बिहार की बदहाली के दो जिम्मेवार, भाजपा और नीतीश कुमार: सुरजेवाला

10/20/2020 8:11:43 PM

संजय अरोड़ा: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं बिहार चुनाव प्रबंधन एवं समन्वय समिति के चेयरमैन रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बिहार चुनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा कि 2015 में बिहार के विधानसभा चुनाव के दौरान नीतिश बाबू का नारा था कि 'मिट्टी में मिल जाएंगे, मगर भाजपा में नहीं जाएंगे’ और भाजपा नेता सुशील मोदी ने 'नीतिश के खून में धोखाधड़ी है’ का जुमला फैंका था, मगर सत्ता के लालच में मोदी व नीतीश कुमार ने सभी नारों को दरकिनार कर लोगों की भावनाओं से खेलते हुए अपवित्र गठबंधन करके सत्ता हथियाने का काम किया, मगर इस बार बिहार की जनता इनके जुमलों में नहीं आएगी और निश्चित तौर पर इन्हें सत्ता से बाहर करेगी। 

सुरजेवाला ने प्रधानमंत्री मोदी पर आरोपों की झड़ी लगाते हुए कहा कि अब 2015 के बिहार चुनाव में जमीन खिसकती देखकर बिहार के लिए सवा लाख करोड़ रुपए के जुमला पैकेज का ऐलान किया था और तब नीतिश कुमार ने प्रधानमंत्री के इस ऐलान पर तंज कसते हुए कहा था कि ऐसा लग रहा है कि मोदी बिहार की बोली लगा रहे हैं। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि आज यह बात शत-प्रतिशत जाहिर हो गई है कि जुमलेबाज और धोखेबाज ने मिलकर लोकतंत्र का चीरहरण करके बिहार को पांच साल तक 'नकारा शासन’ दिया है। 

सुरजेवाला ने तथ्यों व तर्कों के साथ बात रखते हुए कहा कि पांच साल में सवा लाख करोड़ रुपए के पैकेज में से बिहार में महज 1559 करोड़ रुपए के कार्य ही पूरे हुए हैं। गृह मंत्री अमित शाह कहते हैं कि बिहार की तरक्की सवा लाख करोड़ के पैकेज से हुई है। झूठों के सरदारों की ये सफेद झूठ देख बिहार की बदहाली का अंदाजा लगाया जा सकता है। सुरजेवाला ने बिहार में सवा लाख करोड़ की परियोजनाओं के बारे में सिलसिलेवार आंकड़ें रखते हुए कहा कि इस पैकेज में सबसे बड़ा हिस्सा 54,713 करोड़ रुपए नैशनल हाइवे निर्माण, गंगा-सोम और कोसी नदी पर पुल का निर्माण तथा 12 रेलवे ओवरब्रिज शामिल थे। 

भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि इस पैकेज में 44 राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण का प्रस्ताव था, पर पांच वर्षों में भी 27 काम तो पूरे ही नहीं किए जा सके और 17 परियोजनाओं की तो अभी तक 'डी.पी.आर.’ भी तैयार नहीं की गई। अब बहाना यह बनाया जा रहा है कि बिहार में जमीन अधिग्रहण नहीं हो पा रही, ठेकेदार काम नहीं कर रहे, वन और पर्यावरण की अनुमति नहीं मिल रही। यह जवाब संसद में 10 फरवरी, 2020 को दिया गया। 

सुरजेवाला ने कहा कि अर्थात सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की 50,711.70 करोड़ की परियोजनाओं में सिर्फ 1559.96 करोड़ का कार्य ही 5 सालों मे पूर्ण किया गया। अन्य परियोजनाओं के बारे में तथ्य रखते हुए कांग्रेस महासचिव ने कहा कि प्रमुख नदियों पर संपर्कता सुनिश्चित करने वाले प्रोजेक्टस में मनिहारी से झारखंड में साहिदगंज को जोडऩे वाले गंगा नदी पुल निर्माण की 2,000 करोड़ रुपए की परियोजना को तो गुपचुप तरीके से समाप्त ही कर दिया गया। 

