भाजपा राज में मनरेगा की दिनदहाड़े हत्या व मोदी सरकार का नया कानून गरीबों के रोजगार पर डाका : रणदीप सुरजेवाला
punjabkesari.in Sunday, Jan 11, 2026 - 09:21 PM (IST)
कैथल (जयपाल रसूलपुर) : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महासचिव एवं सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आज कैथल में आयोजित एक प्रेस वार्ता में केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मोदी सरकार द्वारा हाल ही में पारित विकसित भारत - गारंटी फॉर रोजगार तथा आजीविका मिशन (ग्रामीण) कानून को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की "दिनदहाड़े हत्या" करार दिया।
सुरजेवाला ने कहा कि यह नया कानून करोड़ों मजदूरों और गरीबों के अधिकारों पर सीधा डाका है। यह मेहनतकश वर्ग की रोजी-रोटी पर हमला है, गरीबों के काम मांगने के मौलिक अधिकार का हनन है और मजदूरों के हकों पर कुठाराघात है। उन्होंने इसे एससी/एसटी/ओबीसी समाज के मनरेगा मजदूरों को सामाजिक न्याय से वंचित करने की साजिश बताया। साथ ही, इसे गोडसे के अनुयायियों द्वारा महात्मा गांधी के दर्शन को खत्म करने की एक और कोशिश करार दिया।
सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि यह कानून गरीबों और मजदूरों के अधिकारों को खत्म करने के लिए 8 दुश्मनीपूर्ण हमले करता है:
1. केंद्र की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना — मनरेगा में मजदूरी का पूरा बजट केंद्र सरकार देती थी, लेकिन नए कानून में केंद्र केवल 60% देगी और 40% राज्य सरकार को देना होगा। जीएसटी और केंद्रीय सेस से राज्यों के पास पहले ही पैसा कम है, जिससे न राज्य दे पाएंगे और न करोड़ों मजदूरों को रोजगार मिलेगा।
2. काम मांगने का अधिकार छीनना — मनरेगा डिमांड ड्रिवन था, जहां मजदूर काम मांगे तो देना अनिवार्य था। नए कानून में केंद्र तय करेगा कि किस राज्य, जिले या गांव में कितना काम, कितने दिन और कहां देना है। सारे अधिकार अब केंद्र के पास, मजदूरों के पास नहीं।
3. बजट पर केंद्र का एकाधिकार — मनरेगा में बजट की कोई सीमा नहीं थी, जितने लोग मांगें उतना काम देना होता था। नए कानून में केंद्र फैसला करेगा कि किस राज्य को कितना बजट मिलेगा। "जिसे चाहे दो, जिसे चाहे मत दो" — यानी पक्षपात की गुंजाइश।
4. 100 दिनों की गारंटी खत्म — मनरेगा में 100 दिनों का काम संवैधानिक अधिकार (अनुच्छेद 39(a) और 41) का प्रतिबिंब था। नए कानून में इसे केवल एक केंद्र प्रायोजित योजना बताया गया है, रोजगार का अधिकार खत्म।
5. किसान-मजदूर बंटवारा और 60 दिनों की रोक
नए कानून में बुआई-कटाई के समय 60 दिनों तक मजदूरी नहीं दी जाएगी। सुरजेवाला ने कहा कि भारत में फसलों का समय अलग-अलग राज्यों में अलग होता है (जैसे खरीफ में मई से जनवरी तक), इससे मजदूरों को भारी नुकसान।
6. ग्राम पंचायत की शक्ति छीनना— मनरेगा में काम का कार्यक्रम ग्राम पंचायत बनाती, मंजूर करती और मॉनिटर करती थी। नए कानून में सभी ग्रामीण कार्य पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान और विकसित ग्राम पंचायत प्लान के अनुसार होंगे। पीएम गति शक्ति इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोग्राम है, ग्रामीण रोजगार से अलग।
7. डिजिटल बोझ से रोजगार रोकना— मनरेगा में फिजिकल मस्टर रोल और सोशल ऑडिट थे। नए कानून में बायोमेट्रिक अटेंडेंस, जीओटैग्ड अटेंडेंस, रीयल टाइम डैशबोर्ड, एआई आदि का बोझ अशिक्षित ग्रामीण मजदूरों पर डाला जाएगा, जिससे नाम कटेंगे और रोजगार मिलना मुश्किल हो जाएगा।
8. मजदूरी दरों पर शोषण— मनरेगा में मजदूरी राज्य के न्यूनतम वेतन के बराबर अनिवार्य थी। नए कानून में यह अनिवार्य नहीं, राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अलग दर हो सकती है — गरीब मजदूरों के शोषण की गारंटी।
सुरजेवाला ने कहा कि महात्मा गांधी श्रम को पूजा मानते थे और मजदूर को भगवान। इसलिए करोड़ों मजदूरों (जिन्हें वे देवता मानते थे) के अधिकार छीनने के लिए सबसे पहले गांधी का नाम हटाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने पिछले 11 सालों में गांधी का चश्मा प्रचार के लिए उधार लिया, लेकिन उनके विचारों को दरकिनार कर दिया। इसी तरह, भगवान राम के नाम पर सत्ता हथियाई, लेकिन उनके आदर्शों की तिलांजलि दे दी।
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