हरियाणा में इन महिलाओं के लिए जारी किए गए 170 करोड़, 10 लाख लाभार्थियों की हुई स्क्रीनिंग...जानिए क्यों

punjabkesari.in Saturday, Apr 11, 2026 - 02:50 PM (IST)

चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने प्रदेश में मातृ-शिशु स्वास्थ्य और पोषण स्तर को सुधारने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार ने 'मुख्यमंत्री दूध उपहार योजना' के सफल क्रियान्वयन के लिए 170 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जारी की है। इस फंड का मुख्य उद्देश्य राज्य की गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और छोटे बच्चों को कुपोषण के चक्र से बाहर निकालना है। सरकार का यह निवेश केवल एक वित्तीय आवंटन नहीं है, बल्कि प्रदेश की आने वाली पीढ़ी को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा संकल्प है।

मुख्यमंत्री दूध उपहार योजना: पोषण का नया आधार
राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य लक्ष्य गर्भवती महिलाओं और 1 से 6 साल तक के बच्चों में कुपोषण (Malnutrition) और एनीमिया (रक्त की कमी) जैसी गंभीर समस्याओं को जड़ से खत्म करना है। इस योजना के तहत लाभार्थियों को साल में 300 दिन फोर्टिफाइड स्किम्ड मिल्क पाउडर प्रदान किया जाएगा। यह साधारण दूध नहीं है; इसमें विटामिन-ए और डी-3 जैसे महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्व मिलाए गए हैं, जो बच्चों की हड्डियों के विकास और महिलाओं की इम्युनिटी के लिए अनिवार्य हैं। योजना को आकर्षक बनाने के लिए यह दूध चॉकलेट, वेनिला, स्ट्रॉबेरी और केसर-बादाम जैसे छह अलग-अलग स्वादों में उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि पोषण के साथ-साथ स्वाद का भी ध्यान रखा जा सके।

10 लाख लाभार्थियों की स्क्रीनिंग और डिजिटल ट्रैकिंग
बजट जारी करने के साथ-साथ सरकार ने धरातल पर लाभार्थियों की पहचान का काम भी युद्ध स्तर पर पूरा किया है। स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त प्रयासों से अब तक प्रदेश भर में 9.92 लाख (लगभग 10 लाख) लाभार्थियों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इस स्क्रीनिंग के माध्यम से उन महिलाओं और बच्चों को विशेष रूप से चिन्हित किया गया है जो कुपोषण के उच्च जोखिम पर हैं। सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग का सहारा लिया है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि दूध का पैकेट सही हाथों में पहुँच रहा है और वितरण प्रणाली में किसी भी प्रकार की लीकेज न हो।

पंचायतों की जवाबदेही और मातृ मृत्यु दर में कमी का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस योजना का लाभ गांव की अंतिम पात्र महिला तक पहुँचना चाहिए। इसके लिए ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब ग्राम सभा की बैठकों में महिलाओं के पोषण की स्थिति पर अनिवार्य रूप से चर्चा की जाएगी। इस निवेश का दूरगामी लक्ष्य राज्य में मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) में भारी कमी लाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गर्भावस्था के दौरान माता को सही पोषण मिले, तो जन्म के समय बच्चे का वजन संतुलित रहता है और प्रसव के दौरान होने वाली जानलेवा जटिलताएं काफी हद तक कम हो जाती हैं।

 


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Content Writer

Isha

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