हाईकोर्ट ने हरियाणा को 42 लाख रुपए का पूरा मैडीकल बिल चुकाने का दिया आदेश, 12 साल पुराना है मामला

punjabkesari.in Sunday, Feb 01, 2026 - 11:37 AM (IST)

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारी सुरेश कुमार की ओर से दायर एक रिट याचिका को स्वीकार करते हुए हरियाणा राज्य को उनकी पत्नी की आपातकालीन सर्जरी पर हुए शेष 4,20,766 रुपए के चिकित्सा खर्च की पूरी राशि, 6 प्रतिशत ब्याज सहित, 4 सप्ताह के भीतर चुकाने का निर्देश दिया है। जस्टिस संदीप मौदगिल ने कहा कि राज्य द्वारा 4,63,770 रुपए के कुल दावे में से केवल 43,005 रुपए स्वीकृत करने का निर्णय पूरी तरह से मनमाना, अवैध और भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन था।

याची की पत्नी पूनम की अगस्त 2014 में दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में आपातकालीन सर्जरी हुई थी। न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता की पत्नी को आप्रेशन के लिए दिल्ली के सरिता विहार स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग में आपातकालीन स्थिति में भर्ती करवाया गया था।

आप्रेशन में गर्भाशय और पित्ताशय को निकाल दिया गया और हर्निया का भी आप्रेशन किया गया। मरीज की हालत गंभीर थी और उसकी जान बचाने के लिए उसे तडने भर्ती करवाया गया था। सूचीबद्ध अस्पताल से संपर्क करने या गैर-सूचीबद्ध अस्पताल में इलाज की अनुमति लेने का समय नहीं था। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति का अधिकार जीवन के मौलिक अधिकार में निहित है।

राज्य के इस तर्क को खारिज करते हुए कि अपोलो अस्पताल के पैनल में शामिल न होने के कारण प्रतिपूर्ति केवल पी.जी.आई.एम.ई.आर./ए.आई.एम.एस. की दरों पर ही हो सकती है, अदालत ने कहा कि ऐसा रुख' पूरी तरह से गलत, मनमाना और कानून की दृष्टि से अस्थिर' है। अदालत ने बताया कि सरकारी संस्थान अक्सर अत्यधिक बोझ से दबे रहते हैं, जिससे प्रतीक्षा अवधि लंबी हो जाती है और जीवन-घातक स्थितियों में किसी मरीज या उसके परिचारक के पास पी.जी.आई.एम.ई.आर. में भर्ती या उपचार के लिए प्रतीक्षा करने के अलावा कोई वास्तविक या सार्थक विकल्प नहीं होता है।
 


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Content Writer

Isha

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