पंचकूला में गिरा था माता सती के मस्तिष्क का अग्र भाग, आज भी भक्तों की हर मुराद पूरी कर रही मां
punjabkesari.in Wednesday, Mar 18, 2026 - 07:16 PM (IST)
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): देश भर में माता के 51 शक्तिपीठ है। इनमें से एक पंचकूला का माता मनसा देवी का मंदिर भी है। वैसे तो यहां पर साल भर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन नवरात्र के दिनों में यहां भक्तों की भारी भीड़ रहती है। कहां जाता है कि आज तक माता के दरबार से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं गया। आम जनता के साथ बड़े-बड़े राजनेता भी माता के दर्शनों के लिए आते हैं।
मंदिर के पुजारी पंडित जितेंद्र शास्त्री ने बताया कि इस स्थान पर सती माता के मस्तिष्क का अग्र भाग गिरा था। इसलिए इन्हें मनसा देवी कहा जाता है। मस्तिष्क के अग्र भाग को मन भी कहते हैं। इसलिए माता यहां आने वाले हर भक्त के मन की मुराद को पूरा करती है। नवरात्र के दिनों में यहां पर हजारों लाखों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नवरात्र के 9 दिनों में मां के सभी 9 स्वरूपों की पूजा होती है। इस मौके पर मंदिर में उत्सव का माहौल रहता है। उन्होंने बताया कि माता को भगवान शिव की पुत्री भी माना जाता है।
200 सालों से आ रहे श्रद्धालु
माता मनसा देवी के मंदिर का निर्माण मनीमाजरा के महाराजा गोपाल सिंह ने साल 1811 और 1815 के बीच में करवाया था। करीब 200 सालों से इस मंदिर में श्रद्धालु माता मनसा देवी के दरबार में माथा टेकने पहुंचते हैं। आज तक कोई भी शख्स माता के दरबार से खाली हाथ नहीं गया है। देश के अलावा विदेश से भी श्रद्धालु यहां माता मनसा देवी के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं।
कौन है माता मनसा देवी
मनसा देवी को भगवान शिव की मानस पुत्री के रूप में पूजा जाता है। इनका प्रादुर्भाव मस्तक से हुआ है इस कारण इनका नाम मनसा पड़ा। महाभारतके अनुसार इनका वास्तविक नाम जरत्कारु है और इनके समान नाम वाले पति मुनि जरत्कारु तथा पुत्र आस्तिक जी हैं। इन्हें नागराज वासुकी की बहन के रूप में पूजा जाता है, प्रसिद्ध मंदिर एक शक्तिपीठ पर हरिद्वार में स्थापित है। इन्हें शिव की मानस पुत्री माना जाता है परंतु कई पुरातन धार्मिक ग्रंथों में इनका जन्म कश्यप के मस्तक से हुआ हैं, ऐसा भी बताया गया है।[कुछ ग्रंथों में लिखा है कि वासुकि नाग द्वारा बहन की इच्छा करने पर शिव नें उन्हें इसी कन्या का भेंट दिया और वासुकि इस कन्या के तेज को न सह सका और नागलोक में जाकर पोषण के लिये तपस्वी हलाहल को दे दिया। इसी मनसा नामक कन्या की रक्षा के लिये हलाहल नें प्राण त्यागा।
माता मनसा देवी का इतिहास
नवरात्र के पावन मौके पर हम आपको पंचकूला के मशहूर माता मनसा देवी मंदिर का इतिहास बताने जा रहे है, जो अपने आप में बेहद खास है। इस मंदिर का इतिहास बड़ा ही प्रभावशाली है। माता मनसा देवी मंदिर में चैत्र और आश्विन मास के नवरात्रों में मेला लगता है। जिसके चलते यहां लाखों की तादाद में श्रध्दालु आते हैं। यहां लोग माता से अपनी मनोकामना को पूरा करने के लिए आशीर्वाद लेते हैं। माना जाता है कि माता मनसा देवी से मांगी गई हर मुराद माता पूरी करती है।
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