दुनिया से जाते-जाते 3 को नई जिंदगी दे गया हरपिंदर, PGI में हुआ इस साल का पहला ट्रांसप्लांट, ग्रीन कोरीडोर से मुंबई भेजे फेफड़े

punjabkesari.in Tuesday, Jan 13, 2026 - 11:14 AM (IST)

चंडीगढ़: नए साल के पहले कुछ दिनों में फिर ब्रेन डेड मरीजों के परिवारों के मानवता के प्रति जज्बे और आर्गन ट्रांस्पोर्टेशन के लिए राज्यों के बीच कार्डिनेशन की मिसाल सामने आई है। पिछले कई बरसों से ब्रेन डेड मरीजों के आर्गन ट्रांसप्लांट कर रहे पी.जी. आई. में ये मिसाल देखने को मिली। रोजीरोटी का जरिया रहे 10 बरस के व्यक्ति के ब्रेनडेड होने के बाद भी परिवार ने मानवता के प्रति अंजान लोगों के जीवन को बचाने का साहस दिखाया। परिवार के इस फैसले से 3 लोगों को नथा जीवन मिला। ब्रेनडेड पैशेंट की दोनों किडनी तो पी. जी.आई. में ही ट्रांसप्लांट कर दी गई जबकि डोनेट हुए मरीज के लंग्स को मुंबई भेजकर मरीज की जान बचाई गई।

इस ट्रांसप्लांट पर पी. जी. आई. के डाबीक्टर विवेके लाल ने कहा कि इन ट्रांसप्लांट ने फिर मजबूत संदेश दिया कि गहरे से गहरे सदमे और बड़े से बड़े नुकसान के वक्त भी दयाभाव और मानवता जिंदा रहती हैं। अंगदान का फैसला करके परिवार ने न सिर्फ बहुत बड़ा साहस दिखाया बल्कि मानवता के लिए स्वार्थरहित फैसला लेकर तीन लोगों की जान बचाई।

फिर दिखी मानवता और प्रोफेसनल उत्कृष्टता मिसाल

इस ट्रांसप्लांट में एक बार फिर मैडीकल एससीलेंस, मानवता के लिए बलिदान और आर्गन ट्रांसप्लांट के एथिकल कार्डिनेशन की मिसाल देखने को मिली। 6 जनवरी को मोटर साइकिल के सड़क हादसे में नुरपूर बेदी के रहने वाले 40 वर्षीय हरपिंदर सिंह की गंभीर हालत में पी. जी.आई. लाया गया। सिर पर गंभीर चोटें लगी होने के कारण हरपिंदर सिंह को तत्काल वेंटिलेटरी स्पोर्ट सिस्टन पर रख दिया गया लेकिन एडवांस्ड क्रिटिकल केअर देने के बाद भी मरीज की न्यूरोलॉजिकल कंडीशन बिगड़ती चली गई। तमाम प्रयासों के बाद भी 9 जनवरी को हरपिंदर सिंह को ट्रांसप्लांटेशन आफ ह्यूमन आर्गन एंड टिश्यू एक्ट के तहत ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।

सामने आई आर्गन ट्रांसप्लांट कार्डिनेशन की मिसाल

परिवार द्वारा अंगदान का फैसला लिए जाने के बाद रोटी की टीम ने किडनी ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे मरीजों से संपर्क किया तो 2 मरीज तय समय में पी. जी. आई. आकर ट्रांसप्लांट के लिए तैयार हो गए। हरपिंदर सिंह की दोनों किडनी पी.जी. आई. में ही 2 मरीजों को ट्रांसप्लांट की गई लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी पी. जी. आई. को अपने वैटिंग में शामिल मरीजों में से लंग ट्रांसप्लांट के लिए मरीज नहीं मिले तो देश भर के दूसरे अस्पतालों से संपर्क किया गया। मुंबई के सर एच.एन. रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर ने तुरंत ट्रांसप्लांट के लिए हामी भरी तो दोनों संस्थानों के बीच ग्रीन कोरिडोर के जरिए फेफड़े मुंबई भेजने का इंतजाम किया गया।

पी. इसके बाद देश भर में आर्गन ट्रांसप्लांट शेयरिंग नैटवर्क के लिए स्वास्थ्य संस्थानों से लेकर पुलिस और एविएशन इंडस्ट्री के बीच बेहतरीन कार्डिनेशन देखने को मिला। तथ समय में लंग्स मुंबई पहुंचाकर ट्रांसप्लांट कर दिए गए। जी. आई. के एम.एस. और इस पूरे नैटवर्क को संभाल के रोटी के नोडल ऑफिसर प्रो. विपिन कौशल ने कहा कि इन ट्रांसप्लांट ने बार फिर से वहुत ही अच्छे से कार्डिनेट किए जाने वाले ट्रांसप्लांट सिस्टम, एथिकल मैडीकल प्रैक्टिस और संवेदनशीन काउंसिलिंग का उदाहरण पेश किया है। 

 


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Content Writer

Isha

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