृतिक रास्तों पर समय के साथ कॉलोनियां विकसित हो गईं। कई स्थानों पर इन जलमार्गों के ऊपर सड़कें बन गईं और कुछ जगहों पर बिल्डरों द्वारा कथित तौर पर अवैध कब्जे भी किए गए।
राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि जब प्राकृतिक जल निकासी के रास्ते ही बाधित हो जाएंगे तो बरसात के दौरान पानी के सामने समस्या पैदा होना स्वाभाविक है।
प्राकृतिक जल निकासी के रास्तों को लेकर चिंता
राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में आज की स्थिति में उन सभी निर्माणों और रास्तों को हटाना आसान नहीं है, जो पिछले वर्षों में विकसित हो चुके हैं। ऐसे में सरकार को वैकल्पिक और तकनीकी समाधान तलाशना होगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री को सुझाव दिया कि जहां-जहां प्राकृतिक नाले और पानी के रास्ते रुक गए हैं, वहां भूमिगत जल निकासी की व्यवस्था विकसित की जा सकती है।
उन्होंने इसकी तुलना मेट्रो की तर्ज पर जमीन के नीचे बनाए जाने वाले मार्ग से की। उनके अनुसार, यदि जरूरत के अनुसार भूमिगत रास्ते तैयार कर पानी की निकासी सुनिश्चित की जाए तो गुरुग्राम को बार-बार होने वाले जलभराव से काफी हद तक राहत मिल सकती है।
‘एक जगह पानी रोकेंगे तो दूसरी जगह से निकलेगा’
राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि पानी की अपनी प्रकृति होती है। यदि उसे एक स्थान पर रोकने का प्रयास किया जाएगा तो वह दूसरे स्थान से निकलने का रास्ता तलाश लेगा। उन्होंने कहा कि केवल किसी एक स्थान पर अस्थायी रूप से प्लास्टर लगाने या रास्ता बंद करने से समस्या खत्म नहीं होगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि गुरुग्राम के जलभराव का समाधान किसी एक स्थान पर किए गए छोटे-मोटे काम से नहीं होगा। इसके लिए पूरे क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था को एक साथ समझना और उसके अनुरूप योजना तैयार करना जरूरी है।
आईआईटी विशेषज्ञों की मदद से बने रोडमैप
तकनीकी अध्ययन पर दिया जोर
राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि गुरुग्राम की इस जटिल समस्या के समाधान के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद लेना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जैसे तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों से अध्ययन करवाकर एक ठोस रोडमैप तैयार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पहले यह पता लगाना होगा कि पानी किन-किन क्षेत्रों से आता है, उसके प्राकृतिक निकासी मार्ग कौन से हैं, कहां-कहां रुकावटें हैं और भविष्य में बढ़ती आबादी तथा शहरीकरण को देखते हुए कितनी क्षमता की ड्रेनेज व्यवस्था की आवश्यकता होगी। राव इंद्रजीत सिंह के मुताबिक, जब तक तकनीकी आधार पर पूरी व्यवस्था का अध्ययन नहीं होगा, तब तक अलग-अलग स्थानों पर किए जाने वाले काम स्थायी समाधान नहीं दे पाएंगे।
अधिकारियों की होगी जवाबदेही
राव इंद्रजीत सिंह ने यह भी कहा कि जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्रों में जल निकासी और आवश्यक कार्यों को पूरा कराने की थी, उनसे जवाब-तलब किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में काम कर रही है और जिन कार्यों को किया जाना था लेकिन वे नहीं हुए, उनकी भी एक्सप्लेनेशन कॉल ली जा रही है।
उन्होंने संकेत दिया कि जलभराव की समस्या को लेकर प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। इससे संबंधित विभागों और अधिकारियों से यह पूछा जाएगा कि निर्धारित कार्य समय पर क्यों नहीं हुए और जल निकासी व्यवस्था में सुधार के लिए क्या कदम उठाए गए।
अस्थायी नहीं, स्थायी समाधान पर जोर
राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि गुरुग्राम आज हरियाणा ही नहीं बल्कि देश के प्रमुख आर्थिक और औद्योगिक केंद्रों में शामिल है। ऐसे शहर में बार-बार जलभराव होना केवल आम लोगों के लिए परेशानी का विषय नहीं, बल्कि यातायात, कारोबार, उद्योग और शहरी प्रशासन के लिए भी गंभीर चुनौती है।
उन्होंने कहा कि सरकार को अब समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ना होगा। इसके लिए बड़े स्तर पर तकनीकी अध्ययन, पर्याप्त बजट, भूमिगत जल निकासी व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही जरूरी है।
‘कंक्रीट फैसला लेना होगा’
राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि जब तक कंक्रीट यानी ठोस फैसले नहीं किए जाएंगे, तब तक गुरुग्राम की जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाएगा। उन्होंने कहा कि पानी को रोकने या किसी एक स्थान पर तत्काल व्यवस्था करने के बजाय पूरे जल निकासी तंत्र को वैज्ञानिक तरीके से दुरुस्त करना होगा।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ हुई इस मुलाकात को गुरुग्राम की लंबे समय से चली आ रही जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि सरकार राव इंद्रजीत सिंह के सुझावों पर किस स्तर पर कार्रवाई करती है और आगामी बरसातों से पहले जल निकासी व्यवस्था को कितना प्रभावी बनाया जा सकता है।