युवाओं के भविष्य से किया कुठाराघात
सुरजेवाला ने कहा कि इसी प्रकार गंगा नदी के ऊपर 'विक्रमशिला पुल’ के समानांतर  2,000 हजार करोड़ रुपए से पुल निर्माण परियोजना की डी.पी.आर. पांच साल में तैयार ही नहीं की गई। गंगा नदी के ऊपर 'एम.जी. पुल’ के समानांतर 2,926.20 करोड़ रुपए की लागत के नए फोरलेन पुल के निर्माण में अब तक कार्य ही शुरु नहीं किया गया। सुरजेवाला ने भाजपा सरकार द्वारा युवाओं के भविष्य पर कुठाराघात करने का आरोप लगाते हुए कहा कि 'विक्रमशिला विश्वविद्यालय’ के ऐतिहासिक स्थल पर भागलपुर के पास 5,00 करोड़ रुपए की लागत से एक केंद्रीय विश्वविद्यालय के स्थापना की घोषणा प्रधानमंत्री के पैकेज में की गई थी। 

दुर्भाग्यपूर्ण बात यह रही कि नीतीश कुमार का इस विश्वविद्यालय के संदर्भ में कहना है कि 500 एकड़ जमीन बिहार की जदयू- भाजपा सरकार नहीं दे सकती, क्योंकि इसमें 1,500 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस आपसी सिर फुटौवल में आज तक भागलपुर के केंद्रीय विश्वविद्यालय की एक ईंट भी नहीं लगी।

कांग्रेस नेता ने कहा कि 'कौशल विकास विश्वविद्यालय’ की स्थापना के नाम पर भी केंद्र की भाजपा और राज्य की जेडीयू और भाजपा सरकार ने सिर्फ झूठ ही परोसा है। बिहार पैकेज में एक 'मेगा स्किल यूनिवर्सिटी’ की स्थापना की घोषणा की गई थी तथा एक लाख युवाओं के कौशल प्रशिक्षण का वायदा भी किया गया था। 1,550 करोड़ रुपए की इस योजना का हश्र यह हुआ कि न तो 'स्किल डेवलेपमैंट विश्वविद्यालय’ की स्थापना हुई और न ही एक लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया गया। बिहार के साथ धोखा कर अब पवित्र भूमि वाराणसी को झांसा दिया जा रहा है- यह कह कर कि बिहार में खुलने वाली 'स्किल यूनिवर्सिटी’ अब वाराणसी में खोली जाएगी। 

थर्मल प्लांट की योजना ठंडे बस्ते में
बक्सर थर्मल पॉवर प्लांट के बारे में जिक्र करते हुए कांग्रेस महासचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सवा लाख करोड़ रुपए पैकेज की घोषणा के तहत  10,000 करोड़ की लागत से बक्सर के चौसा में 1,300 मेगा वॉट का थर्मल पॉवर प्लांट लगाने की घोषणा की थी। जबकि इसकी सच्चाई यह है कि इस बिजली घर की प्रस्तावना व एम.ओ.यू. कांग्रेस की यूपीए सरकार में साल 2013 में सतलज जल विद्युत निगम लिमिटेड और बिहार स्टेट पॉवर कंपनी लिमिटेड के बीच हो चुका था तथा पश्चिम बंगाल के बीरभूम से इस बिजली घर के लिए कोल ब्लाक भी अलॉट कर दिया गया था। 

पर पांच साल से मोदी सरकार तथा जदयू-भाजपा सरकार ने इसे ठंडे बस्ते में डाल रखा है। न बिजलीघर बना, न ही बिहार को एक यूनिट बिजली आई। उन्होंने सरकार पर जनता से धोखा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के इस पैकेज में बिहार में रामायण सर्किट के 100 करोड़ रुपए से विकास की घोषणा बढ़-चढ़कर की गई थी, मगर जब मोदी सरकार को प्रस्ताव भेजा गया तो उन्होंने इस प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए कहा कि इसे कम किया जाए और मात्र 37 करोड़ रुपए दिए जा सकते हैं और आखिर में एक फूटी कौड़ी भी नहीं दी।

इतना ही नहीं, बिहार के सीतामढी के पुरौना में माता सीता के प्राकट्य स्थल परिसर में भागवान राम- माता सीता के जीवन पर आधारित संग्रहालय बनाने के प्रस्ताव से भी मोदी सरकार ने इंकार कर दिया। कांग्रेस नेता ने कहा कि मोदी और नीतीश सरकार द्वारा बिहार के साथ किए दुव्र्यवहार को जनता कभी नहीं भूलेगी। मोदी सरकार ने बिहार पैकेज के नाम पर पूर्व की परियोजनाओं को ही नया बताकर बिहार के नागरिकों को धोखा दिया तो वहीं दूसरी ओर नीतीश सरकार ने चल रही परियोजना को भी अपने नाकारा प्रशासन और निकम्मेपन की भेंट चढ़ा दिया। 


vinod kumar

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