हरियाणा में तेंदुए ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ा, 8 महीने का था Leopard...सामने आई मौत की चौंकाने वाली वजह
punjabkesari.in Friday, Jul 03, 2026 - 02:05 PM (IST)
यमुनानगर(परवेज): हरियाणा के यमुनानगर स्थित कलेसर नेशनल पार्क में एक 8 महीने के लेपर्ड की मौत से वन विभाग और वाइल्डलाइफ विभाग के अधिकारी सकते में है। बताया जा रहा है कि जब इस लेपर्ड को गंभीर हालत में रेस्क्यू कर डॉक्टरो ने अपने कब्जे में लिया तब तक उसकी हालत गंभीर थी और अंतिम सांसे चल रही थी। जब तक इलाज शुरू किया जाता तब तक उसकी मौत हो गई।
यमुनानगर में तीन डॉक्टरों पर आधारित टीम ने इस लेपर्ड का पोस्टमार्टम किया, जिसमें चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। बताया जा रहा है कि यह लेपर्ड कैनाइन डिस्टेंपर वायरस नामक बीमारी से ग्रस्त था और यह बीमारी कुत्तों सहित अन्य जंगली जानवरों से आती है। या तो इस लेपर्ड ने किसी बीमार कुत्ते का शिकार किया अथवा उसके संपर्क में रहा, जिससे यह बीमारी इस लेपर्ड में आ गई। पोस्टमार्टम करवाने वाले विशेषज्ञ डॉक्टर सुखबीर नैन ने बताया कि पोस्टमार्टम में इस युवा लेपर्ड का लीवर, हॉट बुरी तरह प्रभावित मिला, वहीं आंतों में ब्लीडिंग और सांस की नली में भी कई तरह के विकार मिले।
पशुपालन विभाग के डॉक्टर सतबीर धनिया ने बताया कि तीन डॉक्टरों पर आधारित टीम ने इस लेपर्ड का पोस्टमार्टम किया और उसके बाद नियम मुताबिक इस लेपर्ड का संस्कार करके उसके अवशेष को जमीन में दबाया गया। उन्होंने बताया की मौत के जो कारण है उसकी जांच के लिए बिसरा लैब में भेजा जा रहा है, उनकी रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी और कारणों का पता लग पाएगा।
8 महीने के इस लेपर्ड की इस तरह से मौत ने वाइड लाइफ और फॉरेस्ट अधिकारियों को सकते में ला दिया है, वाइड लाइफ और फॉरेस्ट अधिकारी अन्य लेपर्ड व जंगली जानवरों पर नजर बनाए हुए हैं। कलेसर नेशनल पार्क में गतिविधियां बढ़ा दी गई हैं, किसी भी जानवर की स्थिति बीमारी वाली अथवा संदिग्ध लगे तो इस बारे अधिकारियों को रिपोर्ट करने के आदेश दिए गए हैं।
क्या है यह बीमारी
लेपर्ड (तेंदुए) में 'डिस्पेंसर' असल में कैनाइन डिस्टेंपर बीमारी है। यह एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है जो मुख्य रूप से कुत्तों, सियार और जंगली बिल्ली प्रजातियों (जैसे तेंदुए और बाघ) को प्रभावित करती है।कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) लगभग पूरी दुनिया में फैला हुआ है, और इसके संक्रमण से पालतू कुत्तों और कई जंगली मांसाहारी जीवों में भारी मृत्यु दर देखी जा रही है। 2003 से, रूस के सुदूर पूर्व में अमूर बाघों में कई घातक मामले सामने आए हैं, जिससे बाघ संरक्षण के लिए एक नए खतरे की आशंका बढ़ गई है।
कलेसर नेशनल पार्क हिमालय की शिवालिक पर्वतमाला की तलहटी में स्थित है। यह हरियाणा के यमुनानगर जिले के अंतर्गत आता है और इसकी सीमा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश राज्यों से लगती है। यमुना नदी पूर्वी सीमा पर उत्तर प्रदेश से लगती है, जबकि शिवालिक पर्वतमाला उत्तर में हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा को अलग करती है।
कलेसर नेशनल पार्क का नाम संरक्षित क्षेत्र में स्थित कालेसर (शिव) मंदिर के नाम पर रखा गया है। पूरा क्षेत्र जैव विविधता से भरपूर है, जिसमें घने साल के जंगल, खैर के जंगल और घास के मैदान हैं, जो विभिन्न प्रकार के पौधों और जीव-जंतुओं की प्रजातियों को आश्रय प्रदान करते हैं।
इस पार्क को 8 दिसंबर 2003 को राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था और इसका क्षेत्रफल 11570 एकड़ है। राष्ट्रीय उद्यान से सटा हुआ कलेसर वन्यजीव अभयारण्य है, जिसे 13 दिसंबर 1996 को अधिसूचित किया गया था और इसका क्षेत्रफल 13209 एकड़ है।